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अंगदान से फैला सकते हैं लोगों के जीवन में उजियारा

अंगदान से फैला सकते हैं लोगों के जीवन में उजियारा

Anant Aeron | Last Modified - Dec 30, 2017, 01:20 PM IST

जयपुर. अंगदान किसी बीमार व्यक्ति को जीवन दान देने का सबसे अच्छा तरीका है। हम खुद अंगदान करके और अपने परिजनों-मित्रों को इसके लिए प्रेरित करके समाज में बहुत बड़ा बदलाव ला सकते हैं। हमारे अंगदान से या परिजनों के अंगदान की सहमति से बहुत सारी जानें बचाई जा सकती हैं। इस पुण्य काम को बहुत सारे लोग करना तो चाहते हैं लेकिन कैसे करें और इसके लिए कानून क्या है इसके बारे में वे कुछ नहीं जानते। आइए जानते हैं अंगदान से जुड़ी कुछ जरूरी बातें...


नेशनल नेटवर्क


केंद्र सरकार ने मानव अंग और ऊतक (टिश्यूज) को निष्कासन (निकालने) और संग्रहण के लिए एक राष्ट्रीय नेटवर्क स्थापित किया है, जिसका नाम एनओटीटीओ (NOTTO) है, जिसका अर्थ है राष्ट्रीय अंग एवं ऊतक प्रत्यारोपण संगठन। एनओटीटीओ (नोटो) के पांच क्षेत्रीय नेटवर्क (आरओटीटीओ) हैं। इनके अंतर्गत हर राज्य में एसओटीटीओ (राज्य मानव अंग ऊतक प्रत्यारोपण संगठन) कार्यरत है। अंगदान के क्षेत्र में कार्यरत अस्पताल और संस्थाएं ROTTO/SOTTO के जरिए NOTTO से जुड़े हैं।

अंग दान पर कानूनी स्थिति


कानून के तहत अंग प्रत्यारोपण और दान की अनुमति दी जाती है और इसे मानव अंग प्रत्यारोपण अधिनियम, 1994 के तहत कवर किया गया है, जिसमें जीवित और ब्रेन डेड दाताओं द्वारा अंग दान की अनुमति दी गई है। वर्ष 2011 में अधिनियम के संशोधन के जरिए ऊतकों के दान को इसमें शामिल किया गया है और संशोधित अधिनियम ऊतकों और अंगों के प्रत्यारोपण अधिनियम 2011 कहलाता है।

क्या मुझे हमेशा अपना दाता कार्ड साथ रखने की जरूरत है


हां,यह स्वास्थ्य पेशेवरों और आपके परिवार के लिए मददगार होगा और किसी कारण मृत्यु पर तुरंत अंगदान की प्रक्रिया में सहायक होगा।

क्या मुझे एक से अधिक प्रतिज्ञा करने की जरूरत है


नहीं,यदि आपने पहले से ही एक संगठन के साथ प्रतिज्ञा की है और एक दाता कार्ड प्राप्त किया है, तो आपको किसी भी अन्य संगठन के साथ दर्ज करने की जरूरत नहीं है। एक व्यस्क व्यक्ति, परिवार की सहमति के बिना, प्रतिज्ञा दर्ज करा सकता है। हां, आप प्रतिज्ञा कर सकते हैं किंतु आपको अपने बहुत नजदीकी व्यक्ति को, लंबे समय रहे दोस्त या घनिष्ठ सहकर्मी को सूचित करना चाहिए कि आपने यह प्रतिज्ञा लेने का निर्णय लिया है। अापके अंगदान की इच्छा पूरी करने के लिए अंगदान समन्वयक किसी ऐसे व्यक्ति से बात करेंगे जो आपकी मृत्यु के समय सहमति के लिए आपके पास होंगे।

यदि मैं पहले प्रतिज्ञा करूं और बाद में मेरा मन बदल जाए तो..


अंगदान की प्रतिज्ञा करने मात्र से मृत्योंपरांत अंगदान नहीं किया जा सकता है। इसके लिए परिजनों की स्वीकृति आवश्यक है। अत: आवश्यक है कि आपके परिवार को बताएं कि आपने अंगदान करने की प्रतिज्ञा के बारे में अपना मन बदल दिया है। यहां यह भी उल्लेखनीय है कि अंगदान के बारे में यदि परिवार के सदस्याें को आपत्ति है तो दान की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ाई जा सकती।

मैं एक दाता कैसे हो सकता हूं, दाता प्रतिज्ञा लेने की क्या प्रक्रिया है।


आप हमारी वेबसाइट angdaanmahadaan.com पर जाकर प्रतिज्ञा फॉर्म भर सकते हैं और भारत सरकार की वेब साइट notto.nic.in पर जाकर भी फॉर्म भर सकते हैं। साथही हमारेनॉलेज पार्टनर- मोहन फाउंडेशन जयपुर सिटीजन फोरम की साइट mfjcfnavjeevan.infoपर साइनइन कर अपने अंगों के दान की शपथ ले सकते हैं और रजिस्ट्रेशन करा सकते हैं। mfjcfnavjeevan.info वेबसाइट से आप फॉर्म-7 डाउनलोड करते हुए अपना ऑफ लाइन रजिस्ट्रेशन करा सकते हैं। अधिक जानकारी के लिए टोल फ्री हैल्पलाइन नंबर 1800-270-370-1 पर कॉल कर सकते हैं।

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