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ट्रेनों में नहीं मिल रहा कंफर्म टिकट, 23 स्पेशल ट्रेनें, 16 हजार अतिरिक्त कोच लगाने से भी राहत नहीं

गर्मियों की छुट्टियां खत्म होने को हैं, अलग-अलग शहरों से लोग अपने व्यापार, नौकरी के लिए से जयपुर वापसी कर रहे हैं।

Shivang Chaturvedi | Last Modified - Jun 14, 2018, 06:02 PM IST

  • ट्रेनों में नहीं मिल रहा कंफर्म टिकट, 23 स्पेशल ट्रेनें, 16 हजार अतिरिक्त कोच लगाने से भी राहत नहीं

    - जयपुर से यूपी, असम, बिहार जाने वाली ट्रेनों में अभी भी कन्फर्म टिकट मिलना नामुमकिन, सभी ट्रेनों में वेटिंग लिस्ट 150 के पार

    जयपुर। गर्मियों की छुट्टियां खत्म होने को हैं, अलग-अलग शहरों से लोग अपने व्यापार, नौकरी के लिए से जयपुर वापसी कर रहे हैं। यहां से यूपी, बिहार, असम की ओर जाने वाली ट्रेनों में अभी भी कन्फर्म टिकट मिलना नामुमकिन है। इलाहाबाद, वाराणसी, गोरखपुर, पटना, सीवान, गुवाहाटी, भागलपुर सहित अन्य शहरों की ओर जाने वाली ट्रेनों में अभी भी वेटिंग 150 से भी अधिक है। कुछ ट्रेनों में तो वेटिंग भी उपलब्ध नहीं है। यानी इनमें टिकट बुक कराने पर रिगरेट आता है। जयपुर से वीकली और डेली चलने वाली ट्रेनों में पूरे जून तक लंबी वेटिंग है।

    ये है ट्रेनों में वेटिंग की स्थिति

    - जयपुर-गुवाहाटी एक्सप्रेस में रिगरेट, जयपुर-कामाख्या कविगुरु एक्सप्रेस में 371 वेटिंग, जयपुर-मैसूर एक्सप्रेस में 153 वेटिंग, जयपुर-कोयम्बटूर सुपरफास्ट एक्सप्रेस में 129 वेटिंग, अजमेर-किशनगंज गरीब नवाज एक्सप्रेस में रिगरेट, जोधपुर-हावडा एक्सप्रेस में रिगरेट, अजमेर-सियालदाह एक्सप्रेस में 263 वेटिंग, अजमेर-जम्मूतवी पूजा सुपरफास्ट में रिगरेट, उदयपुर-हरिद्वार मेल एक्सप्रेस में 196 वेटिंग, अहमदाबाद-हरिद्वारा योगा एक्सप्रेस में 100 जाने में और 230 आने में वेटिंग, जोधपुर-वाराणसी मरुधर एक्सप्रेस में 178 वेटिंग है। यही हाल विशेष ट्रेनों का भी है।

    23 स्पेशल ट्रेनें चलाईं, 16 हजार अतिरिक्त कोच लगाए, फिर भी नहीं मिली राहत

    - रेलवे ने इस समस्या से निपटने के लिए 23 जोड़ी स्पेशल ट्रेनें शुरू की हैं। साल 2017-18 में उत्तर पश्चिम रेलवे ने ट्रेनों में 16982 अतिरिक्त कोच लगाए। साथ ही 155 स्पेशल ट्रेनें भी चलाईं, इन ट्रेनों ने 8615 ट्रिप किए। साथ ही पिछले चार सालों में 86 ट्रेनों और 165 डिब्बों को रेगुलर यानी नियमित भी किया। इसके बावजूद रेलवे की यह व्यवस्था इन दिनों पीक सीजन में असफल साबित होती दिखाई दे रही है। ऐसा इसलिए क्योंकि जिन रूट्स पर सबसे ज्यादा वेटिंग है वहां कोई भी स्पेशल ट्रेन नहीं चलाई जा रहीं है। वहीं जो ट्रेनें नियमित चल रहीं हैं, उनके फेरों में बढ़ोतरी नहीं की जा रही है।


