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यहां खेली गई पत्थरों की होली, आठ लोग हुए घायल

यहां खेली गई पत्थरों की होली, आठ लोग हुए घायल

Danik Bhaskar | Mar 03, 2018, 02:08 PM IST
परंपरा के नाम पर  एक दूसरे पर पत परंपरा के नाम पर एक दूसरे पर पत


भीलूड़ा (डूंगरपुर)। होली रंगों से खेली जाती है, लेकिन जिले के भीलूड़ा गांव में पत्थरों से होली खेली गई। यहां परंपरा की आड़ में बरसों से पत्थरों की राड़ खेलने की परंपरा है। इसमें जहां हर साल सैकड़ों लोग शामिल होते थे इस बार संख्या कुछ घट गई, लेकिन लोगों ने एक-दूसरे पर पत्थर बरसाए। हर साल 50 से ज्यादा लोग घायल होते थे वहीं इस बार सिर्फ 8 लोग घायल हुए। प्रशासन पिलछे कई सालों से इसे रोकने के लिए लोगों को मना रहा है। जानिए और इस बारे में ...


- होली से पहले हर मोहल्ले में बैठकों और ग्रामसभा का दौर चला। प्रशासन व पुलिस की मौजूदगी में स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने ग्रामीणों को समझाने का प्रयास किया था कि इस परंपरा को बंद किया जाए। अधिकांश ग्रामीणों ने राड़ बंद करने की सहमति भी दी। कुछ लोग दबी जुबान में यह जता रहे थे कि सालों से चली आ रही राड़ की परंपरा बंद करने की जरूरत नहीं है बल्कि जरूरत है इसमें आई खराबियों को दूर करने की। इसके पक्ष में खड़े इन्हीं लोगों के कारण इस बार भी राड़ का निर्वहन प्रतीकात्मक रूप में हुआ। कुछ समय के लिए ही, सही लेकिन पत्थरों से राड़ खेली गई।

- होली के दिन रघुनाथजी मंदिर के पास मैदान पर राड़ के लिए कुछ लोग हाथों में पत्थर थामे आमने-सामने हो गए। इसे देखकर कुछ युवा गोफन (पत्थर फेंकरने का औजार) लहराते हुए मैदान में आ गए। गांव के बड़ों ने उन्हें रोकने का प्रयास भी किया, लेकिन उनके जोश के कारण वे मैदान में आने में सफल हो गए। इस कारण करीब आधे घंटे के लिए राड़ खेली गई।

न उत्साह न जोश नजर आया

- सालों की परंपरा अचानक बंद करना मुश्किल जरूर था, लेकिन बड़े लोगों के प्रयास के कारण राड़ खेलने वालों की संख्या करीब 500-600 से सिमटकर 50 हो गई। दर्शकों की संख्या भी हजारों से सिमटकर सैकड़ो में आ गई। लोग यह देखने आए थे कि क्या वाकई राड़ बंद हो सकती है क्योंकि 10 सालों से चल रहे यह प्रयास पहले भी फेल हुए थे।

ये हुए जख्मी
- अस्पताल सूत्रों के अनुसार राड़ के दौरान जख्मी हुए 8 लोगों का उपचार किया गया। गणेशपुरी के लालशंकर पाटीदार (40), धनजी पाटीदार (50), नितेश पाटीदार (19), दिलीप पाटीदार (21), नितिन पाटीदार (17), भीलूड़ा के मुकेश जैन (48), मोहित जैन (8), कमलेश भील व राणीबीली (18) को चोट लगने पर इलाज किया गया।

जनप्रतिनिधियों ने जताया आभार

- पूर्व मंत्री कनकमल कटारा, पूर्व उपप्रधान नरेंद्र पंड्या सहित विभिन्न समाजों के अध्यक्ष, प्रबुद्धजनों ने इस बार प्रतीकात्मक राड़ को बंद करने की दिशा में कदम बढ़ाया। सालों की परंपराओं को बदलने में थोड़ा समय जरूर लगता है।

फोटो : चिंतन जोशी