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5 साल पहले लापता हुआ मासूम 11 साल बाद लौटा, मां को देखकर पहचाना

एक महिला से 17 साल का एक किशोर अचानक आ लिपटा और रोने लगा।

Danik Bhaskar | Sep 10, 2018, 03:06 PM IST
परिजनों के साथ मोनू। परिजनों के साथ मोनू।

- परिजन बोले - हर जगह की तलाश, बाबू महाराज ने सुन ली उनकी पुकार ,जिस दिन गया था मासूम, 11 साल बाद उसी दिन मिला परिवार से

धौलपुर। बयाना के एक गांव में एक महिला से 17 साल का एक किशोर अचानक आ लिपटा और रोने लगा। पूछने पर किशोर ने बताया कि वह उसका 11 साल पहले लापता हुआ बेटा है।गुर्जर कॉलोनी निवासी रामनिवास और उसकी पत्नी भूरी देवी घर से लापता हुए 5 साल के मासूम को तभी से तलाश रहे थे। बाबू महाराज मेले से ठीक एक दिन पहले लापता हुए बालक की तलाश में उसके मां-बाप ने हर जगह तलाश किया जहां उन्हें अपने कलेजे के टुकड़े के होने की संभावना नजर आती। अचानक मिले कलेजे के टुकड़े को देख कर पूरे घर के साथ स्थानीय लोगों में खुशी का माहौल है।


मोनू के पिता ने बताई यह कहानी
मोनू गुर्जर के पिता रामनिवास ने बताया कि 11 साल पहले उनके घर में बाबू महाराज की दोज पर लगने वाले मेले को लेकर तैयारियां चल रही थीं। इसी दौरान उनका बेटा खेलते-खेलते घर से लापता हो गया। परिवार ने उसकी काफी तलाश की। पुलिस में शिकायत दर्ज कराने के बावजूद भी जब मासूम का कोई सुराग नहीं लगा तो उसके परिवार ने पर्चे छपवा कर उसे खोजने वाले को एक लाख रुपए इनाम देने की भी घोषणा की। दो दिन पहले उनकी पत्नी पड़ोस की ही रिश्तेदारी में हुए एक निजी कार्यक्रम में भाग लेने के लिए बयाना थाना क्षेत्र के कोट गांव पहुंची। वहां कार्यक्रम की व्यवस्था संभाल रहे 16 साल के लड़के ने अचानक उनकी पत्नी से लिपट कर रोना शुरू कर दिया। अनजान बच्चे के उसकी पत्नी से लिपट कर रोने पर उससे पूछा गया तो उसने खुद को 11 साल पहले घर से गायब हुआ उनका बेटा बताया। बेटे के अचानक मिल जाने के बाद परिवार ने 2 दिन तक उसकी जानकारी जुटाई। शरीर पर बचपन में आई चोटों के निशान मिलने तथा अन्य जानकारी जुटाने के बाद उन्हीं के लापता बालक होने की पुष्टि हो गई। लापता बालक मिलने के बाद परिवार के लोग सोमवार सुबह अपने बेटे को लेकर घर आ गए। जिस दिन मासूम लापता हुआ ठीक उसी दिन लौटने पर स्थानीय लोग इसे बाबू महाराज का ही चमत्कार मान रहे हैं। लापता के घर लौटने पर क्षेत्र में हर्ष का माहौल बना हुआ है।

मोनू बोला, हर जगह कराई गई बाल मजदूरी, आखिरी में कोट गांव में रखा गया

मोनू ने बताया कि जब पूरा घर बाबू महाराज मेले की तैयारियों में व्यस्त था तभी वह खेलते-खेलते घर से निकल गया। वह आगरा जिले के सलेमपुर गांव पहुंच गया। वहां एक किसान के घर रहने लगा। किसान ने 4 साल तक उससे खेतों में मजदूरी कराई। जिसके बदले उसे सिर्फ दो वक्त का ही खाना दिया जाता। चार साल तक किसान के घर रहने के बाद मोनू वहां से भाग निकला। वहां से मोनू रूपबास में मोहन पंडित के घर पहुंचा। दो साल तक मोहन पंडित के सीमेंट की दुकान पर काम करने के बावजूद भी उसे एक भी पैसा नहीं दिया गया। दुकान मालिक उसे मारता-पीटता भी था। इससे परेशान होकर मोनू कोट गांव के एक होटल पहुंच गया जहां उसे होटल पर पत्थर की खान चलाने वाला एक ठेकेदार मिला। जिस ठेकेदार ने एक साल तक उससे मजदूरी कराई। ठेकेदार की पिटाई खाने के बाद मोनू वापस रूपवास स्थित उसी सीमेंट की दुकान पर पहुंच गया। वहां दुकान मालिक के भांजे के ट्रक पर उसने काम किया। हर जगह पिटाई खाने के बाद अंत में बालक को कोट गांव का ठेकेदार सीताराम गुर्जर अपने घर ले आया। जहां उसने मोनू को पूरे घर की कमान सौंप दी। मोनू ने बताया कि सीताराम के घर में उसे बेटे की तरह रखा जाता था। जिनके यहां हुए कार्यक्रम में उसे अचानक अपनी मां दिखाई दी जिसे वह पहचान गया।

स्थानीय लोग बता रहे बाबू महाराज का चमत्कार
11 साल पहले शुक्ल पक्ष की पड़वा के दिन ही लापता होने और इसी तिथि को घर लौटने पर स्थानीय लोग इसे बाबू महाराज का ही चमत्कार मान रहे हैं। स्थानीय लोगों के मुताबिक 11 साल पहले जब इलाके के लोग बाबू महाराज मेले की तैयारियों में लगे थे तभी बालक लापता हुआ था। मेले की तैयारियों से एक दिन पहले लापता हुआ बालक 11 साल बाद उसी दिन लौटा है जिस दिन वह लापता हुआ था।

फोटो : नीरज चौधरी