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राजस्थान में चित्तौड़गढ़ का था दिल्ली में मृत मिला भाटिया परिवार, 11 सदस्यों की मौत से गांव में शोक

दिल्ली के बुराड़ी इलाके में रहस्यमय मौत का शिकार हुआ 11 सदस्यीय भाटिया परिवार मूल रुप से राजस्थान के चित्तौड़गढ़ का था।

राकेश पटवारी | Last Modified - Jul 03, 2018, 11:05 AM IST

  • राजस्थान में चित्तौड़गढ़ का था दिल्ली में मृत मिला भाटिया परिवार, 11 सदस्यों की मौत से गांव में शोक
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    फांसी पर लटके हुए परिवार के लोगों के मुंह और आंखों पर इस तरह पट्‌टी थी। कुछ के हाथ भी बंधे थे।

    - करीब 50 साल पहले पिता के साथ व्यवसाय करने गांव छोड़ गए थे दोनों मृतक भाई
    - तीसरा भाई राजस्थान के रावतभाटा में ठेकेदारी करता है

    घटना से रिश्तेदार स्तब्ध

    - परिवार को 11 सदस्यों मौत का समाचार दिनेश सिंह व रिश्तेदारों को रविवार सुबह मिला। मौत की खबर से सावा गांव में भी शोक छा गया। पैतृक घर पर काफी संख्या में लोग इकट्‌ठा हो गए। भाई दिनेश सिंह रिश्तेदारों के साथ दिल्ली के लिए रवाना हो गए।

    - पारिवारिक सदस्य महावीर सिंह के मुताबिक भूपाल सिंह व उनके दोनों बेटों के हरियाणा-दिल्ली में रहने से उनका बरसों तक पैतृक गांव सावा में आना जाना बंद हो गया था। वहीं, तीसरा बेटा दिनेश सिंह कारोबार करने सउदी अरब चला गया था।

    - उनके दोनों भाई भूपी सिंह व ललित सिंह अपने परिवार के साथ तीन साल पहले सावा में शादी में भाग लेने आए थे। इसके बाद वे लगातार पुश्तैनी गांव में अपने परिजनों से जुड़े हुए थे। जरुरत होने पर मदद भी करते थे। वहीं, दिनेश सिंह भी सउदी अरब से राजस्थान आकर रहने लगा। उनकी बहन बिल्ले सोनीपत, हरियाणा में रहती है।
    - महावीर का कहना है कि ललित सिंह पर दिल्ली में छह साल पहले किसी बात को लेकर जानलेवा हमला हुआ था। इस हमले के कारण करीब ढाई साल तक उनकी आवाज भी बंद रही थी।

    पुलिस की जांच के 3 एंगल

    1. अंधविश्वास : परिवार के लोग भगवान से मिलने का रास्ता ढूंढ रहे थे। हर काम साथ करते थे। अगर कोई मौन व्रत रखे तो सभी रखते थे। रजिस्टर में लिखा है कि सीधे भगवान से मिलना है तो मोक्ष प्राप्ति के समय घर के दरवाजे खुले रखें। पड़ोसियों को दरवाजे खुले ही मिले थे। सीसीटीवी फुटेज में कोई बाहरी आता-जाता नहीं दिखा।

    2. हत्या... यह भी आशंका जताई जा रही है कि परिवार के ही किसी सदस्य ने खाने में नशीला पदार्थ मिलाया हो और फिर सबको फंदे पर लटकाकर मार दिया हो। बाद में खुद भी आत्महत्या कर ली हो। आंख व मुंह बंद करना इस आशंका को जन्म देता है। हालांकि, एक अकेले व्यक्ति के लिए यह काम संभव नहीं है।

    3. आत्महत्या...घर का सामान बिखरा नहीं था। सातों महिलाओं के शरीर पर ज्वेलरी ज्यों की त्यों है। कीमती सामान भी गायब नहीं है। फंदे में इस्तेमाल चुन्नी में टेलीफोन का तार भी है, ताकि यह टूटे ना। एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि साक्ष्यों से आत्महत्या का मामला लगता है।

    ये है मृतक:

    - भूपीसिंह (45), उसकी पत्नी श्वेता (42), बेटी नीतू (24), बेटी मीनू (22) और बेटा धीरू (12), भूपी का भाई ललितसिंह (42) उसकी पत्नी टीना (38), ललित का 12 साल का बेटा, भूपी की मां नारायण (75), भूपी की बहन प्रतिभा (60), प्रतिभा की बेटी प्रियंका (30)। इनमें 10 लोग छत पर लगे लोहे के जाल से फंदे पर लटके हुए थे। वहीं, बुजुर्ग मां नारायण देवी की लाश फर्श पर पड़ी थी। पुलिस का मानना है कि नारायण देवी की गला घोंट कर हत्या की गई है। लेकिन बाकी दस सदस्यों की हत्या हुई या आत्महत्या। इसका खुलासा नहीं हुआ है।

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    प्रतिभा की बेटी प्रियंका की सगाई 17 जून को ही हुई थी। खुशियोंभरा फैमिली फोटो उसी दिन का है। इनसेट में नारायणी देवी। फोटो में दिख रहे सभी 11 लोग मृत मिले।
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