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अगर सास तय कर लें कि घर में बेटी ही चाहिए तो किसी में विरोध की ताकत नहीं: नरेंद्र मोदी

झुंझनू में 2011 तक 1000 बेटों पर 837 बेटियां थीं। अब 1000 बेटों पर 955 बेटियां हैं।

DainikBhaskar.com | Last Modified - Mar 08, 2018, 10:30 PM IST

  • अगर सास तय कर लें कि घर में बेटी ही चाहिए तो किसी में विरोध की ताकत नहीं: नरेंद्र मोदी
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    नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को राष्ट्रीय पोषण मिशन की शुरुआत की।

    झुंझुनूं/सीकर.महिला दिवस के मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी राजस्थान के झुंझुनूं पहुंचे। यहां उन्होंने राष्ट्रीय पोषण मिशन की शुरुआत की। इस मौके पर उन्होंने झुंझुनूं जिले में लिंंगानुपात बेहतर होने पर तारीफ की। मोदी ने कहा- ''ये वीरो की भूमि है। इस जिले ने साबित कर दिया है कि युद्ध हो या अकाल हो, झुंझुनूं झुकना नहीं, लड़ना जानता है। जिस तरह बेटी बचाओ अभियान को आगे बढ़ाया जा रहा है, इससे देश को प्रेरणा मिलेगी। अगर सास तय कर लें कि घर में बेटी चाहिए तो किसी की ताकत नहीं है कि वो इसका विरोध करे।'' इसके साथ ही मोदी ने बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ अभियान को विस्तार दिया। इस मौके पर मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे सिंधिया और केंद्रीय मंत्री मेनका गांधी मौजूद रहीं।

    नरेंद्र मोदी के स्पीच की 5 अहम बातें

    1) झुंझुनूं ने मुझे यहां आने के लिए मजबूर कर दिया

    - नरेंद्र मोदी ने कहा, ''आज 8 मार्च को दुनिया अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस मनाती है। इसे 100 साल हो गए हैं, लेकिन आज पूरा झुंझुनूं इससे जुड़ गया है। मैं ऐसे ही यहां नहीं आया हूं, कुछ सोच विचार करके आया हूं। आपने मुझे यहां आने के लिए मजबूर कर दिया है। जिस तरीके से झुंझुनूं ने बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान को आगे बढ़ाया, उससे मेरा मन कर गया कि यहां की मिट्टी को माथे पर लगाऊं।''

    2) झुंझुनूं झुकना नहीं, लड़ना जानता

    - नरेंद्र मोदी ने कहा, ''ये वीरो की भूमि है। इस जिले ने साबित कर दिया है कि युद्ध हो या अकाल हो, झुंझुनूं झुकना नहीं, लड़ना जानता है। जिस तरह बेटी बचाओ अभियान को आगे बढ़ाया जा रहा है, इससे देश को प्रेरणा मिलेगी। अगर सफलता मिलती है तो मन को संतोष होता है, लेकिन कई बार मन को दुख होता है कि जिस देश की महान परंपराएं, वेद से विवेकानंद तक सही दिशा में प्रबोधन। लेकिन क्या कारण है कि हमें अपने ही बेटी को बचाने में धन खर्च करना पड़ रहा है। बजट तय करना पड़ रहा है। इससे बड़ी कोई पीड़ा नहीं हो सकती है।''

    3) अब तय कर लें बेटा और बेटियां बराबर पढ़ेंगी

    - नरेंद्र मोदी ने कहा- ''सामाजिक बुराइयों के चलते हमने अपनी ही बेटियों की बलि चढ़ाना तय कर लिया। कई दशकों तक बेटियों को नकारते रहे, आज 4 से 5 पीढ़ियां जमा हुई हैं। कई सालों में जो घाटा हुआ, उसे पूरा करने में समय तो लगेगा, लेकिन तय कर लें कि बेटा और बेटियां बराबर पढ़ेंगी। जितने बेटे पैदा होंगे, उतनी ही बेटियां पैदा हों।''
    - ''आज जिन जिलों को सम्मान दिया गया। वो बेटों के जैसे ही बेटियां को आगे बढ़ाने के लिए आगे आए हैं। इसे एक जन आंदोलन बनाना होगा। अगर सास ये तय कर लें कि घर में बेटी चाहिए तो किसी की ताकत नहीं है कि वो बेटियों का विरोध करे।''

    4) अच्छा लगता है कि बेटियां स्पेस टेक्नोलॉजी में कामयाबी हासिल करती हैं
    - मोदी ने कहा- ''हमने हरियाणा, जहां बेटियां की संख्या काफी कम थी, वहीं से अभियान शुरू किया। कुछ लोगों ने कहा कि यहां से काम की शुरुआत करने पर विरोध होगा। लेकिन मैंने यहीं से अभियान शुरू करने का फैसला लिया।''
    - ''आज बेटी बोझ नहीं, वो तो पूरे परिवार की आन-बान-शान है। बेटियां स्पेस टेक्नोलॉजी में कामयाबी हासिल कर रही हैं। ओलिम्पिक में जब बेटियां गोल्ड मेडल लेकर आती हैं तो लोगों को इस पर गर्व होता है।''

