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नई उम्मीद : एयरपोर्ट के 65 फीसदी हिस्से पर दिसंबर तक बनेगा टैक्सी-वे, बढ़ेगा फ्लाइट्स का मूवमेंट - दिसंबर तक एयरपोर्ट पर 1 घंटे में हो सकेगा 16 फ्लाइट्स का मूवमेंट, टैक्सी-वे का काम पकड़ेगा गति

नई उम्मीद : एयरपोर्ट के 65 फीसदी हिस्से पर दिसंबर तक बनेगा टैक्सी-वे, बढ़ेगा फ्लाइट्स का मूवमेंट - दिसंबर तक एयरपोर्ट पर 1 घंटे में हो सकेगा 16 फ्लाइट्स का मूवमेंट, टैक्सी-वे का काम पकड़ेगा गति

Shivang Chaturvedi | Last Modified - Nov 14, 2017, 01:32 PM IST


जयपुर। जयपुर एयरपोर्ट पर यात्रियों की सुविधा के लिए अब एयरपोर्ट प्रशासन यहां क्षमताओं को विकसित करने में लगा है। इस दिशा में सबसे पहले एयरपोर्ट पर अधिक विमानों का आवागमन सुगम बनाना है। इसके लिए टैक्सी ट्रैक के कार्य को लेकर एक बार फिर पहल की जा रही है। दिसंबर तक यह काम पूरा हो जाएगा। उम्मीद है कि इसके बाद एयरपोर्ट से 1 घंटे में 5 से 6 ज्यादा विमान संचालित किए जा सकेंगे। जानिए और इस बारे में ...
- अभी एयरपोर्ट से रोजाना 61 फ्लाइट संचालित हो रही हैं। एयरलाइंस और फ्लाइट्स जोड़ने के लिए प्रयासरत हैं। ज्यादातर एयरलाइंस के प्रयास यह हैं कि वे सुबह 7 से 9 और शाम 7 से रात 9 बजे के बीच में फ्लाइट संचालित कर सकें। फिलहाल इसी समय पर ज्यादा फ्लाइट का संचालन होता है। जयपुर से वर्तमान में सुबह 2 घंटे की अवधि में 13 फ्लाइट और शाम को 2 घंटे की अवधि में 9 फ्लाइट संचालित होती हैं। एयरलाइंस सुबह-शाम की इसी अवधि में और ज्यादा फ्लाइट्स जोड़ना चाहती हैं, लेकिन एयरलाइंस के सामने परेशानी तब बढ़ जाती है। जब जयपुर एयरपोर्ट पर इससे ज्यादा फ्लाइट्स को एक ही समय में ऑपरेट करने की क्षमता नहीं होती है। दरअसल जयपुर एयरपोर्ट पर रनवे की क्षमता तो काफी अच्छी है।
इसलिए रहता है रनवे ऑक्युपाईड
- 11500 फीट लम्बे इस रनवे पर बड़े जम्बो जेट विमानों का संचालन भी आसानी से हो सकता है, लेकिन रनवे के समानांतर टैक्सी ट्रैक नहीं बना हुआ है। इस वजह से जब एक फ्लाइट टेक ऑफ के लिए रनवे के अंतिम छोर तक पहुंचती है, तो उसे रनवे पर होकर ही जाना होता है। जिसके चलते 3 से 4 मिनट की अवधि के लिए रनवे पर दूसरे विमान की लैंडिंग नहीं हो पाती है। इस कारण रनवे ऑक्युपाईड रहता है।
ये फायदा होगा टैक्सी-वे से
- अभी कोई फ्लाइट लैंड करती है तो उसे लगभग इस प्रक्रिया में 5-6 मिनट का समय लगता है। ऐसे में अगर किसी दूसरी फ्लाइट को टेक-ऑफ करना होता है तो उसे उस फ्लाइट की लैंडिंग की प्रक्रिया के पूरा होने तक का इंतजार करना पड़ता है। जबकि टैक्सी-वे के बनने के बाद पार्किंग-वे में लगे हुए विमान जिन्हें टेक ऑफ करना है वे सीधे टैक्सी-वे के जरिए रन-वे पर आकर उड़ान भर सकेंगे। इसी प्रकार लैंड करने वाले विमान भी रन-वे से टैक्सी ट्रैक पर आकर सीधे पार्किंग-वे में चले जाएंगे। इससे प्रति विमान 3-4 मिनट बचेंगे जिससे एयरपोर्ट पर एक घंटे में लगभग 16 विमान मूव कर सकेंगे।
अगले माह तक पूरा होगा टैक्सी ट्रैक का निर्माण
- रन-वे के समानांतर बनाया जा रहा है टैक्सी ट्रैक
- फिलहाल 65 फीसदी लंबाई में बनेगा
- 35 फीसदी निर्माण के लिए अभी जमीन उपलब्ध नहीं
- टैक्सी ट्रैक बनने से रनवे नहीं होगा ऑक्युपाईड
- प्रत्येक विमान के टेक ऑफ में 3 से 4 मिनट बचेंगे
- अभी 1 घंटे में अधिकतम 10 से 12 विमान होते संचालित
- 65 फीसदी टैक्सी ट्रैक बनने से क्षमता होगी 16 विमान की
- यह कार्य पूरा हो जाएगा दिसंबर के अंत तक
- पूरा टैक्सी ट्रैक बनने पर 20 से 22 विमान हो सकेंगे संचालित
वर्जन
- एयरपोर्ट निदेशक जेएस बलहारा ने बताया कि टैक्सी ट्रैक के बचे हुए 35 फीसदी कार्य को पूरा करने के लिए एयरपोर्ट प्रशासन को 14 एकड़ जमीन की दरकार है। इस बारे में जमीन अधिग्रहण के लिए एयरपोर्ट प्रशासन ने राज्य सरकार को अवगत करा दिया है। यह जमीन मिलने पर टैक्सी ट्रैक का निर्माण रनवे के जगतपुरा वाले अंतिम छोर तक पूरा कर लिया जाएगा। यह कार्य भी अगले साल के मध्य तक पूरा होने की उम्मीद है। गौरतलब है कि टैक्सी ट्रैक का निर्माण कार्य पूरा होने पर न केवल एक घंटे में अधिक विमान संचालित हो सकेंगे। बल्कि यात्रियों के समय की बचत भी हो सकेगी क्योंकि टैक्सी ट्रैक बनने के बाद फ्लाइट्स को लैंडिंग व टेक ऑफ के दौरान कम समय के लिए इंतजार करना पड़ेगा।
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