--Advertisement--

न्यूज हिंदी

न्यूज हिंदी

Dainik Bhaskar

Mar 01, 2018, 03:21 PM IST
diffrent holi celebration in bikaner

बीकानेर. होली पर शहर में हर्ष और व्यास जाति के बीच युद्ध हुआ। युद्ध के हथियार थे डोलची और पानी। यानी डोलची मार खेल। होली के मौके पर प्रेम और सौहार्द का प्रतीक डोलची मार खेल हर्षों की ढाल पर खेला गया जिसमें छह टैंकर पानी इस्तेमाल किया गया। चमड़े की बनी डोलची में पानी भरकर एक-दूसरे की पीट पर वार किया गया। दोपहर दो बजे शुरू हुए खेल को देखने के लिए शहर भर के लोग हर्षों की ढाल पहुंचे। पानी की तीखी मार के बाद भी इन जातियों के लोगों के चेहरों से खुशी व प्रेम ही झलकता रहता है। हर्ष जाती के रामकुमार हर्ष ने बताया की दोनों जातियों के बीच डोलची मार का यह खेल उस वक्त से चला आ रहा है जब इन दोनों जातियों में प्रेम की जगह एक दूसरे के प्रति द्वेष भावना थी। जानें क्या रहा खास...

हाथों में डोलचियां, पानी से भरे बड़े कड़ाव और इन कड़ाव से पानी लेकर कर एक दूसरे की पीठ पर वार करते हर्ष-व्यास जाति के लोग। यह नजारा है सदियों पुरानी स्नेह परंपरा को निभाने का। व्यास और हर्ष एक दूसरे की पीठ पर वार करते और सटाक… की आवाज के साथ ही क्या बात है का जुमला गूंज उठता है। इतना ही नहीं अपनी-अपनी जाति का समर्थन करने वाले हूटिंग के जरिये हौसला अफजाई भी करते हैं। खेल के लिए अल सुबह ही कड़ाव हर्षों के चौक में रख दिए जाते हैं। सूरज-निकलते ही सभी कड़ाई और टंकियां पानी से भर दी जाती है।

खेल का रोमांच इतना होता है कि हर आयु वर्ग के लोग पानी की जंग में शरीक हुए। व्यासों के चौक से लेकर मूंधड़ा चौक, बर्षों का चौक मोहता चौक, रत्ताणी व्यासों की घाटी तक मेले का अहसास हुआ। हर्षों-व्यासों की यह पानी की जंग देखने बड़ी संख्या में महिलाएं भी छतों पर पहुंची। दो घंटे की जंग के बाद जब हर्ष जाति के लोगों की ओर से व्यास जाति की इजाजत से गुलाल उछाली गई तो इसी के साथ ही एक दूसरी जाति के लिए शुरू हो जाता है गीतों का दौर।दोनों जातियों के बड़े-बुजुर्ग एक दूसरे को हाथ जोड़कर अगले वर्ष फिर इसी तिथि पर खेलने का कह कर विदाई ली।

328 साल पुरानी है डोलची मार खेल की परंपरा

पुष्करणा समाज की हर्ष और व्यास जाति के बीच खेले जाने वाले डोलची मार खेल की परंपरा 328 सालों से निभाई जा रही है। बनवाली हर्ष परिवार इस खेल को शुरू करता है तो माथुर समाज के लोग गुलाल उड़ाकर इस खेल के पूरा होने की घोषणा करता है। पुष्करणा समाज की हर्ष और व्यास जाति के बीच खेले जाने वाले डोलची मार खेल की परंपरा 328 सालों से निभाई जा रही है। बनवाली हर्ष परिवार इस खेल को शुरू करता है तो माथुर समाज के लोग गुलाल उड़ाकर इस खेल के पूरा होने की घोषणा करता है। यह खेल होली के आयोजन में मुख्य आकर्षण होता है।

फोटोज- परिमल हर्ष

X
diffrent holi celebration in bikaner
Bhaskar Whatsapp

Recommended

Click to listen..