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स्वाइन फ्लू जैसी गंभीर बीमारी की जांच ठेके कर्मियों के भरोसे

स्वाइन फ्लू जैसी गंभीर बीमारी की जांच ठेके कर्मियों के भरोसे

Dainik Bhaskar

Mar 07, 2018, 10:57 AM IST
एसएमएस जांच लैब। एसएमएस जांच लैब।

जयपुर। जानलेवा स्वाइन फ्लू के पॉजिटिव व मौत के मामलों में लगातार इजाफा हो रहा है। लेकिन स्वाइन फ्लू जैसी गंभीर बीमारी की जांच ठेके पर काम कर रहे टैक्नीशियनों के भरोसे है। जांच रिपोर्ट में किसी तरह की गलती होने पर कार्रवाई भी नहीं कर सकते। स्वाइन फ्लू की जांच करने वाली एंडवांस वायरोलोजी लैब में 20 लैब टेक्नीशियन में से 10 ठेके वाले हैं। इससे मिल रही जांच रिपोर्ट में गड़बड़ी होने का अंदेशा है। जानिए और इस बारे में ...

- सबसे चौंकाने वाली जानकारी यह है कि पॉजिटिव व नेगेटिव आ रहे मामलों की क्रास चैकिंग के लिए बहुत कम मात्रा में सैंपल भेजते हैं। नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलोजी (एनआईवी) पुणे व नेशनल सेन्टर फॉर डिजीज कंट्रोल (एनसीडीसी) नई दिल्ली को साल में क्रास चैकिंंग के लिए कम से कम चार बार भेजना जाहिए। इससे सही व गलत रिपोर्ट का ठीक तरह से आंकलन किया जा सके, लेकिन मौजूदा स्थिति में सालभर में सिर्फ एक बार ही सैंपल्स की क्रॉस चैकिंग के लिए भेजते हैं। अधिकारी यह कहकर पल्ला झाड़ रहे हैं कि क्रास चैकिंग के लिए भेजते है।

- विशेषज्ञों के अनुसार हर तीसरे माह में एक बार यानी साल में चार बार भेजने से ही सही-गलत का पता चल सकता है।

खामियां

- एडवांस्ड वायरोलोजी लैब में मिलने वाली खामियों में आधे टेक्नीशियन ठेके पर, पॉजिटिव व नेगेटिव सैंपलों को राष्ट्रीय स्तर की लैब में क्रास चैकिंंग के लिए कम सैंपल भेजना, लैब एनएबीएल से मान्य नहीं आदि कारण।

एसएमएस की रिपोर्ट सही, दिल्ली वालों की गड़बड़

- एसएमएस मेडिकल कॉलेज का दावा है कि प्रोटोकोल, क्वालिटी से युक्त मशीन व किट के कारण राज्यपाल कल्याण सिंह की पॉजिटिव रिपोर्ट बिल्कुल सही है जबकि दिल्ली के अपोलो अस्पताल की ओर से जारी रिपोर्ट गड़बड़ हो सकती है।

- गलत होने के प्रमुख कारणों में जांच किट का प्रोपर तापमान पर नहीं होना, ज्यादा समय से रखे जांच किट का इस्तेमाल करना, बार-बार बाहर व अंदर रखना, सैंपल को 4 से 8 डिग्री सेन्टीग्रेड तापमान पर नहीं रखना तथा प्रोपर एक्सट्रेक्शन नहीं, नमूने बदलने की संभावना, वीटीएम ( स्वाब को जिस माध्यम से लैब तक पहुंचाया जाता है) की क्वालिटी सही नहीं, सैंपल पोस्टीरियर फैरिजिंयल से नहीं लेना, न्यूक्लिक एसिड के सेपरेशन की प्रक्रिया में गलती की संभावना माना जा रहा है।

किस साल कितनी जांच
वर्ष : सीजनल फ्लू: स्वाइन फ्लू: नेगेटिव
2016: 2929: 438: 122: 2368
2017: 12909: 1193: 1459: 10257
(उपयुक्त आंकड़े सिर्फ एसएमएस की वायरोलोजी लैब के है)
एसएमएस मेडिकल कॉलेज के माइक्रोबायलोजी विभाग के अध्यक्ष डॉ.आर.के.माहेश्वरी से

सवाल-जवाब
- राज्यपाल की रिपोर्ट गडबड़ी तो नहीं है।
हमने जो रिपोर्ट दी है, वो सही है।
-आप सही रिपोर्ट का दावा कैस कर रहे हो ?
प्रोटोकोल में सैंपल लेने से लेकर जांच तक में एक्सट्राफिकेशन, एम्पलीफिकेशन व डिटेक्शन जैसे स्टेंडर्ड अपनाते है।
- विधायक अमृता मेघवाल का भी रिपोर्ट का मामला उठा था।
हमारी लैब में पॉजिटिव मिली थी।
-दूसरी लैब में विधायक की जांच नेगेटिव मिली थी।
उन्होंने नेगेटिव कैसे दी, हमें पता नहीं।
-क्या स्वाइन फ्लू जांच ठेके कर्मियो के भरोसे है?
स्थायी व ठेके दोनों पर काम कर रहे है। हम तो एनसीडीसी की Ÿ"र से प्रशिक्षण दे रहे है। जांच के कार्य में लेक्चरर व सीनियर डिमोन्सट्रेटर भी लगे हुए है।
-क्या जांच करने वाली मशीनें तो खराब नहीं है?
यहां पर अच्छी कंपनी की न केवल मशीन बल्कि जांच किट भी क्वालिटी वाला इस्तेमाल होता है।
-क्या क्रास चैकिंग के लिए दूसरी लैब में जांच के लिए भेजे जाते है?
हालांकि एनसीडीसी की ऐसी कोई गाइडलाइन नहीं है। फिर भी हम भेजते है। अब साल में चार बार भेजे जाएंगे।





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एसएमएस जांच लैब।एसएमएस जांच लैब।
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