जयपुर

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अब सोफिया स्कूल के पेरेंट्स ने किया फीस वृद्धि के खिलाफ प्रदर्शन

निजी स्कूलों के खिलाफ विरोध प्रदर्शनों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है।

Dainik Bhaskar

May 02, 2018, 05:57 PM IST
शिक्षा संकुल। शिक्षा संकुल।


जयपुर। निजी स्कूलों के खिलाफ विरोध प्रदर्शनों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। सोफिया स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों के पेरेंट्स ने बुधवार को शिक्षा संकुल में फीस बढ़ोतरी के खिलाफ प्रदर्शन किया। इससे पहले विद्याश्रम स्कूल के खिलाफ पेरेंट्स कई बार प्रदर्शन कर चुके हैं। स्कूल ने फीस वृद्धि पर रोक के सरकार के आदेश को मानने से इनकार कर दिया है।


- करीब 100 पेरेंट्स शिक्षा संकुल पहुंचे और सोफिया स्कूल के खिलाफ नारेबाजी करने लगे।
- पेरेंट्स ने आरोप लगाया कि स्कूल ने 35 प्रतिशत तक फीस बढ़ा दी है। यह गलत है क्योंकि इससे हमारा बजट गड़बड़ा गया है। साथ ही स्कूल में सुविधाएं भी उस हिसाब से नहीं हैं। फिर फीस क्यों बढ़ाई गई है।

- पेरेंट्स ने करीब एक घंटे तक वहां प्रदर्शन किया।
- उल्लेखनीय है कि इससे पहले विद्याश्रम स्कूल के खिलाफ भी पेरेंट्स प्रदर्शन कर चुके हैं। पेरेंट्स का आरोप है कि स्कूल में पढ़ाई का स्तर अच्छा नहीं है। साथ ही सुविधाएं भी नहीं है फिर फीस किस हिसाब से बढ़ाई गई है।

हाईकोर्ट ने लगाई रोक
- वहीं राजस्थान हाइकोर्ट ने फीस बढ़ोतरी मामले में राज्य सरकार को भारतीय विद्या भवन के दोनों विद्याश्रम स्कूलों के खिलाफ सख्त (दंडात्मक) कार्रवाई नहीं करने के निर्देश दिए हैं। अदालत ने मामले में प्रमुख स्कूल शिक्षा सचिव, निदेशक प्रारंभिक शिक्षा व जिला शिक्षा अधिकारी सहित अन्य को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।

- न्यायाधीश एम.एन.भंडारी व डीसी सोमानी की खंडपीठ ने यह अंतरिम निर्देश भारतीय विद्या भवन विद्याश्रम स्कूल की याचिका पर मंगलवार को दिया।

- अदालती आदेश के पालन में स्कूल प्रशासन की ओर से अधिवक्ता प्रतीक कासलीवाल ने अदालत में कहा कि सातवें वेतनमान का दबाव आने के कारण स्कूल फीस में 20 प्रतिशत की बढ़ोतरी की गई है।

- स्कूल प्रबंधन समिति राज्य सरकार से कोई अनुदान नहीं लेती है और उस पर फीस नियामक आयोग लागू नहीं होता। इसलिए उनकी फीस को नियंत्रित नहीं किया जा सकता। सुप्रीम कोर्ट ने भी कह रखा है कि जो सरकार से अनुदान नहीं लेते हैं वे संसाधन मुहैया कराते हैं तो फीस ले सकते हैं।

- याचिका में स्कूल प्रबंधन समिति ने जिला शिक्षा अधिकारी के 20 अप्रैल के उस आदेश को चुनौती दी है जिसमें दोनों विद्याश्रम स्कूलों में शैक्षणिक सत्र 2018-19 में बढ़ाई गई फीस पर रोक लगा दी थी। इस मामले में फीस एक्ट-2016 के प्रावधानों का उल्लंघन किया गया है।

- फीस एक्ट को चुनौती देते हुए कहा कि फीस कमेटी डिवीजनल कमिश्नर की अध्यक्षता में बनती है और इसके सदस्य भी सरकारी अफसर ही होते हैं। इसके अलावा स्कूल का जो नोमिनी होता है वह भी राज्य सरकार ही तय करती है। ऐसे में डीईओ को स्कूल फीस तय करने का अधिकार नहीं है। ऐसे में डीईओ को स्कूल की बढ़ाई गई फीस बढ़ोतरी पर रोक लगाने का अधिकार नहीं है।


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