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प्रदर्शन करेंगे प्रेरकों का विधानसभा पर प्रदर्शन

प्रदर्शन करेंगे प्रेरकों का विधानसभा पर प्रदर्शन

Dainik Bhaskar

Dec 26, 2017, 02:49 PM IST
प्रेरकों ने विधानसभा पर धरना द प्रेरकों ने विधानसभा पर धरना द


जयपुर। राजस्थान प्रेरक संघ के कार्यकर्ताओं ने मंगलवार को विधानसभा पर धरना दिया। संघ के सदस्य 22 गोदाम से रैली के रूप में विधानसभा टी पोइन्ट पहुंचे और धरना दिया। प्रेरकों का कहना है कि अल्प मानदेय पर कार्य करने के कारण उनकी आर्थिक स्थिति बिगड़ती जा रही है।पिछले कई सालों से कहते रहने पर भी इसमें कोई सुधार नहीं किया गया है। जानिए और इस बारे में ...

- प्रेरकों ने 14 वर्षों से लम्बित मांगों को लेकर 22 गोदाम से आक्रोश रैली निकाली। बड़ी संख्या में प्रेरक 22 गोदाम पर एकत्र हुए। वहां से ये रैली के रूम में विधानसभा टी पोइंट पहुंचे और वहां धरना दिया।

17 हजार प्रेकर अल्पवेतन में काम कर रहे

- प्रेरक संघ के संरक्षक मदनलाल वर्मा ने बताया कि प्रदेश में प्रत्येक पंचायत (कोटा को छोड़ कर) पर 17 हजार प्रेरक पिछले 14 वर्षों से अल्प मानदेय पर काम कर हे हैं। इस दौरान प्रेरक संघ ने रैलियां निकालीं तथा धरना-प्रदर्शन कर सरकार को अपनी मांगों से अवगत कराया परन्तु सरकार ने इस ओर कोई ध्यान नहीं दिया।

- मौजूदा सरकार ने भी अपने सुराज संकल्प के घोषणा पत्र में प्रेरकों को नियमित करने का वादा किया था परन्तु सरकार के चार वर्ष पूर्व होने तक इस पर एक बार भी विचार नहीं किया गया।

- पिछले माह मंत्रिमंडलीय उप समिति में प्रेरकों का मुद्दा शामिल कर संघ के पदाधिकारियों को आमंत्रित किया गया था परन्तु कोई निर्णय नहीं निकला।

कभी 6 माह तो कभी 3 माह बढ़ता हे अनुबंध
- बरसों से कार्यरत साक्षरता प्रेरकों का अनुबंध पहले तो एक वर्ष के लिए बढ़ता था, लेकिन अब यह कभी छह तो कभी तीन माह ही बढ़ता है। पंचायत प्रेरक साक्षरता के अतिरिक्त कार्य करते हैं। इससे काम तो प्रभावित होता ही है, बार-बार अनुबंध भरवाने से कई प्रेरक भाई-भतीजावाद का शिकार हुए व उन्हें अपनी नौकरी छोड़ घर बैठना पड़ा। कई प्रेरक इस प्रक्रिया से परेशान हैं।

बिना किसी लिखित आदेश के करवाते हे पंचायतों के कार्य
- प्रेरक संघ का कहना है कि प्रेरकों को साक्षरता के अतिरिक्त कई कार्य बिना किसी लिखित आदेश व बिना किसी अतिरिक्त मानदेय के करवा कर शोषण किया जाता है। लिखित आदेश की मांग करने पर मानदेय नहीं देने वाले अनुबंध खत्म करने कि धमकी दी जाती है।

पिछले 20 माह से नहींं मिल रहा मानदेय
- साक्षरता में निरक्षरता का कलंक मिटाने वाले अधिकतर प्रेरकों को एक से दो वर्ष का मानदेय नहीं मिल पा रहा है। अल्प मानदेय पर कार्य कर रहे प्रेरकों कि आर्थिक स्थिति बिगड़ती जा रही है। इस संबंध में जिला साक्षरता अधिकारी से लेकर निदेशालय तक को अवगत कराया गया परन्तु टालम-टोल जवाब ही प्राप्त हुआ है।


प्रेरकों पर फिर गहरा सकता है रोज़ी रोटी का संकट
- संघ के संरक्षक मदनलाल वर्मा के अनुसार प्रेरकों का अनुबंध 31 दिसंबर तक बढ़ाया गया था पर अब साक्षरता निदेशालय द्वारा अनुबंध आगे बढ़ाने की कोई गाइड लाइन जारी नहीं की गई है अगर इसको आगे नहीं बढ़ाया गया तो प्रदेश के 17 हजार प्रेरक बेरोजगार हो जाएंगे।

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फोटो व कंटेंट : विनोद मित्तल

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