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मेरा कोई सम्मान करेगा तो मुझे बहुत दुख होगा:संत नारायणदास महाराज

मेरा कोई सम्मान करेगा तो मुझे बहुत दुख होगा:संत नारायणदास महाराज

चैतन्य कुमार मीणा | Last Modified - Jan 27, 2018, 10:30 AM IST

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    नारायण दास जी महाराज।


    अजीतगढ़ (चैतन्य मीणा)। देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान के लिए जारी सूची में त्रिवेणी धाम सन्त ब्रह्मपीठाधीश्वर नारायण दास जी महाराज का नाम आध्यात्म के फील्ड में पद्म श्री सम्मान के लिए नामित हुआ है। गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर जारी सूची में महाराज का नाम पाकर श्रद्घालुओं में काफी उत्साह है। वहीं, महाराज को इस सम्मान की जानकारी लोगों ने दी तो उन्होंने बड़ी सादगी से कहा कि उन्होंने कोई कार्य नहीं किया है जिससे उनका सम्मान हो। सब काम जनता ने किए हैं। जानिए और इस बारे में ...


    - नारायणदास महाराज ने कहा, मैंने भगवान की सेवा करके दो टाइम भोजन किया है। जहां तक सम्मान की बात है तो सम्मान जनता का होना चाहिए जिसने उनके कहने पर करोड़ों रुपए खर्च कर दिए। मैं तो स्वयं सदैव उनका ऋणी रहूंगा। अब मेरा कोई सम्मान करेगा तो मैं काफी दुखी होऊंगा। मैंने कुछ नहीं किया सब काम जनता ने किया है।

    संत शिरोमणि नारायणदास जी महाराज कर रहे हैं प्राणी सेवा
    - क्षेत्र के प्रसिद्घ त्रिवेणी धाम के संत शिरोमणि नारायणदास जी महाराज दशकों से प्राणी मात्र की सेवा एवं समाज में रचनात्मक कार्यों के लिए प्रतिदिन समर्पण भावना से कार्य कर रहे हैं। महाराज गुजरात के डाकोर धाम के ब्रह्मपीठाधीश्वर की गद्दी पर भी महंत आसीन हैं। अर्थात त्रिवेणी एवं डाकोर दो स्थानों के बड़े संत हैं।

    ये हैं मुख्य रचनात्मक कार्य:-
    - विश्व की प्रथम पक्की निर्मित 108 कुंडों की यज्ञशाला, राजस्थान में करोड़ों की लागत से जयपुर में जगद्गुरू रामानंदाचार्य संस्कृत विश्वविद्यालय की स्थापना, त्रिवेणी में वेद विद्यालय, अपने गुरू भगवान दास महाराज ने नाम से बाबा भगवानदास राजकीय कृषि महाविद्यालय चिमनपुरा, बालिकाओं के लिए बाबा गंगादास राजकीय पीजी कॉलेज शाहपुरा, अजीतगढ़ में प्रदेश में ग्राम पंचायत स्तर पर पहला 100 बेड का सामान्य अस्पताल बाबा नारायणदास राजकीय सामान्य चिकित्सालय, बाबा नारायणदास राजकीय संस्कृत प्रवेशिका स्कूल अजीतगढ़, चिमनपुरा,साईवाड़ समेत आसपास के ग्रामीण इलाके में अनेक स्कूल, गौ शालाएं एवं हॉस्पिटल, मध्यप्रदेश के सेंधवा में बड़ा हॉस्पिटल, चिमनपुरा में हाल ही नारायणदास राजकीय कला कॉलेज का शिलान्यास किया गया है। महाराज का जन्म स्थान चिमनपुरा प्रदेश में पहला ऐसा ग्रामीण क्षेत्र है जहां एक साथ दो सरकारी कॉलेज संचालित है।
    त्रिवेणी धाम में प्रतिदिन हजारों की संख्या में श्रद्वालु एवं संत प्रसादी ग्रहण करते है। यहां बड़ी गौशाला है जिसमें हजारों की संख्या में गाएं हैं। यहां धार्मिक पुस्तक रामायण के दीवार लेखन का बड़ा भवन है जिसको देखने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्वालु आते हैं। विभिन्न समाजों के सामूहिक विवाह करवाते है। रामनाम की बैंक स्थापना कर रखी है जिसमें से पुस्तकें दी जाती हैं। राम नाम से भर कर वापस बैंक में जमा होती है। अब तक करोड़ों रामनाम का संग्रह मौजूद है। महाराज अनेक धार्मिक स्थान अयोध्या आदि में श्रृद्धालुओं के विश्राम के लिए धर्मशालाएं बना रखी है। देश के अनेक स्थानों पर यज्ञ एवं भंडारे आयोजित करवाते हैं। उल्लेखनीय है कि महाराज 90 साल के करीबन होने के बावजूद अब भी मंगलवार एवं शनिवार को श्रृद्धालुओं एवं भक्तों के दुख-दर्द के बारे में चर्चा एवं सुझाव, उपाय बताते हैं।

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Web Title: Reward Is Not A Matter Of Pride : Narayandas Maharaj
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