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सेवारत डॉक्टरों के इस्तीफे के बाद चिकित्सा व्यवस्था चरमराई, मरीज बिना इलाज के घर लोटे

सेवारत डॉक्टरों के इस्तीफे के बाद चिकित्सा व्यवस्था चरमराई, मरीज बिना इलाज के घर लोटे

Surendra Swami | Last Modified - Nov 06, 2017, 04:58 PM IST


जयपुर। प्रदेश में सेवारत डॉक्टरों के इस्तीफे के बाद दो हजार से अधिक अस्पतालों के हालात बिगड़ गए। प्राथमिक व सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र, जिला व उपजिला अस्पतालों में डॉक्टर के नहीं होने के कारण मरीजों को बिना इलाज के लौटना पड़ा। डॉक्टरों के नहीं होने से मौसमी बीमारियों से पीड़ित मरीजों को न तो दवा मिली और ना ही जांच हो सकी। जानिए मरीजों की परेशानी के बारे में ....
- मरीजों को मजबूरन निजी अस्पतालों की शरण लेनी पड़ी। शहर की 150 पीएचसी व सीएचसी पर आने वाले मरीजों को भारी दिक्कत का सामना करना पड़ा। हालांकि सरकार का दावा है कि हमने मरीजों के इलाज के लिए वैकल्पिक इंतजाम कर दिए हैं।
- चिकित्सा विभाग के निदेशक डॉ. वी.के. माथुर का कहना है कि हमने आयुष डॉक्टर, प्रोबेशन पीरियड पर काम कर रहे डॉक्टरों को लगा दिया है। अखिल राजस्थान सेवारत चिकित्सक संघ के अध्यक्ष डॉ. अजय चौधरी के अनुसार पिछले तीन माह से 33 मांगों के लिए गांधीगिरी से आंदोलन कर रहे हैं फिर भी सरकार से बा-बार वार्ता के बाद बेनतीजा रही है।
- इधर, जयपुर एसोसिएशन ऑफ रेजिडेंट डॉक्टर्स ने भी सेवारत डॉक्टरों का समर्थन दिया है। जार्ड के अध्यक्ष डॉ. रवि जाखड़ ने बताया कि यदि सरकार ने जल्द मांगे नहीं मानीं तो रेजिडेंट डॉक्टर्स ने भी अनिश्चतकालीन अवकाश पर जाने की चेतावनी दी है।
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