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मानवाधिकार आयोग ने डीजीपी से पूछा, अनुसंधान पर खत्म हो गया प्रशासनिक कंट्रोल

मानवाधिकार आयोग ने युवक की मौत के मामले में पुलिस महानिदेशक को स्पष्टीकरण का और एक मौका दिया है।

Manoj Sharma | Last Modified - May 18, 2018, 01:20 PM IST

  • मानवाधिकार आयोग ने डीजीपी से पूछा, अनुसंधान पर खत्म हो गया प्रशासनिक कंट्रोल

    - डीजीपी को आयोग ने दिया एक और मौका
    जयपुर। राज्य मानवाधिकार आयोग ने युवक की मौत के मामले में पांच साल बाद भी जांच पूरी नहीं करने के मामले में पुलिस महानिदेशक को स्पष्टीकरण का और एक मौका दिया है। आयोग ने डीजीपी से स्पष्ट करते हुए सवाल किया है कि क्या वास्तव में राज्य में आपराधिक अनुसंधान के प्रकरणों में प्रशासनिक कंट्रोल समाप्त हो चुका है?

    यह है मामला

    - आयोग के अनुसार अलवर जिले के टपूकड़ा थाना क्षेत्र में वीरसिंह नामक युवक की प्राकृतिक मौत हो गई थी जिसमें हत्या के आरोप लगाए जाने के बाद पुलिस ने हत्या एवं सबूत नष्ट करने की धाराओं के तहत मामला दर्ज किया था।

    - दलित अधिकार केंद्र संस्था की ओर से परिवाद राष्ट्रीय आयोग को भेजा गया जहां से परिवाद कार्रवाई के लिए राज्य आयोग को प्रेषित किया था। पांच साल बाद भी अनुसंधान पूर्ण नहीं किए जाने पर डीजीपी के माध्यम से रिपोर्ट मांगी गई थी।

    एक अन्य मामले में भी मांगा स्पष्टीकरण

    - आयोग ने एक अन्य मामले में पुलिस महानिदेशक राजस्थान जयपुर से स्पष्ट करने को कहा है कि फौजदारी प्रकरण पुलिस थाना बांदीकुई के अनुसंधान में हुई देरी मात्र के कारण से शिकायतकर्ता व आरोपी राज्य सरकार से हर्जाना प्राप्त करने के अधिकारी किन कारणों से नहीं है।

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