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वर्ल्ड में फेमस है यह भुतहा गांव सूरज डूबने के साथ लग जाता है नो एंट्री का ताला

दुनियाभर में भुतहा जगह के रूप में कुख्यात कुलधरा गांव में अब लोग रात बिता सकेंगे।

DainikBhaskar.com | Last Modified - Jan 02, 2018, 04:22 PM IST

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    पालीवाल ब्राह्मणों की कुलधार शाखा ने सन 1291 में लगभग 600 घरों वाले इस गांव को बसाया था।

    जैसलमेर. दुनियाभर में भुतहा जगह के रूप में कुख्यात कुलधरा गांव में अब लोग रात बिता सकेंगे। इसे पुरातत्व विभाग अब पूरी तरह से टूरिस्ट प्लेस के रूप में डेवलप कर रहा है। राजस्थान सरकार के पुरातत्व एवं संग्रहालय विभाग द्वारा यहां होटल और कॉटेज बनाने की तैयारी की जा रही है। जानें क्या रहेगा खास...


    - सरकार ने फैसला लिया है कि इस जगह को अब होटल, कॉफी शॉप, बाजार और फिल्मों की शूटिंग के लिए किराए पर दिया जाएगा।
    - जिसके लिए यहां पानी से लेकर बिजली तक के कनेक्शन उपलब्ध करवाए जाएंगे।
    - बता दें कि पहले से ही यहां राज्य सरकार इतिहास को संरक्षित करने के लिए 4.43 करोड़ से बाहरी विकास कार्य और जेएसडब्ल्यू कंपनी की ओर से 9 करोड़ के अंदरूनी कार्य करवाए जा रहे हैं। फिलहाल ये काम भी यहां चल रहा है।


    गांव से जुड़ी क्या है कहानी


    - पालीवाल जाति के लोगों ने सन 1291 में इस गांव को बसाया था। कुलधरा में करीब 600 घरों की बस्ती थी। इन्हीं लोगों के आसपास के 84 गांव थे।
    - सन 1825-30 के बीच पालीवालों ने कुलधरा समेत 84 गांवों को रातों -रात छोड़ दिया था। वे कुलधरा को श्राप देकर गए थे कि यहां दोबारा कोई नहीं बस सकेगा।
    - इसके पीछे एक किंवदंती है जैसलमेर के दीवान सालम सिंह की नजर कुलधरा की एक लड़की पर थी। वह जबरदस्ती इस लड़की से शादी करना चाहता था।
    - दीवान के डर से पालीवाल समाज के लोगों ने कुलधरा और अपने अन्य 84 गांवों को रातों रात खाली कर दिया और कहीं चले गए।

    शानदार बस्ती थी कुलधरा


    - कुलधरा की बसावट में वैज्ञानिक सोच थी। उस जमाने में यहां के मकानों में हर तरह की सुविधाएं थी।
    - मेहनती और रईस पालीवाल ब्राह्मणों की कुलधरा शाखा ने सन 1291 में तकरीबन छह सौ घरों वाले इस गांव को बसाया था।
    - ये गांव इतने वैज्ञानिक तरीकों से बसाए गये थे कि यहां इतनी गर्मी में भी, इनके घर ठंडे ही रहते थे। इन लोगों को हमारे वेद और शास्त्रों का भरपूर ज्ञान था।
    - इसी ज्ञान से इन्होंने अपने लिए इतना कुछ बना लिया था। जैसलमेर में सबसे ज्यादा लगान यही लोग देते थे. वास्तुशास्त्र का इनकों पूरा ज्ञान था।
    - ऐसा कहा जाता है कि कुलधरा गांव एक ही रात में सुनसान उजाड़ में बदल गया था और यहां रहने वाले पालीवाल ब्राह्मण सुरंगों में अपना खजाना छुपा कर गए थे।

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    आज भी वीरान पड़ा है कुलधरा गांव।
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    टूरिस्ट यहां इस चाह में आते हैं कि उन्हें यहां दबा हुआ सोना मिल जाए।
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    यहां आपको खंडहर और पत्थरों के अलावा दूर-दूर तक फैला रेगिस्तान दिखाई देगा।
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    ईंट-पत्थरों से बने इस गांव की बनावट ऐसी थी कि यहां कभी गर्मी का अहसास नहीं होता था।
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    कुलधरा में ऐसे कोण में घर बनाए गये थे कि हवा सीधे घर के भीतर होकर गुज़रती थी।
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    वीरान पड़े इस गांव में काफी सारे मंदिर भी बने हुए हैं।
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