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12 साल में एक बार खिलता है ये फूल, इनके स्वागत में बन रहे गाने

लक्ष्मी प्रसाद पंत | Last Modified - Jan 01, 2018, 06:26 PM IST

मुन्नार (केरल) की सबसे रूमानी और खूबसूरत सुबह।
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    एराविकुलम नेशनल पार्क करीब 100 स्क्वेयर किलोमीटर में फैला है।

    इराईकुलम नेशनल पार्क (केरल).मुन्नार (केरल) की सबसे रूमानी और खूबसूरत सुबह। सूरज की पहली किरण खिड़की को खटखटाकर यह बताने आ गई है कि बरखुरदार, अगर जीवन के सबसे रोमांचक अनुभव से गुजरना है तो होटल के रूम से बाहर निकलो। इराईकुलम नेशनल पार्क चलो...। वहां सर्दियों की चमकती धूप में नीलकुरेंजी के बीज फूटकर जमीन से बाहर आ गए हैं और खिलने को तैयार हैं। वो भी पूरे 12 साल बाद। यही वो खुशबूदार जगमगाती रूमानियत और खूबसूरती का आनंद है जो आपको भी इराईकुलम आने के लिए आवाज दे रहा है। इस साल यहां जीवन की नई वर्णमाला लिखी जा रही है, जिसके अक्षर जुड़ जुड़ कर जीवन के आनंद के ही पर्यायवाची बनेंगे।


    आमतौर पर केरल का मतलब है- गॉडस ओन कंट्री (देवताओं का निवास) और नारियल, खजूर और हाथियों की खूबसूरत धरती। लेकिन मैं जो लिखने जा रहा हूं वो एक खूबसूरत घाटी में 12 साल में एक बार खुलने और खिलने वाले फूल की तिलिस्मी कहानी है। इस अन्जानी पहचान से केरल को बहुत कम लोग जानते हैं। मैं खुद अंजान था। जब जाना तो इस सुखद आश्चर्य में बंधता चला गया। मेरी तरह आप भी बैंगनी रंग के नीलकुरेंजी फूल के काव्य व भाव के सौंदर्य की नई खुशबू को इसी तरह महसूस कीजिएगा।

    अब इस रहस्यमयी कहानी का खुलासा। मुनार से इराकुलम नेशनल पार्क की दूरी मात्र 12 किमी है और रास्ता भी ताजगी भरा। चाय के बगानों की हरी भरी घाटियों से चढ़ती उतरती ढलानों पर जब गाड़ी चलती है तो लंबे रोलर कोस्टर का फील आता है। इराकुलम पार्क में केवल सरकारी गाड़ी से ही जा सकते हैं लेकिन यह भी चमत्कारिक और आध्यात्मिक अनुभव से कम नहीं है। जब आप उस तराई पर पहुंचते जहां नीलकुरेंजी फूल खिलते हैं तो आप उत्साह, उल्लास, गौरव, भावुकता और आनंद के अलग-अलग भावों में तैर रहे होते हैं। ऐसा महसूस करते हैं कि मैं उस जीवन को देख रहा हूं जो 12 साल बाद जमीन से निकला है और कुछ महीनों में मेरे सामने अपना पूरा आकार ले लेगा। जैसे नया साल नई जिज्ञासाओं के साथ आएगा, उसी तरह नीले रंग के ये फूल पूरी घाटी को अपने में समेट लेंगे। जो नीले रंग की परख रखते हैं, वे जानते हैं कि इसके मायने क्या होते हैं। मैं तो यही कहूंगा कि जब मैं इस घाटी से गुजर रहा हूं तो मेरे चारों ओर मुझे जीवन के जिंदा स्मारक नजर आ रहे हैं। और मेरे दिलो-दिमाग में जितनी भी उथल-पुथल है वो भी शांत हो रही है।

    इस पार्क में बतौर इंचार्ज कार्यरत आदर्श मन्नी ने 12 साल पहले भी नीलकुरेंजी फूल खिलते देखे थे। उनकी रंग, चमक, खूश्बू और नमी आज भी आदर्श की आंखों में है, जिसे याद करते ही वो मुस्कुरा उठते हैं। बकौल मन्नी, अद्भुत है इस घाटी की बनावट। वो कहते हैं- हमने जीवन के कई रंग देखे हैं लेकिन जब नीलकुरेंजी से ढकी इस घाटी का नीला रंग देखेंगे तो आपकी रंगों के लिए सोच ही बदल जाएगी। मन्नी की तरह ही नेशनल पार्क के डीएफओ लक्ष्मी और रेंज ऑफीसर संदीप की आंखों में भी अलग सी चमक है। नीलकुरेंजी पर वे बहुत उत्साहित होकर प्रतिक्रिया देते हैं। देखिए, यहां सारे दुनियावी तर्कों को परे रखकर दिल खुश करने वाली यह खूश्बू महसूस कीजिए और राहत की एक गहरी सांस लीजिए। यही इस इराकुलम नेशनल पार्क के होने के मायने हैं।

