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एक आईडिए से 2 करोड़ रुपए कमाता है ये गांव, ऐसे बदली लाइफ स्टाइल

एक आईडिए से 2 करोड़ रुपए कमाता है ये गांव, ऐसे बदली लाइफ स्टाइल

Anant Aeron | Last Modified - Jan 17, 2018, 11:18 AM IST

भरतपुर.दिल्ली के आईआईटीयन ने कांच की भाटियों में बदलाव किया है, जिससे कारीगरों को 1400 डिग्री सेंटीग्रेड तापमान पर भी चूडिय़ा बनाना आसान हो गया है। इससे गैस की समस्या भी दूर हो गई है। साथ ही स्वास्थ्य को लेकर खतरा भी कम हुआ है। उल्लेखनीय है कि नदबई के ऊंच गांव में कांच की हरे रंग की चूडिय़ां बनाई जाती हैं। जानें क्या है खास...

- यहां बनी चूडिय़ां जिले सहित आसपास के जिलों में आपूर्ति होती हैं, किंतु कांच की भट्टी पर काम करने वाले कारीगरों को भारी परेशानी होती थी।
- इन भट्टियां में ईंधन की अधिक खपत होने के साथ ही इनसे निकलने वाला धुंआ उनके स्वास्थ्य पर दुष्प्रभाव डालता था। साथ ही कांच की जहरीली गैस भी अनेक बीमारियां पैदा कर भट्टियां पर काम करने वाले व्यक्ति की उम्र को घटाकर 40 से 45 वर्ष कर देती थी।
- कारीगरों की परेशानी को देखते हुए लुपिन फाउंडेशन ने परंपरागत भट्टियां के स्थान पर बदलाव के लिए नई दिल्ली आईआईटी के रूरल टेक्नोलॉजी एक्शन ग्रुप से संपर्क किया। वहां के आईआईटीयन ने अति आधुनिक भट्टियां का निर्माण किया।


दो करोड़ रुपए सालाना टर्नओवर


- यहां सालाना टर्नओवर करीब 2 करोड़ रुपए है। गांव में पांच भट्टियां बनी हैं। करीब 40 से ज्यादा परिवार इस कारोबार से सीधे-सीधे जुडे़ हुए हैं।
- लुपिन निदेशक सीताराम गुप्ता ने बताया कि अभी एक भट्टी मोडिफाइड हुई है। संस्था अन्य संचालित भाटियों को भी आधुनिक बनाएगी।

दूसरी बार हुआ है बदलाव


- विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग ने नवीन चूड़ी भट्टियां का निर्माण किया, जिसमें धुआं निकालने के लिए 18 फुट ऊंची चिमनी बनाई गई तथा बाहरी तापमान कम करने के लिए फायर ब्रिक्स लगाई। किंतु इसके बाद भी धुआं निकलना पूरी तरह बंद नहीं हुआ और भट्टियां पर काम करने वाले व्यक्ति को बैठने में परेशानी बरकरार रही। आईआईटी नई दिल्ली रूटैग ने गांव में पहुंच कर कारीगरों की समस्याओं को समझा।
- भट्टी का मोडिफाइड किया, जिसमें फायर ब्रिक्स की सेटिंग की गई, इससे भट्टी का तापमान 1400 डिग्री सेंटीग्रेड के बाद भी बाहरी तापमान प्रभावित नहीं होता। साथ ही भट्टी में धुआं और जहरीली गैस बाहर नहीं आती है।

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