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सिविल सेवा की तर्ज पर आरएएस मुख्य परीक्षा भी हो गणित रहित

सिविल सेवा की तर्ज पर आरएएस मुख्य परीक्षा भी हो गणित रहित

Aadi Dev Bharadwaj | Last Modified - Dec 19, 2017, 12:48 PM IST


अजमेर। सिविल सेवा परीक्षा की तर्ज पर ही अब आरएएस मुख्य परीक्षा भी गणित रहित ली जाए। इसे देखते हुए ही प्रदेश के अभ्यर्थी अब आयोग से आरएएस 2017 का आयोजन संशोधित पाठयक्रम के आधार पर किए जाने की मांग कर रहे हैं। इसे लेकर प्रदेश में जगह-जगह आंदोलन किए जा रहे हैं। जानिए क्या है मामला ....


- अभ्यर्थियों की मांगों को देखते हुए राजस्थान लोक सेवा आयोग द्वारा आरएएस परीक्षा के पाठ्यक्रम में संशोधन के लिए एक कमेटी का गठन किया जा चुका है। इस कमेटी में आयोग के वरिष्ठ सदस्य डॉ. आरडी सैनी और डॉ. शिव सिंह राठौड़ समेत विभिन्न सदस्य हैं। आरएएस भर्ती में शामिल होने वाले अभ्यर्थियों का कहना है आयोग ने आरएएस परीक्षा 2013 से नया पाठ्यक्रम लागू किया था और नई स्कीम के तहत यह परीक्षा आयोजित हुई थी। इसके बाद आयोग ने आरएएस 2016 का भी आयोजन किया। वह भी इस नई पद्धति के आधार पर ली गई। अभ्यर्थियों का कहना है कि इन दोनों भर्तियों के परिणाम बहुत ही पूर्वाग्रह पूर्ण रहे, जिसमें विज्ञान पृष्ठभूमि के पक्ष में परिणाम झुका नजर आया। इसका मूल कारण मुख्य परीक्षा में अत्यंत असंतुलित द्वितीय प्रश्नपत्र रहा है। इस पेपर में गणित के सेकेंडरी स्तर से भी आगे के प्रश्न पूछे गए जिसके चलते केवल वे ही विद्यार्थी उचित स्थान प्राप्त कर सके जिनके पृष्ठभूमि गणित और विज्ञान से थी। साथ ही गणित विषय की अधिक अंकदायी होने के कारण ऐसे छात्रों के अंक द्वितीय प्रश्नपत्र में बहुत ज्यादा थे। यही कारण रहा की अन्य विषयों में समान अंकों के बावजूद केवल द्वितीय प्रश्न पत्र के आधार पर वही उच्च स्थान प्राप्त करने में सफल रहे।
- विचारणीय प्रश्न यह है कि यदि एक प्रश्नपत्र के अंक ही चयन को निर्धारित करते हैं, तो क्या यह प्रणाली पूर्वाग्रही नहीं है। अभ्यर्थी महावीर सिंह ने कहा कि क्या गणितीय कौशल को प्रशासनिक अभियोग्यता का परिणाम माना जा सकता है। सिंह ने कहा की वर्तमान में किसी भी राज्य लोक सेवा आयोग की परीक्षा में गणित को इस स्वरूप पर निर्धारित भूमिका में नहीं रखा गया है।


यूपीएससी कर चुकी है संशोधन

- यूपीएससी ने भी वर्ष 2011 में सांख्यिकी के 40 अंक के प्रश्न अनावश्यक एवं अतार्किक मानकर हटा दिए थे। इन तथ्यों एवं पिछले 2 परिणामों के आलोक में यह स्पष्ट है कि यह अतार्किक व्यवस्था अन्याय कारक एवं परीक्षा के मूल उद्देश्य से असंगत है। सिंह और अन्य अभ्यर्थियों ने आयोग से आग्रह किया है कि यूपीएससी की तर्ज पर आरएएस मुख्य परीक्षा से भी गणित को हटाया जाए, ताकि मानविकी विभाग से आने वाले अभ्यर्थी भी आरएएस में सफल हो सकें।

पूरे प्रदेश में जारी है आंदोलन
- महावीर सिंह ने बताया कि आरएएस में गणित विषय को हटाने को लेकर जयपुर समेत पूरे प्रदेश में आंदोलन जारी है भीलवाड़ा राजसमंद बाड़मेर जोधपुर समेत विभिन्न जिलों में अभ्यर्थी कलेक्टर के माध्यम से आयोग के वरिष्ठ सदस्य डॉ. आर डी सैनी और सीएम को ज्ञापन भेज रहे हैं। उन्होंने कहा कि हमारा उद्देश्य है कि आयोग आरएएस 2017 का आयोजन संशोधित पाठ्यक्रम के आधार पर ही कराए, इससे प्रदेश के बेरोजगारों का भला हो सके।

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