    एडवांस रिजर्वेशन ने भी बढ़़ाई मुश्किल

    - रेलवे के एडवांस रिजर्वेशन पहले 60 दिन यानी दो महीने पहले तक होते थे, लेकिन पिछले कुछ समय से रेलवे ने इसमें संशोधन करते हुए इस अवधि को 120 दिन कर दिया। जिससे भी मुसाफिरों की मुश्किल बढ गई है।


    तत्काल टिकट के लिए बढ़ी मारामारी

    - जयपुर से गुजरने वाली ट्रेनों में नो रूम यानी रिगरेट होने के कारण यात्रियों को रिजर्वेशन टिकट नहीं मिल रहे हैं। इसलिए तत्काल में कंफर्म टिकट की उम्मीद के चलते रिजर्वेशन काउंटर्स पर मारामारी की बढ़ गई है। कई बार तो स्टेशन पर मामूली कहासुनी मारपीट में बदल जाती है, लेकिन इन सब के बावजूद अधिकांश मुसाफिरों को बिना टिकट ही लौटना पड़ता है।

    भास्कर ओपिनियन : ऐसा करने से मिलेगी राहत
    - गुवाहाटी यानी असम के लिए नियमित ट्रेन चलाई जाए। इससे आसाम के साथ बिहार जाने वाले मुसाफिरों को भी राहत मिलेगी। साथ ही ट्रेन में वेटिंग की स्थिति में भी सुधार होगा।
    - हावड़ा, चेन्नई और पुरी के लिए नियमित ट्रेन का संचालन किया जाए। नहीं तो इन शहरों के लिए स्पेशल ट्रेनें चलाई जाएं।
    - मुंबई के लिए एक तरफ जहां दुरंतो को अस्थाई रूप से नियमित किया जाए क्योंकि इस ट्रेन में फ्लैक्सी किराया प्रणाली है जिससे रेलवे को अतिरिक्त आय होगी।
    - वहीं रविवार के दिन अरावली एक्सप्रेस और बॉम्बे सुपरफास्ट के अतिरिक्त एक नई ट्रेन चलाई जाए। इससे एक तरफ जहां मुसाफिरों को सीट उपलब्ध हो पाएगी। वहीं दूसरी ओर एक नई ट्रेन होने से दोनों ट्रेनों में यात्रीभार कम हो जाएगा।

    - गौरतलब है कि मुंबई के लिए रविवार को यात्रीभार सबसे अधिक होता है, लेकिन सामान्य दिनों की तुलना में ट्रेनें सबसे कम होती हैं।
    - अहमदाबाद-हरिद्वार वाया जयपुर ट्रेन को रेगुलर किया जाए। जिससे उदयपुर-हरिद्वार ट्रेन में पैसेंजर ट्रेफिक कम होगा।
    - जयपुर-इंदौर और जयपुर-पुणे ट्रेन के रैक में बढ़ोतरी की जाए। इससे दोनों ट्रेनों के फेरों में बढ़ोतरी हो जाएगी। जिससे मुसाफिरों को राहत मिलेगी।
    - रेलवे अगर फ्लैक्सी फेयर प्रणाली में बदलाव कर इसमें होने वाली बढ़ोतरी को बेस फेयर का 30 प्रतिशत कर दे। यानी अगर बेस फेयर 100 रुपए है तो यह बढ़ोतरी 30 रुपए की होगी। इससे मुसाफिर की जेब पर अधिक भार भी नहीं पड़ेगा और रेलवे को अतिरिक्त राजस्व भी मिलेगा तो वहीं रेलवे की यह प्रणाली भी सफल एवं लोकप्रिय बन जाएगी।



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Web Title: No Confirm Ticket In Trains In The Peak Season
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)

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