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मंत्री अपने गांव की सुरक्षित नहीं रख पाए वन विभाग, फिर प्रदेश के वनों के संरक्षण की उम्मीद नहीं

मंत्री अपने गांव की सुरक्षित नहीं रख पाए वन विभाग, फिर प्रदेश के वनों के संरक्षण की उम्मीद नहीं

Danik Bhaskar | Jan 24, 2018, 03:06 PM IST

खींवसर। प्रदेश के वन मंत्री अपने खुद के गांव में स्थित वन विभाग को सुरक्षित नहीं रख पाने वाले पर्यावरण व वन मंत्री प्रदेश के वन की सुरक्षा कैसे कर पाएंगें। सरकार के वनमंत्री भले ही प्रदेश में वन संरक्षण को लेकर लाख दावे करे लेकिन खुद के गांव के हालात बांया कर सरकार की वन संरक्षण योजना कर पूरी पोल पट्टी खोल रही है।

- पर्यावरण व वन संरक्षण के लिए सरकार सालाना करोड़ों रुपयों का बजट खर्च कर रही है लेकिन मंत्री ने अपने गांव में भी वन संरक्षण को लेकर कभी झांक कर नहीं देखने से कस्बे की नर्सरी पिछले तीन सालों से वीराना पडी़ हुई है।
- खींवसर में तीन सालों से बंद पड़ा वन विभाग – वन संरक्षण को लेकर विभाग ने खींवसर में वर्ष 1986 में वन विभाग स्थापित की गई, करीब तीन दशक तक वन विभाग की नर्सरी को सही ढंग से चलाकर क्षेत्र में वन क्षेत्र को मजबूत करने के लिए कार्य किया। लेकिन प्रदेश के पर्यावरण व वनमंत्री गजेन्द्रसिंह खींवसर बनने के तुरंत बाद उनके गांव में स्थित वन विभाग व नर्सरी उजड़ गई।

- मंत्री व वनविभाग की अनदेखी के चलते नर्सरी में तीन वर्षों से पौधारोपण तक नहीं किया गया। वही अधिकारियों की अनदेखी के चलते खींवसर क्षेत्र में पर्यावरण पर खतरा मंडरा रहा है। वन विभाग के अधिकारियों ने तीन वर्ष पूर्व नर्सरी में खारे पानी के कारण पेड नहीं पनपने का बहाना बनाकर नर्सरी को बंद कर दिया था।
- दो से तीन लाख पौधे होते थे नर्सरी में तैयार- कस्बे में स्थित वन विभाग की नर्सरी में तीन साल पहले प्रत्येक साल दो से तीन लाख के बीच पौधे तैयार किए जाते थे। कस्बे में तैयार पौधे क्षेत्र में लगाकर वन संरक्षण को मजबूती मिलती थी, लेकिन पिछले तीन वर्षों से नर्सरी में एक भी पौधा तैयार नहीं किया गया।

- पौधे तैयार नहीं करने के कारण मजबूरी में ग्रामीणों को सीजन में पौधों के लिए जिला मुख्यालय से पौधे मंगवाकर लगाने पड़ते है।
- वन नर्सरी के पास से गुजर रही मीठे पानी की लाईन- खींवसर क्षेत्र में दो वर्ष पूर्व गांवों में नहरी का मीठा पानी की जाने वाली सप्लाई की लाईन कस्बे के नर्सरी के पास से गुजर रही है। अधिकारियों द्वारा नर्सरी में विभाग से मीठे पानी की सप्लाई शुरू कर नर्सरी को जिंदा रख सकते है।

- लेकिन वन विभाग के अधिकारियों नर्सरी को मीठे पानी मांग को लेकर नहरी विभाग से कभी पत्र व्यवहार तक नहीं किया। अधिकारियों की अनदेखी के चलते कस्बे की नर्सरी उजड़ गई।
पता करेगे- खींवसर में खारा पानी होने के कारण वन विभाग की नर्सरी बंद कर दी गई।

- अगर नर्सरी के पास से मीठे पानी की पाइप लाईन गुजर रही है तो इस बारे में पता करेगे।
वेदप्रकाश गुर्जर, उपवन निदेशक, वन विभाग, नागौर