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राजस्थान : 588 करोड़ रुपए में बना डैम टूटा, बालू मिट्‌टी से खड़ी कर दी बांध की दीवारें

588 करोड़ थी डैम की लागत। क्यों टूटा : 9 मीटर से ज्यादा पानी नहीं भरना था, 9.5 मी. से भरा।

जय प्रकाश शर्मा | Last Modified - Apr 01, 2018, 03:40 PM IST

    • Video: घरों में भरा डैम का पानी।

      • 588 करोड़ थी डैम की लागत। क्यों टूटा : 9 मीटर से ज्यादा पानी नहीं भरना था, 9.5 मी. से भरा।
      • बालू मिट्‌टी से खड़ी कर दी बांध की दीवारें, सीमेंट में रेत मिला लेप किया

      मलसीसर/झुंझुनूं।झुंझुनूं के मालसीसर में 588 करोड़ रुपए की लागत से बना बांध शनिवार को टूट गया। करीब आठ करोड़ लीटर पानी बह गया। बांध टूटने से झुंझुनूं और सीकर के 18 शहर और 1473 गांवों का 40 साल पुराना सपना भी टूट गया। बांध टूटने का प्रमुख कारण घटिया निर्माण सामने आया है। एक्सपर्ट के अनुसार बांध और अन्य कार्यों की मरम्मत भी होती है तो एक साल से ज्यादा का वक्त लगेगा। पानी से मलसीसर का एक हिस्सा जलमग्न हो गया हालांकि आबादी क्षेत्र इससे बच गया और जनहानि भी नहीं हुई। एनडीआरएफ की टीम पानी निकासी के लिए जुटी हुई है। रास्तों पर ट्रैफिक रोक दिया गया है। दो किलोमीटर के दायरे में खेत डूबे हुए हैं।

      1) सुबह 10 बजे शुरू हो गया था रिसाव

      - इनमें से 4.5 लाख वर्गमीटर क्षेत्रफल के नौ मीटर जल स्तर क्षमता वाले रिजरवायर में परियोजना के वाटर फिल्टर प्लांट, पंपिंग हाउस की तरफ एक स्थान पर शनिवार सुबह करीब 10 बजे रिसाव होने लगा। मजदूरों ने देखा तो अधिकारियों को इसकी सूचना और रिसाव को रोकने के लिए मिट्टी के कट्टे व पोकलेन मशीन से मिट्टी डालना शुरू कर दिया।
      - रिजरवायर में आठ मीटर से ज्यादा पानी भरा होने से दबाव के कारण दोपहर एक बजकर 8 मिनट पर 20 फीट का हिस्सा टूट गया और पानी पूरे दबाव के साथ निकलने लगा।
      - पानी का दबाव इतना तेज था कि मिट्टी ढहने से टूटा हिस्सा करीब 50 फीट चौड़ा हो गया और कुछ ही मिनटों में निकट ही बने परियोजना के पंपिंग हाउस, क्लोरिंग हाउस, फिल्टर प्लांट्स, प्रशासनिक भवन, मुख्य नियंत्रण भवन, तारानगर पीएचईडी के दफ्तर आदि भवन पानी में आधे डूब गए।
      - हालांकि वहां काम कर रहे मजदूर व कर्मचारी इन भवनों से तत्काल ही निकल गए थे। एक-दो भवनों में ऊपरी मंजिल पर फंसे मजदूरों व कर्मचारियों को भी बाद में वहां से निकाल लिया गया।
      - उल्लेखनीय है कि परियोजना का काम पूरा होने में पहले ही किन्हीं कारणों से एक साल की देरी हो गई थी। अब रिजरवायर टूटने से इसका काम फिर रुक गया है।
      - जानकारी के मुताबिक रिजरवायर का पानी इलाके में ककड़ेऊ गांव की ओर करीब दो किलोमीटर तक खेतों में भर गया। हालांकि आबादी क्षेत्र में पानी नहीं गया, लेकिन मलसीसर के लोगों को चिंता बनी रही।

      2).... नहीं तो और तबाही होती

      - यह भी राहत की बात रही कि इस परियोजना के तहत तारानगर हैड से पानी की आवक दो दिन से बंद थी, अन्यथा पानी का प्रवाह और तेज हो सकता था।

      - घटना की सूचना मिलने के बाद सांसद संतोष अहलावत, मंडावा विधायक नरेंद्र कुमार, पूर्व विधायक रीटा चौधरी, अलसीसर प्रधान गिरधारी लाल खीचड़, कलेक्टर दिनेश कुमार यादव, एडीएम मुन्नीराम बागड़िया, एसपी मनीष अग्रवाल, एसडीएम अनिता धतरवाल, तहसीलदार जीतू सिंह मीणा, जिप सदस्य प्यारेलाल ढूकिया मौके पर पहुंचे।

      3) मामले में यह हुई कार्रवाई

      - बांध की निर्माता कंपनी नागर्जु कंस्ट्रक्श कंपनी (एनसीसी) के खिलाफ पीएचडी ने केस दर्ज करा दिया गया है। पीएचडी के अनुसार बांध घटिया निर्माण के कारण टूटा है।
      - वहीं निर्माता कंपनी पर 2.75 करोड़ रुपए की पेनल्टी भी लगाई गई है।
      - तीन चीफ इंजीनियर्स की अध्यक्षता वाली कमेटी इस मामले की जांच करेगी।
      - विभाग ने दिल्ली व रुडकी आईआईटी के विशेषज्ञों से संपर्क साधा है। ये विशेषज्ञ बताएंगे की भविष्य में ऐसा हादसा हो सकता है हीं यानी बांध की स्टेबिलिटी कितनी है। विभाग के अनुसार बांध केवल दो प्रतिशत ही टूटा है।

