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ऐसी है इस ट्रांसजेंडर की कहानी

ऐसी है इस ट्रांसजेंडर की कहानी

Aadi Dev Bharadwaj | Last Modified - Dec 16, 2017, 03:25 PM IST

जयपुर। यह कहानी है अक्कई पद्माशाली की। ऐसा लड़का जिसके भीतर एक लड़की मौजूद रही। माता-पिता की इस लड़के के भीतर मौजूद लड़की को बाहर निकालने की लाख कोशिशों के बावजूद वह बाहर आ ही गई। उस लड़के ने एक लड़की की शक्ल अख्तियार कर ली। अक्कई पैदा हुआ तो एक लड़का था, लेकिन उसने खुद को एक ट्रांस के तौर पर चुना। जयपुर में हुए Ted X Anchor Program में अक्काई ने अपनी लाइफ की कुछ बाते शेयर की। क्लासमेट्स मेरा मजाक उड़ाते थे...

- बेंगलुरू की ट्रांस सेक्सुअल अक्काई पद्माशाली कहती हैं, मेरा जन्म एक लड़के के रूप में हुआ। मगर मुझे फ्रॉक पहनना, सजना-संवरना अच्छा लगता था। मैं लड़की बनना चाहती थी। पिता एयरफोर्स में मां हाउस वाइफ थीं। उन्होंने कहा, हमारे संस्कारों में प्रकृति के साथ खिलवाड़ नहीं होता। स्कूल में साथी मेरा मजाक उड़ाते थे। मैंने सुसाइड करने का मन भी बनाया मगर जिंदगी से हार नहीं मानी। जेंडर चेंज किया। एनजीओ संगमा के साथ सेक्सुअल माइनोरीटीज के लिए काम किया। वहीं एक्टर गुरपाल सिंह ने कहा कि सोशल मीडिया पर मिलने वाले लाइक्स शॉर्ट टर्म डोपामिन हैं, जो आपको खुश करते हैं। हम सभी के अंदर अड्डा बसा है, जहां हम एक-दूसरे से सीखते हैं। इसलिए ‘माफिया’ यानी म्यूजिशियंस आर्टिस्ट्स फिल्ममेकर्स इंट्रेस्टेड लोग, जाओ अड्‌डा बनाया जिसमें हर टैलेंट आमंत्रित है।

जानिए और अक्काई के जीवन में आए उतार-चढ़ाव के बारे में ....

- बेंगलुरू के मध्यवर्गीय परिवार में जन्मे जगदीश अक्काई मेल टू फीमेल ट्रांसजेंडर है। जगदीश के पिता एयरफोर्स में हैं तो मां गृहिणी। जगदीश का बचपन विरोधाभासों में खोया रहा। अपनी बहन के कपड़े पहनने पर जगदीश के माता-पिता उसकी खूब खिंचाई करते। ऐसी ही हरकतों से परेशान मां-बाप जगदीश को ठीक कराने के लिए डाक्टरों और झाड़-फूंक करने वाले भोपों के पास ले जाते।
- जगदीश अक्काई खुद को यकीन दिलाता रहता कि वह एक लड़का ही है, लेकिन भीतर उसके हमेशा एक लड़की छटपटाती रहती। मात्र 12 साल की उम्र में यह छटपटाहट हिलोरे मारती रही और अकेलापन तथा खुद को लड़का ही साबित करने की जद्दोजहद और चाह में जगदीश ने दो बार मौत को गले लगाने की कोशिश की।

भाई ने दी मान्यता
- 16 साल की उम्र में दगदीश ने एक दिन अपने भाई को बता ही दिया कि वह एक लड़की होना चाहता है। उसका भाई ही वह पहला शख्स था जिसने उसे लड़की के तौर पर स्वीकार किया या कहें मान्यता दी। भाई ने पेरेंट्स को इस बारे में काफी मनाया, लेकिन वे यही मानते रहे कि नहीं वह बदल जाएगी।
- युवा जगदीश महिला हिजड़ों को देखती। एक दिन जगदीश ने उनको अपनी इस खोई पहचान के बारे में बताया। जगदीश के अनुसार, उन्होंने मुझे कहा, हमारे जैसा मत बन, अगर तू हमारे जैसा बनती है तो तेरे सामने केवल दो ही विकल्प होंगे, एक भीख मांगने का और दूसरा अपना शरीर बेचने यानी वेश्यावृत्ति का। लेकिन यह सब कहां खत्म होने वाला था। जगदीश को पता था कि उसे उन जैसा ही बनना है। उसे खुद को पुरुषों को परोसना भी था।

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Web Title: Ladke se ladki ban gayi thi ye mahila, frok phnnaa lgataa thaa achchhaa
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)

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