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पूजा पर विवाद: बूंदी शहर किया गया बंद, धारा 144 तीन दिन से लागू

शहर में मानधाता की छतरी पर पूजा करने को लेकर शुरु हुआ विवाद खत्म नहीं हो रहा है। यहां दो दिन से धारा 144 लागू थी।

DainikBhaskar.com | Last Modified - Jan 02, 2018, 10:54 AM IST

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    शहर में धारा 144 के बाद भी लोग पहुंचे।

    बूंदी. शहर में मानधाता की छतरी पर पूजा करने को लेकर शुरु हुआ विवाद खत्म नहीं हो रहा है। यहां दो दिन से धारा 144 लागू थी। जिसके बाद बूंदी शहर बंद कर दिया गया। मंगलवार सुबह इसमें ढील दी गई थी, लेकिन विवाद बढ़ता देख बंद फिर लागू कर दिया गया। बता दें कि सोमवार को यहां बड़ी संख्या में लोग पूजा करने पहुंचे। जिसके बाद पुलिस को लाठीचार्ज करना पड़ा था। जानें पुरा मामला...

    - यहां टाइगर हिल पर मंगलवार को भी हिंदू महासभा की ओर से मानधाता की छतरी पर बालाजी शिलाखंड की पूजा के ऐलान को देखते हुए पुलिस का भारी दल मौजूद रहा।
    - इस दौरान बड़ी संख्या में लोग मंदिर पहुंचे। यहां पिछले तीन दिन से धारा 144 लागू है।
    - बता दें कि रविवार देर रात पुलिस ने इस मामले में समझाइश का आखिरी प्रयास किया गया था, लेकिन सफलता नहीं मिली। ऐसे में तनाव की स्थिति बरकरार है।
    - महासभा पदाधिकारियों ने कहा था कि हम मार्च नहीं निकालेंगे, कार्यक्रम में कुछ बदलाव के अनुसार अपना कार्यक्रम करेंगे। इसके लिए अतिरिक्त फोर्स बुलाई है।
    - देर रात सीआई अभिषेक पारीक, कोतवाल रामनाथ गुर्जर, तहसीलदार केसरसिंह ने अभयनाथ मंदिर में पहुंचकर पूजा समर्थकों से बातचीत की थी। इस वार्ता में कोई नतीजा नहीं निकल पाया।
    - वार्ता फेल होने के बाद पूजा समर्थकों की गिरफ्तारियां तय हो गईं थी।
    - पुलिस ने उनको स्पष्ट बता दिया कि धारा 144 का उल्लंघन नहीं करने दिया जाएगा। इधर, पुलिस की सख्ती को देखते हुए पूजा समर्थकों ने पूर्व घोषित मालनमासी बालाजी से दोपहर 1 बजे सत्याग्रह मार्च निकालने के बजाय कार्यक्रम में कुछ फेरबदल किया है। समर्थकों की टोलियां अभयनाथ मंदिर, आजाद पार्क, मालनमासी में अलग-अलग समय पर एकत्र होंगी और मानधाता छतरी की तरफ कूच करेगी। जिले के कई हिस्सों से भी टोलियां बूंदी पहुंचेंगी।

    विहिप का दावा: 1917 में की जाती थी पूजा

    - बता दें विवाद के कारण यहां पूजा करने पर प्रशासन ने रोक लगा रखी है.। विहिप पदाधिकारियों का दावा है कि पुराने जमाने में मानधाता छतरी में देव प्रतिमाएं स्थापित थीं, पुजारी और आम नागरिक पूजा करते थे।
    - वर्ष 1917 में आकाशीय बिजली से ये क्षतिग्रस्त हो गई, अवशेष मलबा पड़ा रहा, बाद में कुछ असामाजिक तत्वों ने अवशेष तालाब में फैंक दिए, कुछ बच गए।
    - हाल ही वन विभाग ने वहां रेस्टोरेशन शुरू किया तो बालाजी प्रतिमा दास मुद्रा में मिली, सूचना देने पर प्रशासन ने चबूतरे पर स्थापित करा दी। प्रशासन की जांच में प्रतिमा छतरी के समकालीन पाई गई है।
    - नगर मंत्री सुनील हाड़ौती के मुताबिक पुरातत्व विभाग सभी समाजों के मौतबिर सदस्यों ने 4 मई की शांति सभा में वहां मानधाता छतरी शिलाखंड को छतरी का हिस्सा माना था। टाइगर हिल वन विभाग के अधिकार क्षेत्र में है।
    - हाड़ौती ने जिला प्रशासन को समाज विशेष की ओर से दिए गए ज्ञापन में बताए गए तथ्यों पर भी ऐतराज जताया है।



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    भीड़ को काबू करने के लिए सोमवार को हुआ लाठीचार्ज।
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    पूजा करने पर अड़ा विहिप।
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