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पदमावत को लेकर राजस्थान में फिर शुरू होगा प्रदर्शन, राजनाथ सिंह से मिलेंगे लोग

17 जनवरी से सर्व समाज एक बार फिर अपना विरोध प्रदर्शन शुरू करेगा।

DainikBhaskar.com | Last Modified - Jan 13, 2018, 05:19 PM IST

पदमावत को लेकर राजस्थान में फिर शुरू होगा प्रदर्शन, राजनाथ सिंह से मिलेंगे लोग

जयपुर. फिल्म पद्मावत पर विवाद एक बार फिर बढ़ता नजर आ रहा है। 17 जनवरी से सर्व समाज एक बार फिर अपना विरोध प्रदर्शन शुरू करेगा। जिससे पहले इन समाज के सदस्य गृहमंत्री राजनाथ सिंह से मिलकर अपनी बात रखेंगे। जानें पूरा मामला...

- बता दें कि पद्मावत की रिलीज के खिलाफ करणी सेना पहले ही अपना विरोध जता चुकी है। जिसके बाद फिल्म को राजस्थान में नहीं दिखाए जाने का फैसला लिया गया है।

- वहीं चित्तौगढ़ में रानी पद्मावती के जीवन पर एक सेमिनार किया जा रहा है। जिसमें कई इतिहासकार हिस्सा लेंगे।

फिल्म पद्मावती को लेकर क्या आपत्ति है?

- राजस्थान में करणी सेना, बीजेपी लीडर्स और हिंदूवादी संगठनों ने इतिहास से छेड़छाड़ का आरोप लगाया। राजपूत करणी सेना का मानना है कि ​इस फिल्म में पद्मिनी और खिलजी के बीच सीन फिल्माए जाने से उनकी भावनाओं को ठेस पहुंची। फिल्म में रानी पद्मावती को भी घूमर नृत्य करते दिखाया गया है। जबकि राजपूत राजघरानों में रानियां घूमर नहीं करती थीं।

- हालांकि, भंसाली साफ कर चुके हैं कि ड्रीम सीक्वेंस फिल्म में है ही नहीं।

कौन थीं रानी पद्मावती?

पद्मावती चित्तौड़ की महारानी थीं। उन्हें पद्मिनी भी कहा जाता है। वे राजा रतन सिंह की पत्नी थीं। उन्होंने जौहर किया था। उनकी कहानी पर ही संजय लीला भंसाली ने फिल्म बनाई है।

क्या हकीकत में थीं रानी पद्मावती?

वे कोरी कल्पना नहीं थीं। रानी पद्मावती ने 1303 में जौहर किया। मलिक मुहम्मद जायसी ने 1540 में ‘पद्मावत’ लिखी। छिताई चरित, कवि बैन की कथा और गोरा-बादल कविता में भी पद्मावती का जिक्र था।

क्या जायसी ने हकीकत के साथ कल्पना जोड़ी?

इसी पर डिबेट है। कई इतिहासकार कुछ हिस्सों को कल्पना मानते हैं। जायसी ने लिखा किके पद्मावती सुंदर थीं। खिलजी ने उन्हें देखना चाहा। चित्तौड़ पर हमले की धमकी दी। रानी मिलने के लिए राजी नहीं थीं। उन्होंने जौहर कर लिया।

खिलजी हीरो नहीं था

चित्तौड़गढ़ के जौहर स्मृति संस्थान का कहना है- फिल्म में हमलावर अलाउद्दीन खिलजी को नायक बताया है। जबकि राजा रतन सिंह की अहमियत खत्म कर दी है। यही इतिहास से छेड़छाड़ है।

घूमर नृत्य नहीं, सम्मान

फिल्म के एक गाने में घूमर नृत्य दिखाया है। राजपूतों के मुताबिक, घूमर अदब का प्रतीक है। रानी सभी के सामने घूमर कर ही नहीं सकतीं।

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Web Title: pdmaavt ko lekar raajsthaan mein fir shuru hoga prdrshn, raajnaath sinh se milengae loga
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)

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