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सात साल से खूंटी पर टंगी है बूंदी रियासत की पाग, उत्तराधिकारी की तलाश जारी

सात साल से खूंटी पर टंगी है बूंदी रियासत की पाग, उत्तराधिकारी की तलाश जारी

Aadi Dev Bharadwaj | Last Modified - Nov 24, 2017, 10:19 AM IST


(मांगूसिंह शेखावत) बूंदी। फिल्म पद्मावती को लेकर छिड़ी जंग ने बूंदी के हाड़ा राजघराने की पाग (पगड़ी) की चर्चा भी जिंदा कर दी है। फिल्म को लेकर राजघराने के प्रतिनिधि के तौर पर बलभद्र सिंह के वक्तव्य के बाद अलवर राजघराने के भंवर जितेंद्र सिंह के प्रबंध प्रतिनिधि की ओर से आए स्पष्टीकरण में कहा गया था कि महाराव राजा रणजीतसिंह के निधन के बाद वारिस उनकी बहन महेंद्रा कुमारी के पुत्र भंवर जितेंद्र सिंह और कुलदेवी आशापुरा माताजी ट्रस्ट बूंदी काबिज मालिक हैं। इसके बाद पाग पर फिर चर्चा छिड़ गई।जानिए और इस बारे में ....

- सात जनवरी, 2010 को बूंदी के महाराज कुमार रणजीत सिंह का निधन हुआ। उन्हें कोई संतान नहीं थी, न ही उन्होंने किसी को गोद लिया था। 21 जनवरी को पगड़ी दस्तूर होना था। बूंदी, अलवर ही नहीं सभी पूर्व राजघरानों को भी उत्सुकता थी पर एक राय नहीं बनी, तब से पगड़ी दस्तूर नहीं हुआ। अब तो लोकोक्ति बन गई है कि बूंदी की पाग खूंटी पर टंगी है। हाड़ा वंशजों के दिल में इस बात की कसक है।

छोटी काशी काे भी है पाग की चिंता

- राजे-रजवाड़े, राजघराने, रियासतें, राजतिलक बेशक अब प्रतीकभर हैं। संवैधानिक महत्व भले हो पर कई राजघराने अब भी दिलों पर राज करते हैं। राजतिलक जैसी परंपराओं का निर्वहन और पाग का सम्मान आज भी है। परंपराओं में जीने वाले छोटी काशी के लोगों के दिल में एक कसक है कि बूंदी की पाग सात साल से खूंटी पर टंगी है। संत-महंत तक सवाल करते हैं कि क्या हाड़ा वंश में कोई इसके काबिल नहीं? हाड़ाओं के दिल में भी यह टीस है। बाबा बजरंगदासजी (लाल लंगोट वाले) ने पिछले साल बूंदी आए मंत्री राजेंद्र राठौड़ से यही कहा था बूंदी की पाग कब तक खूंटी पर टंगी रहेगी? संत ब्रह्मलीन हुए तब भी लोग कहने लगे बूंदी अनाथ हो चुकी है।

विवाद इसलिए...

- राजघरानों में पाग और प्रॉपर्टी को लेकर विवाद नई बात नहीं, बूंदी राजघराना भी इससे अछूता नहीं। पूर्व महाराज रणजीतसिंह के कोई संतान नहीं थी, ना उन्होंने उत्तराधिकारी गोद लिया था। वे चचेरे भाई बलभद्रसिंह से नाराज थे। वसीयत में बलभद्रसिंह से अपने रिश्ते का जिक्र करते हुए लिखा कि उन्हें उनकी पार्थिव देह को हाथ नहीं लगाने दिया जाए। इच्छा के मुताबिक बलभद्रसिंह को मुखाग्नि नहीं दे सके। दूसरी वसीयत में रणजीतसिंह ने प्रॉपर्टी का हिस्सेदार अपनी बहन महेंद्रा कुमारी के पुत्र भंवर जितेंद्र दोस्त अविनाश चांदना को बताया। केस कोर्ट में है। बलभद्रसिंह बूंदी के पूर्व महाराज बहादुरसिंह के बड़े भाई केशरीसिंह के पुत्र हैं। महाराजा बहादुरसिंह के निधन के बाद उनके पुत्र रणजीतसिंह गद्दी पर बैठे। बलभद्रसिंह बहादुरसिंह के भतीजे और महाराजकुमार रणजीतसिंह के चचेरे भाई हैं। भंवर जितेंद्रसिंह महाराज रणजीतसिंह की बहन अलवर राजघराने की युवरानी महेंद्रा कुमारी के पुत्र हैं। वे बूंदी राजघराने के भांजे हैं और नरूका वंशज हैं जबकि पाग का दस्तूर हाड़ा वंशज को होता रहा है। बलभद्रसिंह का दावा है कि बूंदी राज परिवार की पाग के वे स्वाभाविक हकदार हैं। भान्जे भंवर जितेंद्र प्रॉपर्टी के मालिक हो सकते हैं पर पाग के नहीं।

पगड़ी चुकी थी, दस्तूर की तैयारी थी फिर ऐसा हुआ...धरी रह गई पाग
- सात जनवरी 2010 को महाराजकुमार रणजीतसिंह का निधन हुआ, 21 जनवरी को पगड़ी रस्म की तैयारी हो रही थी। वहां मौजूद लोगों के मुताबिक हिमाचल से भंवर जितेंद्रसिंह के ससुराल के लोग पाग लेकर बूंदी जा चुके थे। वहां मौजूद कोटा दरबार बृजराजसिंह ने उन्हें अंग्रेजी में कुछ ऐसा कुछ कहा कि वे पाग वापस ले गए। तब से पाग की रस्म नहीं हो सकी।

आगे की स्लाइड्स में देखिए इस राजघराने से जुड़े फोटोज।

फोटो : मांगूसिंह शेखावत

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Web Title: 7 saal se apne vaaris ka intjaar kar rhi ye riyaast, khaali pdeaa hai taaj
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)

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