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बिना भर्ती प्रक्रिया हाईकोर्ट में नियुक्त 21 कर्मचारियों काे नियमित करने व स्थाई करने वाले आदेश रद्द

बिना भर्ती प्रक्रिया हाईकोर्ट में नियुक्त 21 कर्मचारियों काे नियमित करने व स्थाई करने वाले आदेश रद्द

Dainik Bhaskar

May 01, 2018, 07:36 PM IST
Regular and permanent order canceling 21 employees appointed in the recruitment process High Court

जयपुर. हाईकोर्ट ने 2009 में बिना भर्ती प्रक्रिया चहेतों को बैकडाेर एंट्री के जरिए तदर्थ आधार पर नियुक्त किए गए 21 कर्मचारियों को नियमित करने के 9 अगस्त 2009 व 2013 में इन्हें स्थाई करने के आदेशों को अवैध मानते हुए रद्द कर दिया।

अदालत ने यह कहा

- अदालत ने कहा कि हाईकोर्ट प्रशासन कर्मचारियों को तदर्थ व अस्थाई आधार पर नियुक्ति तो दे सकता है लेकिन हाईकोर्ट के नियम 16 (3) के तहत तदर्थ आधार पर नियुक्त लोगों को नियमित करने का अधिकार नहीं देते।

- ऐसे में ये प्रोबेशन पीरियड या नियमितिकरण के लिए क्लेम नहीं कर सकते। इन कर्मचारियों को नियम 3 के विपरीत जाकर नियमित किया है ऐसे में उनकी जो पदोन्नति हुई है वो भी खत्म हो गई है।

कोर्ट ने कहा, ये नियमित भर्ती नहीं होने तक पद पर रह सकते है

- न्यायाधीश एम.एन.भंडारी व डीसी सोमानी की खंडपीठ ने यह आदेश त्रिलोक चंद सैनी की याचिका को मंजूर करते हुए दिया। अदालत ने कहा कि ये नियमित भर्ती नहीं होने तक पद पर बने रह सकते हैं।

- अदालत ने कहा कि कर्मचारी नौ साल से काम कर रहे हैं इसलिए आगामी भर्तियों में अवसर दिया जाए व हाईकोर्ट प्रशासन इन्हें आयु सीमा में छूट दे सकता है। कर्मचारियों ने अदालत से अपील करने के लिए एक महीने का समय मांगा। लेकिन अदालत ने मना कर दिया।

सुनवाई करते हुए कोर्ट ने यह भी कहा-

- अदालत ने कहा कि हाईकोर्ट से यह अपेक्षा है कि नियुक्ति तय प्रक्रिया व पारदर्शिता से हो। ये नियुक्तियां पारदर्शिता से नहीं हुई है इसलिए इन्हें नियमित करने को सही नहीं मान सकते क्योेंकि ये नियुक्तियां ही सही नहीं हैं। ऐसे में ये कर्मचारी काम करते हुए नहीं रह सकते।

- अदालत ने कहा कि तदर्थ नियुक्तियां, नियमित नियुक्तियां होने तक हो सकती हैं। ऐसे में इन कर्मचारियों को नियमित करने व स्थाई करने का आदेश अवैध हैं और इसमें अदालत को कोई हिचक नहीं है।

हाईकोर्ट प्रशासन ने कहा था कि उन्हें नियुक्ति देने का अधिकार:

- मामले में हाईकोर्ट प्रशासन ने कर्मचारियों के पक्ष में दलील दी कि हाईकोर्ट के नियमों के अनुसार मुख्य न्यायाधीश को नियुक्ति का अधिकार है। इसलिए हाईकोर्ट में इसमें दखल नहीं दे सकता। कर्मचारियों को काम करते हुए नौ साल हो गए हैं।

- हाईकोर्ट प्रशासन ने नियुक्ति प्रक्रिया की जानकारी देने के लिए अदालत में रिकार्ड भी पेश किया। लेकिन अदालत ने हाईकोर्ट प्रशासन की दलीलों से सहमत नहीं होते हुए कहा कि वे केवल तदर्थ व अस्थाई आधार पर नियुक्ति दे सकते हैं, लेकिन विज्ञापन के जरिए व पारदर्शिता अपनाते हुए।


याचिका में ये कहा था:

याचिका में बैक डाेर के जरिए 21 जनों की नियुक्ति को चुनौती देते हुए प्रार्थी ने कहा था कि राजस्थान हाईकोर्ट में 2009 में बिना विज्ञापन ही कई लोगों को कनिष्ठ न्यायिक सहायक के पद पर पहले तदर्थ नियुक्ति देकर बाद में उन्हें नियमित कर दिया।

- जिन लोगों को नियुक्ति दी वे हाईकोर्ट में कार्यरत व रिटायर अफसरों व कर्मचारियों के रिश्तेदार हैं। जबकि सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के अनुसार यह नियुक्तियां अवैध हैं इसलिए इन्हें निरस्त किया जाए।

- इनकी नियुक्ति में पारदर्शिता भी नहीं रखी गई। इसलिए जिस तरह इन्हें नियुक्ति दी है प्रार्थी को भी नियुक्ति दी जाए।

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