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उत्तर पश्चिम रेलवे ने सुधारी अपने 18 रनिंग रूम की स्थिति, एसी सहित अन्य सुविधाओं से किया लैस

ट्रेन चलाने वाले लोको पायलट (ड्राइवर) अब रनिंग रूम में एसी की हवा में सोएंगे।

Shivang Chaturvedi | Last Modified - Jun 12, 2018, 04:40 PM IST

उत्तर पश्चिम रेलवे ने सुधारी अपने 18 रनिंग रूम की स्थिति, एसी सहित अन्य सुविधाओं से किया लैस

जयपुर. ट्रेनों के सफर को और भी अधिक सुरक्षित बनाने के लिए अब उत्तर पश्चिम रेलवे ने रेलवे बोर्ड के निर्देशों पर अपने उन कर्मचारियों को सहुलियत दी है। जिनके हाथों में ट्रेनों के सुरक्षित संचालन से लेकर उसके पटरी से निकलने तक के सिस्टम की जिम्मेदारी होती है। ट्रेन चलाने वाले लोको पायलट (ड्राइवर) अब रनिंग रूम में एसी की हवा में सोएंगे।

- उपरे के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि रेलवे बोर्ड ने पिछले दिनों सभी महाप्रबंधकों को निर्देशित किया था कि अगले दो साल में रेलवे के देशभर में बने हुए सभी रनिंग रूम एसी युक्त हो जाने चाहिए। जिसकी पालना करते हुए उप रेलवे ने अपने सभी 18 रनिंग रुम को एसी सहित अन्य सुविधाओं से लैस कर दिया है।
- अभी देशभर में रेलवे के आधे से ज्यादा रनिंग रूम में कूलर तक के इंतजाम बेहतर नहीं हैं। स्थानीय रेलवे ने अपने अजमेर मंडल के आबूरोड, मारवाड़ जं, अजमेर और उदयपुर, बीकानेर मंडल के बीकानेर, सूरतगढ़, श्रीगंगानगर, हिसार, भिवानी और चूरू, जयपुर मंडल के जयपुर, फुलेरा और रेवाड़ी एवं जोधुपर मंडल के जोधपुर, समदड़ी, मेड़ता रोड, बाड़मेर और जैसलमेर स्थित रनिंग रूम को वातानुकूलित (एसी) किया है।

हाई पावर कमेटी ने दिया था सुझाव

- ट्रेन को एक से दूसरे स्टेशन ले जाने वाले लोको पायलट 8 से 12 घंटे तक पटरी सिग्नल पर नजर रखने के बाद जब ड्यूटी से ऑफ होते हैं तो उन्हें अपने घर से दूर होने पर रनिंग रूम में ठहराया जाता है। यहां किसी धर्मशाला की तरह इंतजाम होते हैं।

- खाने के लिए मशक्कत करनी पड़ती है तो हार्ड ड्यूटी के बाद आराम के लिए कहीं पंखे तो कहीं कूलर के नीचे सोना पड़ता है। कुछ घंटों के विश्राम के बाद उन्हें फिर से ट्रेन संचालन के लिए उठा दिया जाता है। ऐसे में लोको पायलटों को बेहतर सुविधा देने के लिए हाई पावर कमेटी ने एक सुझाव रनिंग रूम में एसी लगाने का दिया था।

रेलवे बोर्ड चेयरमैन अश्विनी लोहानी ने सभी जोन के महाप्रबंधक से आदेश जारी कर एक्शन प्लान मांगते हुए कहा है कि इसे लागू किया जाए ताकि लोको पायलट अच्छी नींद लेकर आगे की ट्रेन चला सकें।

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