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अब 23 मई तक टला गुर्जर आरक्षण आंदोलन, कर्नल बैंसला ने किया ऐलान

भरतपुर जिले में 15 मई से शुरु होने वाला गुर्जरों के महापड़ाव और आंदोलन की अगले सात दिनों के लिए टल गया है।

Vishnu Sharma| Last Modified - May 15, 2018, 06:16 PM IST

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अब 23 मई तक टला गुर्जर आरक्षण आंदोलन, कर्नल बैंसला ने किया ऐलान

जयपुर. पांच प्रतिशत आरक्षण की मांग को लेकर भरतपुर जिले में 15 मई से शुरु होने वाला गुर्जरों के महापड़ाव और आंदोलन की अगले सात दिनों के लिए टल गया है। मंगलवार को बयाना तहसील के अड्डा गांव में महापंचायत के बीच तेज आंधी चलने लगी। इससे सभा में व्यवधान उत्पन्न हुआ और कुछ ही मिनटों बाद सभा में मौजूद गुर्जर आरक्षण संघर्ष समिति की अगुवाई करने वाले मुखिया कर्नल किरोड़ी सिंह बैंसला ने महापड़ाव 23 मई तक टाल दिया।

-जानकारी के अनुसार सभा में कर्नल बैंसला ने एलान किया कि गुर्जर आरक्षण आंदोलन में शहीद हुए लोगों को पीलूपुरा में 23 मई को श्रद्धांजलि दी जाएगी। इसके बाद आगे की रणनीति बनाई जाएगी। वहीं से महापड़ाव व आंदोलन की शुरुआत होगी।

 

एक दिन पहले जयपुर में सरकार व गुर्जर प्रतिनिधियों में हुई थी वार्ता

-इससे पहले गुर्जर आरक्षण संघर्ष समिति की ओर से 15 मई से अड्डा गांव में महापंचायत शुरु होने का एलान किया था। तब सरकार ने किरोड़ी बैंसला समेत अन्य गुर्जर समाज के प्रतिनिधियों को सोमवार को वार्ता के लिए जयपुर बुलाया। जिसमें कर्नल बैंसला के सिवाय अन्य 15 सदस्यीय प्रतिनिधि मंडल जयपुर पहुंचा।

- शाम को सचिवालय में गुर्जर प्रतिनिधियों और सरकार के मंत्रियों के बीच वार्ता शुरु हुई। इस बैठक में देर रात तक मंथन चला। जिसमें सरकार ने कुछ लिखित प्रस्ताव रखे और वार्ता को सकारात्मक बताया। वहीं, गुर्जर प्रतिनिधियों ने वार्ता बेनतीजा बताते हुए सरकार के प्रस्ताव को महापंचायत के बीच रखकर निर्णय लेने की बात कही।

 

सभा के बीच आई आंधी और टल गया आंदोलन

- सोमवार देर रात को ही गुर्जर प्रतिनिधि मंडल बयाना लौट गया। इसके बाद मंगलवार दोपहर को महापंचायत में गुर्जर समाज के लोगों ने अड्डा गांव में जुटना शुरु किया। जिसमें संघर्ष समिति के मुखिया कर्नल किरोड़ी सिंह बैंसला, हिम्मत सिंह गुर्जर समेत अन्य पदाधिकारी सभा में मौजूद रहे। 

- यहां सरकार का प्रस्ताव पढ़कर सुनाया जा रहा था। तभी आंधी चलने लगी और माैसम बिगड़ गया। इसके बाद कर्नल बैंसला ने 23 मई को पीलूपुरा में गुर्जर शहीदों को श्रद्धांजलि देने के बाद महापड़ाव करने का ऐलान किया।

 

क्या है मांग
- गुर्जरों की मांग है कि ओबीसी का अलग से पांच प्रतिशत कोटा तय किया जाए। जिस पर सरकार ने कोई आश्वासन नहीं दिया है।

यह है पूरा मामला:राजस्थान में यह है आरक्षण की स्थिति
- राजस्थान में अन्य पिछड़े वर्ग को 21 प्रतिशत, अनुसूचित जाति को 16 प्रतिशत, अनुसूचित जन जातियों के लिए 12 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान है।
- राज्य विधानसभा ने गुर्जर सहित अन्य पिछड़ी जातियों (गाड़िया लुहार, बंजारा, रेबारी राइका, गड़रिया, गाड़ोलिया व अन्य) को एसबीसी (विशेष पिछड़ा वर्ग) कोटे में 5 प्रतिशत आरक्षण देने के लिए पिछले वर्ष 26 अक्टूबर को ओबीसी आरक्षण विधेयक, 2017 विधानसभा में पारित कर कानून बनाया था।
- इससे पिछड़ा वर्ग के आरक्षण को 21 से बढ़ाकर 26 प्रतिशत कर दिया। सरकार के इस कदम से राजस्थान में कुल आरक्षण 54 प्रतिशत हो गया था जो कि सुप्रीम कोर्ट की गाइड लाइन (50 प्रतिशत) के विपरीत था।

 

पहले हाईकोर्ट ने रोक लगाई, फिर सुप्रीम कोर्ट ने दिए यह निर्देश
- तब याचिकाकर्ता गंगासहाय ने इस विधेयक को असंवैधानिक बताते हुए हाईकोर्ट में चुनौती दी गई थी। याचिका में कहा गया था कि सुप्रीम कोर्ट की ओर से यथास्थिति बनाए रखने के आदेश के बावजूद आरक्षण विधेयक पारित कराया गया। तब हाईकोर्ट ने सुनवाई करते हुए ओबीसी आरक्षण विधेयक, 2017 के क्रियान्वयन पर नवंबर, 2017 में रोक लगा दी थी।
- हाईकोर्ट ने ओबीसी कमीशन की रिपोर्ट को गलत बताते हुए कहा कि राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के पूर्व फैसलों के विपरीत जाकर एसबीसी को आरक्षण दिया है। ऐसे में 50 फीसदी सीमा का उल्लंघन नहीं हो सकता है और नाहीं राज्य सरकार 50 फीसदी से ज्यादा आरक्षण दे सकती है।
- राजस्थान हाईकोर्ट के इस फैसले के खिलाफ राज्य सरकार द्वारा सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई थी। जिस पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान सरकार को आगे की कार्यवाही न करने का निर्देश दिया था।

कितने दिन चले आंदोलन और गुर्जरों ने सरकार को कितने दिन पहले बताया
- 2007 में 29 मई से 5 जून: सात दिन में 22 जिले प्रभावित रहे। 38 लोग मारे गए। गुर्जरों ने 11 अप्रेल 2007 यानी की पौने दो महीने पहले ही बता दिया था कि आंदोलन होगा और राष्ट्रीय राजमार्ग रोके जाएंगे।
- 23 मई से 17 जून 2008: 27 दिन तक आंदोलन चला। 22 जिलों के साथ 9 राज्य प्रभावित रहे। 30 से ज्यादा मौतें हुई। गुर्जरों ने 5 मई को अल्टीमेटम दिया था।
- 20 दिसंबर 2010: बयाना में रेल रोकी गई थी। इसकी घोषणा 8 दिसंबर 2010 यानी 12 दिन पहले हुई थी।
- 21 मई 2015: कारवाड़ी पीलुकापुरा में रेलवे ट्रैक रोका और इसकी सूचना 13 मई 2015 को ही दी गई।
- अब तक 72 गुर्जर आंदोलन में मरे। राजस्थान में 70 और हरियाणा-पानीपत और यूपी फिरोजाबाद में एक-एक व्यक्ति आंदोलन में मारा गया।

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