    मन्नी, संदीप और लक्ष्मी की मानें तो प्रकृति सबसे बड़ी पाठशाला है और यहां आकर मैंने भी जाना कि चारों तरफ खूबसूरती से घिरी मुनार घाटी में जिंदगी के उजाले फैलाते कितने ही रोशनदान हैं। सुबह की ताजा खूबसूरती, दोपहर की चमकती धूप, शाम की हल्की धीमी सर्दी और फिर सूर्यास्त। नीले आकाश में फैला सूर्यास्त का रंग ऐसा है मानो पूरी मुनार घाटी संध्या पूजन की तैयारी में जुटी हो। और रात को तारों से झकाझक भरे आसमान का नजारा भी काबिलेगौर है। गौर करें, इराकुलम नेशनल पार्क में आप शाम 4 बजे तक ही रुक सकते हैं। फिर भी फूलों की दीवानगी इस कदर है कि आजकल रोज 5 हजार से ज्यादा लोग इन्हें देखने आ रहे हैं। जबकि अभी सिर्फ नीलकुरेंजी के पौधे ही फूटकर बाहर आए हैं। फिर भी पार्क अथॉरिटी के अनुसार सीजन शुरू हो गया है और पिछले पांच माह में करीब 5 लाख से अधिक लोग यहां आ चुके हैं। नए साल में जब पौधों पर फूलों के पहले अंकुर फूटेंगे तो नजारा कुछ और ही होगा। नए साल के जून में तो पूरा नेशनल पार्क एक भव्य नीली घाटी में बदल जाएगा।

    अब इस दिलचस्प और सुनहरे सच भी मुलाकात कीजिएगा। मुनार की खूबसूरत बनावट ऊपर से देखने पर ऐसी लगती है कि मानो हरे कालीन की सिलवटों पर पहाड़ियां खड़ी हैं। खूबसूरती के बहुत सारे चेहरे आपको झांकते हुए दिख जाएंगे। लगेगा जैसे उम्मीदों का कंगूरा बना हुआ है। दुनिया में भारत मसालों का सबसे बड़ा उत्पादक और निर्यातक देश है तो इसमें केरल और मुनार का भी बड़ा योगदान है। यानी नए साल पर नीली होने जा रही इस घाटी में मसालों के भी अपने रंग पूरी ताकत से मिलते हैं। हरी इलाइची, काली मिर्च, लाल स्टार एनिस, भूरी दालचीनी, गहरी भूरी कॉफी, ग्रीन टी और रंग बिरंगा नारियल आदि आदि। आप कह सकते हैं यह घाटी नहीं खुश्बूदार, जगमगाती और बेहद अद्भुत रंग बिरंगी कृति है।

    और अंत में। न चाहते भी इस खूबसूरत सफर को मुझे तीन दिन बाद ही समेटना पड़ रहा है। घाटी के अलग-अलग रंगों और खूबसूरती को देखने के लिए कुछ संघर्ष भी करने पड़े जो यहां नहीं लिखे जा सकते। पर यहां से लौटते वक्त मेरे भीतर भर गई ऊर्जा, आनंद,उत्साह और उम्मीद के आगे वे कुछ भी नहीं हैं। और हां, मुझे गर्व और खुशी है कि मैंने 12 साल में एक बार खिलने वाले नीलकुरेंजी फूल के पौधों को छुआ, उसके नर्म रूमानी अहसास को महसूस किया। 2018 की आज पहली सुबह है। आप भी इस घाटी की रूमानियत गहराई से महसूस कीजिए। यकीन मानिए एक खूबसूरत राग आपके भीतर भी गूंजेगा।

    फोटोज- ताराचंद गवारिया



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    केरल के मुन्नार में नीलकुरेंजी के फूलों की घाटी से लक्ष्मी प्रसाद पंत और फोटो जर्नलिस्ट ताराचंद गवारिया की रिपोर्ट।
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    लीलकुसेंजी फूल देखने यहां 2017 में 5 लाख लोग आ चुके हैं।
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    फूलों को देखने करीब 70 लाख लोगों के पहुंचने का अनुमान है।
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    कुछ फूल तो यहां 22 साल बाद खिलेंगे।
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Web Title: Lakshmi Prasad Pant Special Report On Neelakurinji Flower From Munnar
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)

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