    5) हम बच्चों को अच्छी आदतें सिखाएं
    - नरेंद्र मोदी ने कहा- ''जन्म के बाद अगर बच्चों को मां का दूध पीने मिले तो आगे उसकी कई बीमारियां दूर हो जाती हैं। अगर हम मां की रखवाली करेंगे तो उसके दूध से बच्चों में कुपोषण दूर हो जाएगा।''
    - ''एक अनुमान है कि बगैर हाथ धोए खाना खाने पर 30 से 40 फीसदी बीमारियां शरीर में आती हैं। अब ये बात बच्चों के साथ मां को भी समझाना होगा। स्कूली बच्चों में एक उम्र के बाद दूसरों के शारीरिक विकास स्पर्धा होती है कि मेरी भी ऊंचाई उसकी तरह होनी चाहिए।''

    झुंझुनूं में ये कार्यक्रम क्यों?
    - 2011 की जनगणना में राजस्थान के 33 जिलों में झुंझुनूं में सबसे खराब लिंगानुपात था। यहां 1000 लड़कों पर 837 लड़कियां थीं, वहीं अब यह संख्या सुधरकर 955 हो गई है।

    - 36 माह की कोशिशों से अब यह जिला देश में बेटियों के घर के रूप में पहचान बनाने में कामयाब हुआ है। इस सुधार के लिए झुंझुनूं को महिला एवं बाल विकास मंत्रालय कई बार सम्मानित भी कर चुका है।

    ऐसे बेहतर होता गया झुंझुनूं में लिंगानुपात

    - साल 1000 लड़कों पर लड़कियां

    2011 - 837
    2014 - 892
    2015 - 910
    2016 - 933
    2017 - 955

    वो पांच बातें जो बनी पीएम के झुंझुनूं आने की वजह

    1. महिला शिक्षा में झुंझुनूं देश के चुनिंदा जिलों में शुमार है। यहां 74 फीसदी महिलाएं साक्षर हैं।
    2. सैन्य बहुल जिला होने के कारण झुंझुनूं में सबसे ज्यादा वीरांगनाएं हैं जो पति के देश सेवा में जाने के बाद घर परिवार और समाज

    की जिम्मेदारियों को बखूबी उठा रही हैं। बच्चों को पढ़ा कर सेना में भेजने की हिम्मत दिखाई।
    3. झुंझुनूं जिले की महिलाएं नर्सिंग और मेडिकल फील्ड में सबसे ज्यादा हैं। प्रदेश में जिले की महिलाएं चिकित्सा सेवा में परचम लहरा

    रही हैं।
    4. कोख में बेटियों का कत्ल रोकने की मुहिम में झुंझुनूं की बेटियां आगे आई हैं। अब तक हुए 106 डिकॉय ऑपरेशन में 16 में जिले की महिलाओं ने कोख में बेटी मारने वालों को पकड़वाने में अपनी भूमिका निभाई।
    5. झुंझुनूं को दो बार नारी सशक्तिकरण पुरस्कार मिले हैं। 21 दिसंबर 2014 को 2.35 लाख लोगों ने यहां पर बेटी बचाने की शपथ ली

    थी।

    सोनीपत में तो बेटियां बेटों से आगे

    - हरियाणा का सोनीपत लिंगानुपात में सबसे आगे है। 2014 में 1 हजार लड़कों पर लड़कियों की संख्या 830 थी। वहीं, जनवरी 2018 में पहली बार यह संख्या 1005 पहुंच गई।

  • अगर सास तय कर लें कि घर में बेटी ही चाहिए तो किसी में विरोध की ताकत नहीं: नरेंद्र मोदी
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    महिला दिवस के मौके पर नरेंद्र मोदी गुरुवार को झुंझुनूं पहुंचे।
  • अगर सास तय कर लें कि घर में बेटी ही चाहिए तो किसी में विरोध की ताकत नहीं: नरेंद्र मोदी
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    महिला शिक्षा में झुंझुनूं देश के चुनिंदा जिलों में शुमार है। यहां 74 फीसदी महिलाएं साक्षर हैं।
  • अगर सास तय कर लें कि घर में बेटी ही चाहिए तो किसी में विरोध की ताकत नहीं: नरेंद्र मोदी
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    नरेंद्र मोदी ने अपने भाषण में कहा कि बेटियों को बचाने के मामले में देश झुंझुनूं से प्रेरणा ले सकता है।
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