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रेजिडेंट डॉक्टरों के हड़ताल का दूसरा दिन, चिकित्सा व्यवस्था ‘बेपटरी’

रेजिडेंट डॉक्टरों के हड़ताल का दूसरा दिन, चिकित्सा व्यवस्था ‘बेपटरी’

Danik Bhaskar | Dec 19, 2017, 09:54 AM IST
डाक्टरों की हड़ताल के कारण एसएम डाक्टरों की हड़ताल के कारण एसएम

जयपुर। सेवारत डॉक्टरों की हड़ताल के बाद एसएमएस मेडिकल कॉलेज से जुड़े अस्पतालों के रेजीडेंट डॉक्टर्स ने मंगलवार को दूसरे दिन भी कार्य बहिष्कार किया जिसके चलते चिकित्सा व्यवस्था ठप रही। अस्पतालों के आउटडोर से इमरजेन्सी तक अफरा-तफरी मची रही। मरीज ‘धरती के भगवान’ को तलाशते रहे। एसएमएस अस्पताल में रेजिडेंट डॉक्टरों के कार्य बहिष्कार पर जाने से दूरदराज से आउटडोर में आने वाले मरीज डॉक्टर को दिखाने के लिए घंटों इंतजार करते नजर आए। जानिए और इस बारे में ....

- भर्ती मरीजों को वार्ड में न तो दवा मिली और जांच की पर्ची के लिए भी परिजन इधर-उधर भटकते रहे। इमरजेन्सी में आने वाले घायल व आईसीयू में भर्ती गंभीर मरीज भगवान भरोसे रहे। यही हालात जेके लोन, इंस्टीट्यूट ऑफ रेस्पीरेटरी डिजीज, गणगौरी बाजार, जनाना चांदपोल व सांगानेरी गेट स्थित महिला चिकित्सालय के रहे। हालांकि एसएमएस अस्पताल प्रशासन का दावा है कि असिस्टेंट प्रोफेसर को तैनात करने पर मरीजों को किसी तरह की दिक्कत का सामना नहीं करना पड़ा।

भूमिगत हुए रेजिडेंट्स

- इधर, रेस्मा के तहत सेवारत चिकित्सकों को गिरफ्तारी से एसएमएस मेडिकल कॉलेज के रेजीडेंट गिरफ्तारी के डर से भूमिगत हो गए हैं।

आईसीयू , इनडोर व इमरजेन्सी में रेजिडेंट

- मेडिकल कॉलेज से जुड़े अस्पतालों की आईसीयू, इमरजेन्सी व भर्ती मरीजों के साथ 24 घंटे रेजिडेंट ही रहते हैं। दवा, जांच लिखने जैसे काम रेजिडेंट डॉक्टर ही करते हैं। और मरीजों की हालत गंभीर होने पर संबंधित यूनिट के डॉक्टर से फोन पर बातचीत करके इलाज करते हैं।

इधर, जयपुरिया अस्पताल में रेजीडेंट का कार्य बहिष्कार नहीं

- राजस्थान यूनिवर्सिटी ऑफ हैल्थ साइंस से जुड़े जयपुरिया अस्पताल की अधीक्षक डॉ. रेखा सिंह का कहना है कि जयपुरिया अस्पताल में रेजीडेंट डॉक्टरों ने कार्य बहिष्कार नहीं किया है। हमारे यहां मरीजों को दिक्कत नहीं है।

व्यवस्था की है

- आपातकालीन व्यवस्थाओं पर फोकस रखा गया है ताकि मरीजों को किसी तरह की दिक्कत नहीं आएं। - डा. यू. एस. अग्रवाल, प्राचार्य, एसएमएस मेडिकल कॉलेज

रेजीडेंट कार्य बहिष्कार का एसएमएस अस्पताल पर असर
- औसतन रोजाना 10 हजार के ओपीडी के बजाय 8246 मरीज
- 500 के बजाय 307 मरीज भर्ती
- हर दिन 250 ऑपरेशन, लेकिन सोमवार को 103 ऑपरेशन
- एसएमएस में रोजाना होती है 25 से 30 मौतें, लेकिन पिछले 24 घंटे की बात की जाए तो सोमवार देर रात तक 15 से ज्यादा मरीजों ने तोड़ा दम।
- इमरजेन्सी ओपीडी: 56
(उपयुक्त स्थिति सोमवार की है)