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महाराणा प्रताप के चेतक का वंशज है ये घोड़ा, जानें क्या है इसकी खासियत

महाराणा प्रताप के चेतक का वंशज है ये घोड़ा, जानें क्या है इसकी खासियत

Dainik Bhaskar

Dec 22, 2017, 03:30 PM IST
ये घोड़ा राजस्थान के बीकानेर श ये घोड़ा राजस्थान के बीकानेर श

बीकानेर. महाराणा प्रताप के घोड़े चेतक का वंशज ‘कमल’ अब बीकानेर में वंशवृद्धि के लिए तैयार है। फरवरी 2006 में केन्द्रीय अश्व उष्ट्र अनुसंधान उदयपुर राजघराने के महाराजा अरविंद सिंह मेवाड़ के राजरतन घोड़े का सीमन यहां लाया था। ढाई साल पहले उस सीमन से कजरी नाम की घोड़ी का कृत्रिम गर्भाधान किया, जिससे ‘कमल’ पैदा हुआ।


- उदयपुर राजघराने का दावा है कि राजरतन घोड़ा चेतक का वंशज है। कमल ढाई साल का हो गया है। केन्द्र इसको देखते हुए अन्य घोडिय़ों से कृत्रिम गर्भाधान कराकर इसकी वंशवृद्धि करने के लिए तैयार कर रहा है।
- अगर उदयपुर राजघराने का दावा सही है तो अब बीकानेर के घोड़े पालने वालों को भी चेतक की वंशवृद्धि का पालन-पोषण और सवारी करने का अवसर मिल सकेगा। केन्द्र में घोड़ी का कृत्रिम गर्भाधान कर अश्व पालक इस वंश को पाल सकेंगे।


उदयपुर राजघराने का दावा

- इतिहास में महाराणा प्रताप के घोड़े का जिक्र 1576 के आसपास आता है। एक घोड़े की औसत उम्र 25 से 30 वर्ष मानी जाती है और अगर पीढ़ी का अनुमान लगाएं तो बीकानेर का कमल 15 या 16वीं पीढ़ी हो सकती है। हालांकि डीएनए के आधार पर केन्द्र के वैज्ञानिक इस बात को पुख्ता तरह से नहीं कह पा रहा कि ये चेतक का ही वंशज है क्योंकि इसके लिए कमल और चेतक का डीएनए होना जरूरी है। इसे उदयपुर राजघराने के दावे से ही चेतक का वंशज बताया जा रहा है।

‘कमल’ की खासियत


- कमल अभी ढाई साल का है लेकिन उसकी मस्तानी चाल केन्द्र को लुभा रही है।
- पिता राजरतन लाल रंग का था जबकि मां कजरी काले रंग की। कमल में दोनों रंगों का मिश्रण है।
- कमल की ऊंचाई चार साल बाद घोषित की जाएगी।
- केन्द्र में कमल की अलग से देखभाल होती है।
- कमल के कान ऊपरी हिस्से पर एक-दूसरे के छोर को छू रहे हैं। इसे घोड़े की बड़ी क्वालिटी माना जाता है।

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