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चार सौ साल पहले फारसी में भी पढ़ी गई रामायण- महाभारत

उस समय की लिखी फारसी के उक्त ग्रंथ आज भी शोध संस्थान में आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं।

एम. असलम | Last Modified - Apr 17, 2018, 11:02 AM IST

चार सौ साल पहले फारसी में भी पढ़ी गई रामायण- महाभारत

टोंक.विश्व विख्यात अरबी फारसी शोध संस्थान में रखे दुर्लभ ग्रंथों से ये साबित हो रहा है कि आज से करीब चार सौ साल पहले भगवत गीता, रामायण व महाभारत फारसी में भी पढ़ी गई। उस समय की लिखी फारसी के उक्त ग्रंथ आज भी शोध संस्थान में आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं। टोंक रियासत काल में भी कई लोगों ने संस्कृत आदि के धार्मिक ग्रंथों को उर्दू में लिखा। ऐसे ही एक शायर करीब 75 साल पहले थे, जगन्ननाथ शाद जिन्होंने करीब 19 पुस्तकें उर्दू में लिखी, जिसमें श्रीमद् भागवत गीता सहित कई धार्मिक पुस्तकों के अनुवाद भी किए गए।

अकबर के आदेश पर संस्कृत से फारसी में अनुवाद किया गया

- शोध संस्थान में मौजूद अध्याय रामायण का लिपिकाल 1841 संवत 1783 ईस्वी है। फारसी में लिखे अध्याय रामायण का गद्य रुप में अनुवाद कोठ फतेहगढ़ भोपाल ताल में नकल किया गया।
- महाभारत का फारसी अनुवाद का ग्रंथ के अनुवादक ताहिर मुहम्मद पुत्र इमामुद्दीन। इसका रचना काल 1556-1605 है। इसे अकबर के आदेश से संस्कृत से फारसी में अनुवाद किया गया।
- शोध संस्थान में रखी फारसी में लिखी भगवत गीता भी दुर्लभ ग्रंथों में से एक ग्रंथ है। जिसके अनुवादक मुंशी अमानत राय, लिपिकार शंकरनाथ ज्योतिषी है। जिसका लिपि काल 1891 विक्रमाजीत है। पवित्र इस ग्रंथ का पद्य रुप में अनुवाद किया गया है।

ये हिस्सा लिखा गया फारसी में

- रामायण शोध संस्थान के ये भी दुर्लभ ग्रंथों में शुमार किया जाता है। इसके लेखक वाल्मीकि है, लिपिकाल 1816 ईस्वी है। ये पद्य रुप में रामायण का एक भाग जिसमें श्री रामचंद्र जी के बाल्याकाल का वर्णन है। ये फारसी में लिखा हुआ है।
- राम चरित्र मानस शोध संस्थान में राम चरित्र मानस धर्म ग्रंथ मौजूद है, जो अपने आप में दुर्लभ है। इसका रचनाकाल 1885 संवत बताया गया है। तुलसीदास जी द्वारा रचित राम चरित्र मानस का अवधी भाषा में रुपांतरण है।
- नल दमन महाभारत के चरित्र नल व दमयंती पर आधारित मसनवी अकबर के आदेश से फारसी में अनुवाद किया गया। इसके अनुवादक शेख अबुल फैज फैजी है। रचनाकाल 1594 है।

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