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एक बीमारी से हुई इस एक्टर की मौत, चमत्कार का इंतजार कर रहा था परिवार

लगान फिल्म के ईश्वर काका (श्रीवल्लभ व्यास) का निधन जयपुर में रविवार को हो गया।

DainikBhaskar.com | Last Modified - Jan 08, 2018, 03:07 PM IST

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    जयपुर में श्री वल्लभ व्यास ने अंतिम सांस ली।

    जयपुर.लगान फिल्म के ईश्वर काका (श्रीवल्लभ व्यास) का निधन जयपुर में रविवार को हो गया। श्रीवल्लभ व्यास जैसलमेर के रहने वाले थे और उन्होंने फिल्म इंडस्ट्रीज में अपना अलग ही मुकाम हासिल किया था। जैसलमेर में उनका पैतृक मकान सोनार दुर्ग में है और उनका बचपन इसी दुर्ग की गलियों में बीता था। जानें व्यास की पूरी कहानी...

    - लम्बी बीमारी के बाद उन्होंने जयपुर में रविवार को अंतिम सांस ली। रविवार की शाम उनके परिजन जैसलमेर से जयपुर के लिए रवाना हो गए।
    - अक्टूबर 2008 में गुजरात में भोजपुरी फिल्म की शूटिंग के दौरान उनके साथ हादसा हुआ था। उसके बाद पैरालिसिस अटैक के चलते वे लगातार बीमार रहे। वहां से उनका फिल्मी कॅरिअर खत्म हो गया। वहां से पहले उन्हें हैदराबाद ले जाया गया और बाद में जैसलमेर आए। पिछले कई वर्षों से वे जयपुर में ही थे।
    - उनके पीछे उनकी पत्नी शोभा व्यास, दो बेटियां शिवानी-रागिनी है। उनकी माता उनके छोटे भाई के साथ हैदराबाद में रहती है।

    किसी चमत्कार का इंतजार कर रहा था परिवार

    उनकी पत्नी शोभा व्यास ने बताया था कि वह 13 अक्टूबर, 2008 का दिन था। रात को ग्यारह बजे मेरी फोन पर बात हुई। अगले दिन उन्हें मुंबई आना था और 15 अक्टूबर को आदित्य चोपड़ा की फिल्म “दिल बोले हड़िप्पा’ की शूटिंग के लिए चंडीगढ़ पहुंचना था। फिल्म में उनके दो शेड्यूल पहले हो चुके थे। गृह मंत्री के रूप में ये शॉट अब भी फिल्म में हैं, लेकिन बाद में वे नहीं जा पाए।’ श्रीवल्लभ व्यास तभी से बिस्तर पर थे और लिक्विड भोजन लेते थे। बोल भी नहीं पाते। पत्नी शोभा व्यास ने कहा था कि-”वी आर वेटिंग फॉर मिराकल।’

    नहीं मना पाए 51वां जन्म दिन!

    श्रीवल्लभ व्यास 17 सितम्बर, 2008 को जब 50 साल के हुए तो वो चंडीगढ़ में "दिल बोले हड़िप्पा' की शूटिंग में व्यस्त थे। उनकी प|ी और दोनों बेटियां उनका गोल्डन जुबली बर्थ डे मनाना चाहती थीं, लेकिन तब व्यास ने फोन पर कहा-"हम अगले साल 51वां जन्मदिन मनाएंगे।' लेकिन नियति को यह मंजूर नहीं था।

    बेटियों का दर्द

    श्रीवल्लभ व्यास के दो बेटियां हैं- शिवानी और रागिनी। व्यास की इच्छा थी कि दोनों बेटियां फिल्मों में काम करें, लेकिन अब यह संभव नहीं था। शिवानी ने डिजाइनिंग का कोर्स किया है और रागिनी बारहवीं कक्षा में पढ़ रही है।


    अक्षय और आमिर खान ने की मदद


    - बीमारी के वक्त व्यास के परिवार को पैसों की मंदी भी झेलनी पड़ी। इस दौरान आमिर खान ने उनके परिवार की मदद की। वे हर माह 30 हजार रुपए भेजते थे। साथ ही उनकी बेटियों की स्कूल फीस और उनके मेडिकल का खर्च भी दे रहे थे। इसके साथ अक्षय कुमार ने भी व्यास की मदद के लिए 6 लाख रुपए का चैक भिजवाया था। इसके अलावा एमएसडी से भी मदद दी जाती थी।

    पहला सीरियल काठ की गाड़ी 1981 में आया


    1981 में दूरदर्शन पर प्रसारित हुए सीरियल काठ की गाड़ी में श्रीवल्लभ व्यास ने अहम किरदार निभाया था। उसके बाद कई विज्ञापनों धारावाहिकों में उन्हें रोल मिला वे 1973 में जैसलमेर से जयपुर पढ़ाई करने के लिए गए थे। उन्होंने 1976 में एमए हिन्दी में किया और बाद में सीधे ही मुम्बई की तरफ रुख कर लिया। जहां नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा में 700 रुपए में नौकरी भी की।

    व्यास का जीवन संघर्ष भरा रहा : व्यास का जीवन संघर्ष भरा रहा। उनका जन्म 17 सितंबर 1958 को जैसलमेर में हुआ था। राजस्थान यूनिवर्सिटी से हिन्दी में एमए करने के बाद वे 1976 में मुम्बई चले गए थे। पहला सीरियल 1981 में किया। उसके बाद छोटे मोटे किरदार विज्ञापन सीरियल में किए। 1999-2000 में उन्हें प्रसिद्धि मिली। ऐसे में 24 साल संघर्ष के बाद वे फिल्म इंडस्ट्रीज में स्थापित हो पाए।

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    करीब 9 साल से बीमार चल रहे थे व्यास।
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    लगान में अपने किरदार के लिए जाने जाते थे।
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    भोजपुरी फिल्म की शूटिंग के दौरान बेहोश हो गए थे।
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    पैरालिसिस अटैक के चलते वे लगातार बीमार रहे।
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Web Title: Shri Vallabh Vyas Take Last Breath In Jaipur
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