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एक आईडिए से लाखों कमा रहा ये किसान, खेती नहीं इस तरीके से बने लखपति

एक आईडिए से लाखों कमा रहा ये किसान, खेती नहीं इस तरीके से बने लखपति

Anant Aeron | Last Modified - Nov 27, 2017, 11:53 AM IST

नैनवां(राजस्थान). यहां का एक युवा किसान ने बीए-बीएड कर सरकारी नौकरी के लिए लंबी कतारों में लगने की बजाए खेती को ही कॅरिअर बना लिया। परंपरागत खेती की बजाए इस युवा ने अमरूदों का बगीचा लगाया। सालाना इनकम अब लाखों में जा पहुंची है। जानें कितनी होती है कमाई...

- पढ़े-लिखे होने के कारण इस युवा को सरकारी स्कीमों की जानकारी है, इसका फायदा उठाते हुए बागवानी मिशन से अनुदान लेकर बगीचा लगाया। कुछ पैसा घर से खर्च किया।
- एक बार खर्च और चार साल की मेहनत का नतीजा अब सामने आने लगा है। कमाई होते देख इलाके के किसान भी अब बागवानी के बारे में सोचने लगे हैं और कइयों ने तो बागवानी शुरू भी कर दी है।
- ये किसान हैं बिजलबा के सोभागमल मीणा। परंपरागत खेती के छोड़ 20 बीघा खेत में अमरूदों के 1220 पौधों का बगीचा तैयार किया। इस साल उन्हें अमरूद के बगीचे से करीब 5.50 लाख रुपए की इनकम हो चुकी है। वे खुश हैं, वहीं इलाके के बाकी किसानों में भी बागवानी के प्रति रुचि बढ़ने लगी है।
- सोभाग की उपलब्धि में इसकी पत्नी राधादेवी भी बराबर की भागीदार है। राधा बगीचे की सार-संभाल, निराई, गुड़ाई, सिंचाई, खाद डालने सहित खेती कार्यों में बराबर हाथ बंटाती है।

इस तरह बढ़ा सफलता का कारवां


- सोभाग ने बताया कि उसके सहपाठी उद्यान विभाग के कृषि पर्यवेक्षक नरेन्द्र जैन से बागवानी मिशन योजना से उन्हें जोड़ा। विभाग की योजना का फायदा उठाकर बरड़े की 24 बीघा में से 20 बीघा में अमरूदों का बगीचा लगाया।
- वर्ष-2015 से बगीचे से इनकम होने ली। वर्ष 2015 में 60 हजार, 2016 में 2 लाख रुपए कमाए। अब कमाई लगातार बढ़ रही है। आमदनी बढ़ने ग्राफ 2020 तक 15-16 लाख रुपए तक पहुंचने का अनुमान है।
- बगीचे के साथ-साथ सोभाग ने कृषि विभाग की योजना में ही बरसाती पानी का फार्म पोंड भी बनवा रखा है। सिंचाई के ड्रिप सिस्टम काम में लेते हैं। खेत में ही जैविक खाद का प्लांट लगा लिया। यहीं खाद तैयार करते हैं।

चार साल की मेहनत


- सोभाग बताते हैं कि बरड़ा की भूमि भी काफी उपयोगी साबित हुई। बागवानी में एक बार खर्चा हुआ और चार साल की मेहनत के बाद सालों तक शुद्ध इनकम। और वह भी साल दर साल बढ़ती जाती है।
- सूखा-अकाल में भी चिंता नहीं, क्योंकि बगीचे या आमदनी पर असर नहीं पड़ता। वे कहते हैं कि परंपरागत खेती के साथ नवाचार किए जाएं तो किसानों को आत्महत्या करने के लिए मजबूर ही नहीं होना पड़ेगा। उनकी सलाह है कि किसान उनकी तरह ही बागवानी, सब्जियों जैसी नकदी की फसलों पर जोर दें।

आगे की स्लाइड्स में देखिए इस किसान की फोटोज।


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Web Title: ek Idea se laakhon kmaa raha ye kisaan, kheti nahi is tarike se bane lkhpti
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)

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