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गले में लगी थी आतंकवादी की गोली, एक महीने पहले दोस्त से कही थी ये बात

फिदाइन आतंकियों को ढेर करने में रेंज क्यूटी टीम के जांबाज राजेंद्र नैण की महत्वपूर्ण भूमिका रही।

DainikBhaskar.com | Last Modified - Jan 02, 2018, 12:16 PM IST

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    राजस्थान के चूरू जिले के रतनगढ़ के रहने वाले थे राजेंद्र।

    चूरू. पुलवामा में सीआरपीएफ के कैंप में घुसे तीन फिदाइन आतंकियों को ढेर करने में रेंज क्यूटी टीम के जांबाज राजेंद्र नैण की महत्वपूर्ण भूमिका रही। सीआरपीएफ के अस्सिटेंट कमांडेंट रामकुमार जाट ने बताया कि जैश मोहम्मद के तीन आत्मघाती आतंकियों के कैंप में घुसने के बाद सीआरपीएफ की टीम ने अलग-अलग मोर्चा संभाल लिया। जानें पूरा मामला...

    - ये कार्डन ऑफ सर्च था, जिसमें अलग-अलग माेर्चो पर जवान तैनात थे। आगे का मोर्चा रेंज क्यूटी (क्विक एक्शन टीम) ने संभाला, जिसमें कैप्टन राजेंद्र भी थे।
    - वे टीम के साथ बिल्डिंग में घुसे तथा उनकी टीम ने दो फिदाइन आतंकियों को ढेर कर दिया। इस बीच तीसरे की तलाश में ज्योंही क्यूटी टीम आगे बढ़कर एक कमरे में घुसने लगी, इसी दौरान छुपे हुए तीसरे आतंकी ने ब्रस्ट फायरिंग (पूरी मैगजिन खाली करना) कर दी, जिसमें से एक गोली गौरीसर के जांबाज राजेंद्र के गले में लगे, जिससे वे गंभीर घायल हो गया।
    - बाद उनकी क्यूटी टीम ने तीसरे आतंकी को भी ढेर कर दिया, मगर गर्दन में गोली लगने से राजेंद्र शहीद हो गए। राजेंद्र 130 क्यूटी रेंज में तैनात थे।

    - अस्सिटेंट कमांडेंट का कहना है कि जिस कमरे में जांबाज राजेंद्र शहीद हुए, उसी में दो फिदाइन आतंकियों के शव बरामद हुए है। निश्चय ही दोनों को ढेर करने में उनकी भूमिका प्रमुख रही।

    दो साल की बेटी के थे पिता


    राजेंद्र जनवरी 2013 में केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल में भर्ती हुआ था। दो साल की बेटी के पिता राजेंद्र ने अपनी बीकॉम तक की शिक्षा पूरी की और वर्तमान में बॉर्डर पर तैनात था। उसके दोस्त जगदीश जांगिड़ रेवंतसिंह ने भास्कर को बताया कि नवंबर में जब वह 14 दिनों की छुट्‌टी पर गांव आए थे, तब कहा था कि हालात बहुत गंभीर है और नया वर्ष भी आने वाला है और दुश्मन देश अपनी हरकतों से बाज नहीं आएगा और अगर इस बार मौका मिला, तो आर-पार की लड़ाई लड़ूंगा। वे कहते थे कि देश के लिए मेरा शरीर काम आए, वह दिन मेरे लिए स्वर्णिम दिन होगा। जब वह नवंबर में छुट्‌टी के लिए गांव आए, तो गांव कांगड़ में भाजपा द्वारा आयोजित कब्ड्‌डी खेल में भी भाग लिया था।

    ये है रेंज क्यूआरटी टीम


    - डिप्टी कमांडेंट चौधरी ने बताया कि रेंज क्यूआरटी टीम में विभिन्न बटालियनों के चुने हुए कुछ जांबाज को ही शामिल किया जाता था, जो केवल बहादुर हो, बल्कि अचूक निशानेबाज त्वरित कार्रवाई का अंजाम देने में कुशल हो।
    - इसका गठन सीआरपीएफ की 16 बटालियन में कुछ जांबाज जवानों को शामिल कर किया गया। टीम में 8 से 10 जांबाज ही शामिल होते है, जिनमें राजेंद्र नैण भी था।
    - क्यूआरटी के जांबाज पलक झपकते ही ऑपरेशन को अंजाम देने कार्रवाई करने में माहिर होते है। वे बिना हथियार के ही दुश्मन पर भारी पड़ते है।

    36 घंटे चला था ऑपरेशन


    - श्रीनगर में सीआरपीएफ में तैनात डिप्टी कमांडेंट चेतन चौधरी ने बताया कि लेथपोरा में सीआरपीएफ की 185वीं बटालियन के शिविर पर हुआ था।
    - इस ऑपरेशन में 5 सीआरपीएफ जवान शहीद हुए है, मगर क्यूआरटी टीम से शहीद होने वाला राजेंद्र ही था। ऑपरेशन 36 घंटे चला। अभी भी तलाशी अभियान जारी है।
    - एहतियात के तौर आसपास के इलाकों में रेल इंटरनेट सेवा बंद है। गौरतलब है कि शनिवार की रात फिदाइन हमला करने वालों को घेरने का जिम्मा सीआरपीएफ की इसी टुकड़ी को मिला था। इसमें जांबाज राजेंद्र सबसे आगे थे। वे शहीद हो गए।

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    40 दिन पहले ही 14 दिन की छुट्टी पर घर आए थे।
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    गांव के लड़कों को सेना में जाने के लिए करते थे प्रेरित।
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    अचूक निशाने बाज थे राजेंद्र।
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    राजेंद्र 130 क्यूटी रेंज में तैनात थे।
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    जिस कमरे में जाबांज राजेंद्र शहीद हुआ, उसी में दो फिदाइन आतंकियों के शव बरामद हुए है।
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