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Dainik Bhaskar

Dec 16, 2017, 03:08 PM IST
राजस्थान के जैसलमेर के पास लों राजस्थान के जैसलमेर के पास लों

जैसलमेर. सन् 1971, दिन 3 दिसंबर, पाकिस्तान ने भारत के आठ हवाई अड्डों पर हमला बोल युद्ध का ऐलान कर दिया था। अब भारत के पास जवाबी हमला करने के अलावा कोई विकल्प ही नहीं बचा। इस युद्ध में पाकिस्तान को हर मोर्चे पर हार का सामना करना पड़ा। पाकिस्तान के जनरल अयूब खान की रणनीति थी कि पूर्वी मोर्चे पर भारतीय सेना को दबाव में लाने के लिए जरूरी है कि पश्चिमी मोर्चा खोला जाए, लेकिन यहां पर मोर्चा खोलना पाकिस्तान को भारी पड़ गया। उसे एक मोर्चे पर इतिहास की सबसे करारी हार का सामना करना पड़ा। राजस्थान में लड़ी जा रही ये लड़ाई 7 दिसंबर तक चली और भारत को जीत हासिल हुई। वहीं 1971 का युद्ध कुल 13 दिनों तक चला जो 16 दिसंबर के दिन खत्म हुआ। जानें उस रात की पूरी कहानी...

- थार के रेगिस्तान में जैसलमेर जिले की लोंगेवाला चौकी पर मिली हार को पाक सेना कभी नहीं भुला पाएगी। इस चौकी पर कब्जा जमाने के प्रयास में पाक सेना को अपने 34 टैंक, पांच सौ वाहन से हाथ धोना पड़ा। इसके बावजूद चौकी पर कब्जा नहीं हो सका।
- दूसरे विश्वयुद्ध के बाद दुनिया में यह पहला अवसर था जब किसी सेना ने एक रात में इतनी बड़ी संख्या में अपने टैंक गंवाए हो।
- पाकिस्तान के 2000 सैनिकों ने इस उम्मीद में भारत पर हमला बोला था की वे 'लोंगेवाला में नाश्ता' और 'जोधपुर में डिनर' करेंगे। लेकिन पंजाब रेजीमेंट के 120 जवानों और कुछ बीएसएफ के जवानों के आगे ये बड़ी फौज भी टिक नहीं पाई।

124 जवानों ने किया था पाकिस्तान के सैनिकों का मुकाबला

- थार के रेगिस्तान में बहुत ऊंचे रेतीले टीबे पर स्थित है लोंगेवाला में सीमा सुरक्षा बल की चौकी। युद्ध शुरू होने के समय यहां पर पंजाब रेजीमेंट की ए कम्पनी तैनात थी। 120 जवानों वाली इस कम्पनी की कमान मेजर कुलदीप सिंह चांदपुरी के पास थी। चार दिसंबर को चांदपुरी को सूचना मिली कि बड़ी संख्या में दुश्मन की फौज भारतीय सीमा की तरफ बढ़ रही है।
- उन्होंने रामगढ़ स्थित अपने मुख्यालय से मदद मांगी। इस पर ब्रिगेडियर ईएन रामदास ने कहा चौकी की सुरक्षा के लिए वहीं पर डटे रहो या फिर पैदल ही वहां से रामगढ़ के लिए रवाना हो जाए। फैसला चांदपुरी के हाथ में था। उन्होंने वहीं ठहर कर पाक सेना से दो-दो हाथ करने का फैसला किया।
- चांदपुरी के पास पंजाब रेजिमेंट के 120 और सीमा सुरक्षा बल के चार जवान थे। साथ ही एक जीप पर लगी मोटार्र और दो एमएमजी थीं। थोड़ी ही देर में वायुसेना ने भी पुष्टि कर दी कि बीस किलोमीटर लम्बा सेना का काफिला भारतीय सीमा की तरफ बढ़ रहा है। भारतीय जवानों का एक ही लक्ष्य था कि किसी तरह पाकिस्तानी सेना को आगे बढ़ने से रोका जाए।

भारतीय जवानों को नहीं मिला था एंटी टैंक माइन्स बिछाने का समय

- भारतीय जवानों के पास एंटी टैंक माइन्स बिछाने का समय भी नहीं बचा। रात गहराने के साथ ही पाकिस्तान ने लोंगेवाला चौकी को घेर लिया।
- भारतीय पक्ष पाकिस्तान से पहले हमला होने की उम्मीद में इंतजार करता रहा। रात साढ़े बारह बजे पाकिस्तान ने पहला हमला बोला।
- भारतीय सैनिक इस क्षेत्र के सबसे ऊंचे टीले पर होने के कारण बहुत अच्छी स्थिति में थे, जबकि पाकिस्तानी सेना नीचे खुले मैदान में। पाकिस्तानी टैंकों के हमला करते ही भारतीय जवानों ने अपनी एकमात्र जीप पर लगी मोर्टार से गोले दागने शुरू किए। पहले हमले में ही पाकिस्तान के दो टैंक तबाह कर दिए।

दो घंटे में तबाह हो गए थे पाकिस्तान के 8 टैंक

- भारत की तरफ से हुए जोरदार हमले से पाकिस्तान सेना को अहसास हुआ कि उनके अनुमान से कहीं अधिक संख्या में भारतीय सेना पूरी तैयारी के साथ इस चौकी पर हैं। मेजर चांदपुरी ने हवाई मदद मांगी, लेकिन उस समय वायुसेना के पास उपलब्ध हंटर विमान रात में उड़ान नहीं भर सकते थे। ऐसे में मेजर चांदपुरी को अपने सवा सौ जवानों के साथ पूरी रात पाक सेना को रोके रखना था। यह काम उन्होंने बखूबी किया।
- दो घंटे तक चले पहले दौर के युद्ध में पाक सेना के आठ टैंक उड़ चुके थे। इसके बाद पाक सेना ने रणनीति बदली। थोड़ी देर ठहर कर फिर से जोरदार हमला बोला। इस बार फिर उन्हें अपने चार टैंक गंवाने पड़े। पाक टैंकों के हमले में चौकी पर उपलब्ध एकमात्र जीप भी उड़ गई। इसके साथ ही दो भारतीय जवान भी शहीद हो गए।

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