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नई व्यवस्था : रेलवे बोर्ड ने बढ़ाए अधिकार, निर्माण की आवश्यकता होने पर 50 लाख के काम भी करवा सकेंगे अधिकारी

नई व्यवस्था : रेलवे बोर्ड ने बढ़ाए अधिकार, निर्माण की आवश्यकता होने पर 50 लाख के काम भी करवा सकेंगे अधिकारी

Shivang Chaturvedi | Last Modified - Nov 05, 2017, 04:43 PM IST


जयपुर। ट्रेनों के संचालन में आए दिन होने वाली गड़बड़ियों को तुरंत दुरुस्त करने के लिए रेलवे बोर्ड ने डीआरएम, ब्रांच ऑफिसर्स सहित अन्य अधिकारियों के अधिकार बढ़ा दिए हैं। अधिकारी अब ट्रेन के कोच में गड़बड़ी होने पर संबंधित विभाग के ब्रांच ऑफिसर्स पांच लाख तक के मरम्मत के काम करवा सकेंगे। अभी तक अधिकारी केवल दो लाख के ही काम करवा सकते थे। जानिए और इस बारे में ....
- डीआरएम को दो और अधिकार दिए गए हैं। वे पोस्ट क्रिएशन कर सकेंगे। सेफ्टी के पद आवश्यकतानुसार सृजित कर सकेंगे। वहीं निर्माण कार्य की आवश्यकता होने पर 50 लाख रुपए तक के काम करवा सकेंगे।
- इंडियन रेलवे में पिछले दिनों लगातार हुई रेल दुर्घटनाओं रेलमंत्री के बदलने के बाद नए रेल मंत्री ने रेलवे के कामकाज की समीक्षा की। रेलवे बोर्ड के अधिकारियों कर्मचारियों के प्रतिनिधियों के साथ मीटिंग की।
- मीटिंग के दौरान ये बात सामने आईं कि सेफ्टी से जुड़े पद रिक्त हैं। ट्रैक की मरम्मत के काम के लिए मांगने पर ब्लॉक नहीं मिल पाता। ट्रैक दुरुस्त करने के तहत रेल पटरी बदलने की जरूरत है। बदलने के लिए समय पर रेल पटरी नहीं मिल पाती क्योंकि नई रेल पटरियां देश में चल रहे नई रेल लाइन प्रोजेक्ट्स के लिए दी जाती हैं।
- इन स्थितियों को देखते हुए रेल मंत्री पीयूष गोयल ने जीएम, डीआरएम ब्रांच ऑफिसर्स को और अधिकार दिए। साथ ही कहा कि पहले खराब रेल पटरी को बदलने के लिए नई पटरी भेजी जाए। रेलवे अधिकारियों ने बताया कि रेलवे बोर्ड ने डीआरएम, ब्रांच ऑफिसर्स के अधिकार बढ़ाने से ट्रैक को बेहतर रखने में मदद मिलेगी। इससे सेफ्टी भी पहले की तुलना में बेहतर होगी।
अधिकारी आसानी से काम करवा सकेंगे
- रेलवे बोर्ड द्वारा डीआरएम ब्रांच ऑफिसर्स के अधिकार बढ़ने से उन्हें काम करने में आसानी होगी। पद सृजन का अधिकार होने पर डीआरएम प्रस्ताव तैयार कर मंडल स्तर पर ही प्रस्ताव पारित कर एकाउंट्स से वैट करवाकर तुरंत पद सृजित कर सकेंगे। उन्हें प्रस्ताव मुख्यालय भेजने उसकी मंजूरी का इंतजार नहीं करना होगा। कई बार प्रस्ताव पारित होने में सालों लग जाते हैं। मुख्यालय क्यूरी करता रहता है। मंडल जवाब भेजता रहता है। काम अटका रहता है, लेकिन अब संभावना है कि ऐसा नहीं होगा - विनोद मेहता, महामंत्री, यूपीआरएमएस
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