      4) निर्माण के दौरान जिम्मेदार दो एक्सईएन निलंबित

      - वर्ष 2013 से लेकर 2015 तक बांध निर्माण की देखरेख के लिए जिन तीन एक्सईएन को जिम्मेदारी दी गई थी, उनमें से दो को सरकार ने निलंबित कर दिया है। एक वीरआरएस ले चुके हैं। उन्होंने बताया कि एक्सईएन हरलाल नेहरा व दिलीप तरंग को निलंबित कर दिया गया है और वीआरएस ले चुके नरसिंह दत्त को नोटिस दिया गया है।


      5) क्यों टूटा, जिम्मेदार कौन- 40 साल पुरानी उम्मीदें भी पानी-पानी

      1. घटिया इंजीनियरिंग का कारण ये भी माना जा रहा है कि ये बांध बालू मिट्टी से ही बनाया गया था। इसकी दीवारों पर सीमेंट का घोल लगाकर टाइलें लगा दी गई थी। जबकि विशेषज्ञों का कहना है कि बालू मिट्टी के साथ चिकनी और दोमट मिट्टी भी काम में ली जानी चाहिए थी। इससे बांध की दीवार मजबूत होती।

      2. 4.5 लाख वर्ग मी. क्षेत्रफल में बने इस बांध में 10 दिन पहले ही ये पूरा भरा गया था। बांध की ऊंचाई 10 मीटर है। गुरुवार शाम तक 9.5 मी. ऊंचाई तक पानी भर दिया था। 9 मीटर ऊंचाई से ज्यादा पानी नहीं भरा जाना था। इसके चलते बांध दवाब झेल नहीं पाया और पानी ज्यादा होने से टूट गया।


      3.बांध से फिल्टर प्लांट में पाइप लाइन के जरिए पानी छोड़ा जाता है। बांध पाइप लाइन के पास से ही टूटा है। बांध तैयार करने के बाद पाइप लाइन डाली गई थी। उस वक्त बांध की सही ढंग से मरम्मत नहीं हुई और ये रिसने लगा। यदि रिसाव को समय रहते देख लिया होता तो बांध को टूटने से बचाया जा सकता था।

      4. इस रिजरवायर में इमरजेंसी आउटलेट बनाया जाना था ताकि ऐसी किसी स्थिति में उस तरफ से पानी सुरक्षित तरीके से निकाला जा सके। जहां आउटलेट बनाया गया है, उसके आसपास 3 से 5 फीट तक पक्का निर्माण होना चाहिए ताकि रिसाव की आशंका न रहे। इस रिजरवायर में एेसा नहीं था।
      (एक्सपर्ट पैनल : मोहनलाल मीणा, एसई (आरयूआईडीपी) शैतानसिंह सांखला, 30 साल से बांध बनाने वाले विशेषज्ञ)

      6) रिसाव से बांध टूटने तक ऐसे चला घटनाक्रम

      - शुक्रवार से नहर में क्लोजर के कारण पानी की आवक थी बंद

      - बांध में पानी था 9 मीटर, टूटने के बाद करीब 3 मीटर अब भी शेष
      - सुबह 10 बजे पानी का रिसाव शुरू
      - रिसाव रोकने का किया प्रयास
      - 1 बजे नाला बना
      - 1:08 बजे 20 फीट की दीवार एक साथ गिरी

      - कस्बे में राजगढ़ रोड पर वार्ड 12 के कुछ घरों में घुसा पानी

      - कंकड़ेउ रोड पर दो किलोमीटर तक गया पानी


      7) क्षेत्र के लिए इसलिए जरूरी था नहरी पानी


      - मलसीसर में भूजल का स्तर 200 फीट तक पहुंचा
      - फ्लोराइड की मात्रा 2 से 3 पीपीएम
      - टीडीएस 4000 से 7000 तक
      - क्लोराइड व नाइट्रेट की स्थिति ठीक, पानी में खारापन ज्यादा

      फैक्ट फाइल
      परियोजना का कार्य शुरू15 जुलाई 2013
      कार्य पूरा होना था14 जुलाई 2016
      नहरी पानी मलसीसर पहुंचा18 मई 2017
      परियोजना की लागत1000 करोड़ रुपए
      परियोजना का ठेकाएनसीसी कंपनी हैदराबाद
      पानी से लाभान्वितझुंझुनूं-सीकर के 18 शहर व 1473 गांव
      बांध की ऊंचाई10 मीटर
      क्षेत्रफल4.5 लाख वर्गमीटर
      पानी का स्टोरेज47 लाख केएल

      फोटो : जय प्रकाश शर्मा

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      पास की बिल्डिंग में भरा पानी।
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      588 करोड़ रुपए की लागत से बना था ये डेम। बनाने में खराब निर्माण सामग्री का उपयोग किया गया।
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      आस-पास का पूरा इलाका जलमग्न हो गया।
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      प्लॉट में भरा डैम का पानी।
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