--Advertisement--

तानों से तंग इस महिला रेसलर के परिवार ने छोड़ दिया था गांव, अब किया ऐसा कमाल

तानों से तंग इस महिला रेसलर के परिवार ने छोड़ दिया था गांव, अब किया ऐसा कमाल

Danik Bhaskar | Jan 22, 2018, 03:31 PM IST
राजस्थान के श्रीगंगानगर शहर क राजस्थान के श्रीगंगानगर शहर क

श्रीगंगानगर. सन्नी जाट, उम्र 18 साल। ये वो उम्र है, जब लड़कियां कॉलेज में पढ़ाई कर अपने सुनहरे भविष्य की नींव रखती हैं। लेकिन सन्नी रोजाना पंजाब के ग्रेट खली एकेडमी में पुरुष रेसलरों से भिड़ती है। यह आज से नहीं, पिछले डेढ़ साल से चल रहा है और अब इतनी पारंगत हो चुकी है कि वह 24 फरवरी से उदयपुर में होने वाली अंतरराष्ट्रीय फाइट में अमेरिकी रेसलरों के सामने रिंग में उतरेगी। जानें सन्नी की पूरी कहानी...


- राजस्थान की पहली महिला रेसलर सन्नी ने डब्ल्यूडब्ल्यूई में भी ट्रायल दिया है। इसका परिणाम भी इसी माह आना है।
- सन्नी की यहां तक पहुंचने की राह आसान नहीं थी। पिता को लोन लेना पड़ा। रिश्तेदारों ने ताने मारे तो गांव तक छोड़ना पड़ा।
- अब से पहले सन्नी हरियाणा की इंटरनेशनल रेसलर कविता दलाल से मुकाबले में जीत चुकी है। कविता दलाल देश की पहली महिला रेसलर है।

पिता ने हमेशा बढ़ाया हौंसला, खुद सन्नी से जानिए गांव से रिंग तक पहुंचने की पूरी कहानी...


- मूलतः: रायसिंहनगर के 68 आरबी की सन्नी बताती हैं, जब मैं छोटी थी, तब से मुझे लड़कों जैसे कपड़े पहनना, उछल-कूद पसंद थी। टीवी देखती थी, लेकिन कार्टून व गानों-फिल्मों से दूर रहती थी।
- टीवी पर वह पुरुषों की रेसलिंग देखा करती थी। उसने तय किया कि वह भी इसी फील्ड में जाएगी। गांव में ही उसने अभ्यास शुरू किया तो रिश्तेदारों ने ताने मारने शुरू कर दिए।
- सब कहते कि यह लड़की तो माता-पिता व परिवार का नाम बर्बाद करेगी। मैं लड़कों जैसे पेंट-शर्ट पहना करती थी।
- रिश्तेदारों को इस पर भी आपत्ति होती थी। तानों से तंग हो परिवार ने गांव ही छोड़ दिया। सब शहर आ गए, ताकि मेरे अभ्यास में कोई खलल पैदा न हो।
- प्राइवेट स्कूल में 12वीं तक पढ़ने के बाद सरकारी कॉलेज में दाखिला लिया। लेकिन अभ्यास के लिए उसने नियमित के बजाय प्राइवेट में एडमिशन लिया।
- सन्नी बताती है, मेरा रेसलिंग में ही जाना तय था। लेकिन पिता के पास इतनी पूंजी नहीं थी। पिता श्रीगंगानगर में एक प्राइवेट केबल ऑपरेटर के यहां काम कर 8-10 हजार कमाते हैं, जबकि घर खर्च 20 हजार से ज्यादा होता था। घर में तीन भाई-बहन पढ़ने वाले थे।

सपने पूरा करने बैंक से लोन लिया

- इस पर पिता ने मेरा सपना पूरा करने के लिए बैंक से लोन लिया। फिर मैंने पंजाब में द ग्रेट खली की एकेडमी ज्वॉइन कर ली। वहां अब मैं डेढ़ साल से ट्रेनिंग ले रही हूं। कई मुकाबले जीत चुकी हूं।
- बड़ी बात यह है कि जो रिश्तेदार मेरे परिवार को ताने मारते थे। अब वही परिवार को बधाई देते हैं। पिता जयमल गोदारा बताते हैं, मेरी बेटी बेटों से कम नहीं। है। गांव में तो मेरी बेटी का रूतबा इतना था कि सब उससे डरते थे।
- सन्नी को भी जब मैंने एकेडमी ज्वॉइन कराई तो शुरू में किसी को बताया तक नहीं। पहली फाइट जीतने पर अखबार में नाम छपा तो सबको पता लगा। अब सभी रिश्तेदार पिता का हौसला बढ़ाते हैं।

फोटोज- पवन तिवाड़ी