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होलिका दहन का सर्वश्रेष्ठ मुहूर्त आज रात 7:41 बजे

होलिका दहन का सर्वश्रेष्ठ मुहूर्त आज रात 7:41 बजे

Danik Bhaskar | Feb 28, 2018, 04:35 PM IST

जयपुर. अगले तीन दिनों तक शहर त्यौहार के रंग में रंग कर खुशियों में डूबा रहेगा। शहरवासी पहले दिन फाल्गुन शुक्ल पूर्णिमा गुरुवार को होलिका दहन करेंगे। होलिका दहन रात 7:41 बजे करना सर्वश्रेष्ठ रहेगा। जानें क्या रहेगा खास...

- शुक्रवार को आपसी रिश्तों में विभिन्न रंगों की खुशियां भरने के लिए फाग गीतों की धमाल के बीच एक-दूसरे के रंग, गुलाल और अबीर लगाकर धुलंडी मनाएंगे।

- इसी दिन नवविवाहिताएं शिव-पार्वती के अटूट बंधन की तरह अपने प्रियवर के साथ ताउम्र खुशहाल जिंदगी जीने की कामना करते हुए 16 दिन की गणगौर पूजा शुरू करेंगी।

- शनिवार को बहनें अपने भाइयों की लंबी उम्र के लिए भाई दूज मनाएंगी। दूज माता की पूजा कर भाइयों को तिलक लगाएंगी।

भद्रा रहित प्रदोष व्यापिनी पूर्णिमा होलिका दहन श्रेष्ठ

ज्योतिषशास्त्री पं. दिनेश मिश्रा का कहना है कि फाल्गुन शुक्ल पक्ष प्रदोष व्यापिनी पूर्णिमा को भद्रा रहित होलिका दहन करना सर्वश्रेष्ठ रहता है। एक मार्च को सुबह 8:58 बजे से पूर्णिमा शुरू होगी। इसके साथ ही सुबह 8:58 से रात 7:40 बजे तक भद्रा रहेगी। ऐसे में होलिका दहन रात 7:41 बजे करना सर्वश्रेष्ठ रहेगा। इस दरम्यान भद्रा रहित पूर्णिमा रहेगी।

राशि के अनुसार होलिका में डालें सामग्री

पं. मिश्रा कहना है कि होलिका दहन के दौरान राशि के अनुसार कुछ सामग्री डालकर कई तरह की परेशानियों को दूर किया जा सकता है।

मेष- पताशे, पीपल की लकड़ी

वृष- सौंफ, खेर की लकड़ी

मिथुन- जायफल, पीपल की लकड़ी

कर्क- मिश्री व पलाश की लकड़ी

सिंह- गुड़ व गूलर की लकड़ी

कन्या- कलौंजी व शमी की लकड़ी

तुला-कपूर व अपामार्ग की लकड़ी

वृश्चिक- पीली सरसो व आम की लकड़ी

धनु- काली सरसो व शमी की लकड़ी

मकर- दो लोंग के साथ पतासे व पीपल की लकड़ी

कुंभ- काली मिर्च व खदिर की लकड़ी

मीन- मखाने व पलास की लकड़ी।