--Advertisement--

वीडियो कांफ्रेंसिंग से पेशी संबंधी बिल पर अधिकतर सदस्य सहमत - v - v - v

वीडियो कांफ्रेंसिंग से पेशी संबंधी बिल पर अधिकतर सदस्य सहमत - v - v - v

Danik Bhaskar | Dec 28, 2017, 12:36 PM IST
-माइनर आपत्तियों पर विधि विभाग प्रस्तुत करेगा 11 जनवरी को रिपोर्ट
पॉलिटिकल रिपोर्टर.जयपुर। वीडियो कांफ्रेंसिंग से कोर्ट पेशी को कानूनी वैधता प्रदान करने वाले बिल पर बुधवार को प्रवर समिति के सदस्यों के बीच विस्तार से चर्चा हुई। विधानसभा सचिवालय में करीब डेढ़ घंटे तक चली बैठक में अधिकतर सदस्य सहमत दिखे। हालांकि, कुछ पॉइंट को लेकर सदस्यों ने आपत्तियां जताई जिन पर आगामी 11 जनवरी को होने वाली बैठक में विधि विभाग के अधिकारी स्पष्टीकरण प्रस्तुत करेंगे। गृह मंत्री गुलाब चंद कटारिया ने उम्मीद जताई की अगली बैठक में यह बिल क्लियर हो जाएगा। वहीं, कांग्रेस के वरिष्ठ विधायक प्रद्युम्न सिंह ने भी कहा कि अफसर-नेताओं को बचाने एवं प्रेस की आजादी पर दखल वाले बिल पर चर्चा नहीं हुई। वीसी के जरिए अपराधियों की पेशी संबंधी बिल को लेकर कोई विवाद पहले भी नहीं था।
विधानसभा में हंगामे के चलते दंड प्रक्रिया संहिता (राजस्थान संशोधन) विधेयक-2017 को प्रवर समिति को सौंप दिया गया था। इस बिल को लेकर मुख्य विपक्षी पार्टी कांग्रेस ही नहीं बल्कि, अन्य विपक्षीय पार्टियों को भी कोई एतराज नहीं था। विधानसभा सचिवालय में गृह मंत्री कटारिया की अध्यक्षता में गठित प्रवर समिति की दूसरी बैठक में विधायक सुरेंद्र पारीक, प्रहलाद गुंजल, जोगाराम पटेल, डा. मंजू बाघमार, कांग्रेस से प्रद्युम्न सिंह, निर्दलीय मानिक चंद सुराणा और राजपा के डा. किरोड़ीलाल मीणा शामिल हुए। अगली बैठक 11 जनवरी को निर्धारित की गई है।
अगली बैठक में बन सकती है बात
सदस्यों को प्रावधानों को लेकर कोई आपत्ति नहीं थी। विस्तार से चर्चा हुई। एक तरह से सभी ने सहमति दिखाई। लेकिन, अंतिम निर्णय के लिए एक और बैठक होगी।
-गुलाब चंद कटारिया, गृह मंत्री एवं प्रवर समिति के अध्यक्ष।
वीसी से पेशी संशोधन बिल पर खास आपत्ति नहीं
जेल में बंद अपराधियों की वीसी से कोर्ट में पेशी से संबंधी बिल में कोई आपत्ति नहीं थी। सदस्यों को कुछ शब्दों पर आपत्ति थी। इसका समाधान संभवत: अगली बैठक में हो जाएगा।
-प्रद्युम्न सिंह, वरिष्ठ कांग्रेस विधायक एवं समिति सदस्य।