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रेलवे में पिता की जगह आश्रित को नहीं मिलेगी नौकरी, जानिए क्या है वजह

Shivang Chaturvedi | Last Modified - Dec 30, 2017, 03:36 PM IST

रेलवे में अब पिता के स्थान पर आश्रित नौकरी नहीं पा सकेगा।
  • रेलवे में पिता की जगह आश्रित को नहीं मिलेगी नौकरी, जानिए क्या है वजह

    जयपुर। रेलवे में अब पिता के स्थान पर परिवार का कोई और सदस्य नौकरी नहीं पा सकेगा।इंडियन रेलवेज में लिबरलाइज्ड एक्टिव रिटायरमेंट स्कीम फॉर गारंटेड एम्प्लॉयमेंट फॉर सेफ्टी स्टाफ (लार्जेस) को अब रेल मंत्रालय ने बंद कर दिया है। इससे इंडियन रेलवे के सभी 17 जोन से जुड़े मंडलों में पिता के स्थान पर बेटे को नौकरी नहीं मिल सकेगी। इस बारे में रेलवे बोर्ड ने 29 नवंबर को आदेश जारी किए हैं। जानिए और इस बारे में .....

    - इसके तहत उत्तर पश्चिम रेलवे के जयपुर, जोधपुर, अजमेर, व बीकानेर मंडल में भी ये योजना बंद हो चुकी है। इंडियन रेलवे में 2004 में सेफ्टी से जुड़ी दो कैटेगरी ट्रेन ड्राइवर (लोको पायलट) व ट्रैकमैन पद पर जिनकी नौकरी 20 वर्ष की हो चुकी हो उनके बेटों को नौकरी देने की घोषणा की गई थी। इसके तहत भर्ती शुरू हो चुकी थी।

    आठवीं और 10वीं पास आश्रित को नौकरी

    - रेल कर्मचारी संगठनों की मांग पर सेफ्टी से जुड़े अन्य 26 कैटेगरी के कर्मचारियों के आश्रितों को भी पिता के स्थान पर नौकरी देने के लिए लार्जेस स्कीम की घोषणा साल 2010 में कर दी गई। इस योजना के तहत पहले रेलकर्मी के 8वीं पास बाद में 10वीं पास आश्रित को नौकरी दी जाने लगी। धीरे-धीरे यह योजना सभी जोन में बंद कर दी गई है। रेल मंत्रालय के इस फैसले से रेलकर्मियों में रोष है। लॉर्जेस स्कीम में यह शर्त थी कि कर्मचारी की उम्र 50 से 57 वर्ष हो और नौकरी के 20 वर्ष पूरे हो चुके हों।

    ये था योजना का उद्देश्य

    - रेलवे में पूर्व में ग्रुप डी कोटे में कर्मचारी बिना पढ़े-लिखे, कम पढ़े-लिखे भी नौकरी पर लग जाते थे, लेकिन गैंगमैन, ट्रैकमैन व खलासी के पद पर बिना आधुनिक उपकरणों के कठिन परिश्रम करना पड़ता था। इससे कर्मचारी उम्र कम होने के बावजूद थका-थका सा महसूस करता था। उनकी कार्यक्षमता घट जाती थी।

    विपरीत हुआ असर

    - रिक्त पदों पर कम कैपेबल कर्मचारियों के काम करने के चलते रेलवे में दुर्घटनाएं होने लगी थीं। ऐसे में रेलवे ने पिता के स्थान पर बेट को नौकरी देने का फैसला किया। इसके लिए योजना बनाकर शर्तें-नियम बनाए गए, जिससे रेलवे में युवा आए।

    रेल मंत्री ने दिया आश्वासन
    - ऑल इंडिया रेलवे मेंस फेडरेशन के महामंत्री शिवगोपाल मिश्रा ने 28 दिसंबर को दिल्ली में रेलमंत्री पीयूष गोयल से लार्जेस स्कीम को पुन: शुरू करने के बारे में बातचीत की है। रेलमंत्री ने कहा कि जिन जोन में कोर्ट केस नहीं चल रहे हैं, किसी तरह का कोर्ट स्टे नहीं हैं, वहां दुबारा इस योजना को लागू किए जाने का प्रयास किया जाएगा ताकि कर्मचारियों को राहत मिल सके। - मुकेश माथुर, महामंत्री, एनडब्ल्यूआरईयू

    योजना का फायदा :
    - अब तक इंडियन रेलवे में इस तरह लगे हुए कर्मचारियों की संख्या लगभग 35 हजार।
    - रेलवे के जयपुर, जोधपुर, अजमेर, और बीकानेर मंडल में भी लगभग 3000 को मिल चुकी है नौकरी।
    जयपुर मंडल में लगभग 500 युवा लग चुके हैं नौकरी पर।

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Web Title: Railway Stops LARGAS Scheme, Now Dependents Will Not Get Job
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)

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