राजस्थान / पाकिस्तानी विमान एफ-16 को मार गिराने वाले अभिनंदन की शौर्यगाथा पढ़ेंगे बच्चे

Dainik Bhaskar

May 17, 2019, 11:56 AM IST



Children will read Abhinandan's Gallantry in school
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Children will read Abhinandan's Gallantry in school

  • स्कूली पाठ्यक्रम में शामिल हुई एयर स्ट्राइक, राज्यवर्धन और भवानी सिंह को भी सिलेबस में दी जगह
  • राष्ट्रीय सुरक्षा और शौर्य परंपरा नाम के चैप्टर में राजस्थान के कई वीरों की गाथाएं पढ़ाई जाएंगी

जयपुर. एयर स्ट्राइक और सर्जिकल स्ट्राइक को लेकर भले ही कांग्रेस के कुछ नेता सबूत मांगते हों, लेकिन राजस्थान सरकार ने एयर स्ट्राइक की शौर्यगाथा को सिलेबस में शामिल किया है। एयर स्ट्राइक के जवाब में भारतीय सीमा में घुसे पाक विमान को मार गिराने वाले अभिनंदन की वीरता का किस्सा बच्चों का पढ़ाया जाएगा। नवीं में राष्ट्रीय सुरक्षा और शौर्य परंपरा नाम का चैप्टर जोड़ते हुए राजस्थान के कई वीरों की गाथाएं पढ़ाई जाएंगी। ओलंपिक पदक जीतने वाले कर्नल राज्यवर्धन सिंह और महावीर चक्र विजेता जयपुर के ब्रिगेडियर भवानी सिंह को भी जगह दी गई है।

 

इस कक्षा की सामाजिक विज्ञान में पुलवामा का जिक्र करते हुए लिखा है आतंकी हमले के बाद भारतीय वायु सेना ने 26 फरवरी 2019 को पाक सीमा में 12 मिराज-2000 लड़ाकू विमानों से बालाकोट क्षेत्र में आतंकवादी ठिकानों पर हमला बोला था। अगले ही दिन हमले की आंशका से पाकिस्तानी वायु सेना का एक लड़ाकू विमान एफ-16 भारतीय सीमा में घुस आया। इस पर कार्रवाई के लिए जांबाज पायलट विंग कमांडर अभिनंदन को भेजा गया। अभिनंदन ने मिग-21 से पाकिस्तानी लड़ाकू विमान को मार गिराया। तभी सामने के प्रहार से उनका विमान क्षतिग्रस्त हो गया और पैराशूट से कूद कर उन्होंने अपनी जान बचाई। वे गलती से पाक अधिकृत कश्मीर की जमीन पर उतर गए। उनको पाकिस्तानी सेना ने पकड़ लिया। इसके बाद जेनेवा समझौते और अंतर्राष्ट्रीय दबाव के बाद अभिनंदन को रिहा किया गया। उनकी प्रारंभिक पढ़ाई जोधपुर में हुई थी। 

 

भवानी सिंह और राज्यवर्धन भी सिलेबस में शामिल 

इस चैप्टर के भारतीय सेना द्वारा स्थापित आदर्श वाले हिस्से में शिक्षा, खेल, राजनीति, रक्षा, अंतरिक्ष और तकनीकी के क्षेत्र में सफलता के झंडे गाड़ने वाले राजस्थान के सेना के जवानों के नाम शामिल किए गए हैं। इसमें पहले नंबर पर ओलंपिक पदक विजेता ले. कर्नल राज्यवर्धन सिंह का नाम है। इसी तरह वीरता पुरस्कार प्राप्त करने वाले राजस्थान के सैनिकों में सर्वोच्च शौर्य अलंकरण परमवीर चक्र झुंझुनूं के मेजर पीरू सिंह और जोधपुर के मेजर शैतान सिंह भाटी, महावीर चक्र विजेता जयपुर के ब्रिगेडियर भवानी सिंह और बीकानेर के लेफ्टिनेंट कर्नल किशन सिंह को भी शामिल किया गया है।
 

इनकी वीरता के किस्से भी शामिल

{सीकर के राजपूताना राइफल्स के दिगेंद्र कुमार ने अदम्य साहस का परिचय देते हुए पाकिस्तानी मेजर अनवर का सर काट कर तिरंगा फहराया था। 
{कारगिल के युद्ध में कोटा के स्क्वाड्रन लीडर अजय आहूजा ने शौर्य का परिचय दिया था। मरणोंपरांत उनको वीर चक्र से सम्मानित किया गया। 
{झुंझुनूं की मोहाना पहली बार भारतीय वायुसेना में बतौर लड़ाकू विमान पायलट के रूप में शामिल हुई।
 

^ हम शिक्षा में कभी राजनीति नहीं करते। हमने वीर शहीदों की गाथाएं पाठ्यक्रम में शामिल करने का वादा निभाया है। अभिनंदन की शौर्य गाथा के साथ साथ राजस्थान के कई शूरवीरों को भी सिलेबस में शामिल किया गया है ताकि बच्चे उनसे प्रेरणा ले सके। - गोविंद सिंह डोटासरा, शिक्षा राज्यमंत्री

 

जाैहर के मुद्दे पर दाे मंत्री आमने-सामने

 

जाैहर दिखा बच्चाें के दिमाग पर क्या असर डालना चाहते है : डाेटासरा 

शिक्षा राज्य मंत्री स्वतंत्र प्रभार गोविंद सिंह डोटासरा का कहना है कि 21 वीं सदी में अपने बच्चों को हम क्या बताना चाहते है। अबोध बच्चों के दिमाग पर यह डालना चाहते है कि महिलाएं केवल आग में जलने के लिए होती है। मेरा मानना है कि यह गलत है। आज हमें चाहिए कि हमारी बेटियां कल्पना चावला, सानिया मिर्जा जैसी वैज्ञानिक, खिलाड़ी, अफसर बने। प्रेरणा वाली स्टाेरी पढ़े अाैर देश और दुनिया नाम राेशन करे। सती प्रथा पर पहले से ही बैन है। जौहर के दृश्य को हटाकर चित्तौड़गढ़ के किले के दृश्य को दिखाया गया है। यह क्या गर्व करने वाला दृश्य नहीं है।

 

जाैहर बलिदान का इतिहास है, जिसे देखने लोग आते हैं : खाचरियावास

परिवहन मंत्री प्रताप सिंह खाचरियावास का कहना है कि इतिहास काे कांग्रेस-भाजपा में नहीं बांटा जा सकता। जाैहर भारतीय इतिहास का अभिन्न हिस्सा हैं, जिसे काेई मिटा नहीं सकता। जाैहर और सती प्रथा काे अलग-अलग नजरिए से देखा जाना चाहिए। चित्ताैड़गढ़ की हर जाति और धर्म की  की 16 हजार महिलाओं ने त्याग, बलिदान का परिचय देते हुए बलिदान किया था। इसे देखने के लिए अाज भी दुनिया भर के पर्यटक आते है। इतिहास के इस जानकारी काे काेई भी व्यक्ति नजर अंदाज नहीं कर सकता।

 

एक माह में ही बदल गया इतिहास

प्रदेश में स्कूली पाठ्यक्रम में बदलाव के बाद सियासत गरमाई हुई है। भाजपा और कांग्रेस आमने-सामने है और एक दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप का दाैर चल रहा है। माैजूदा मामला सावरकर की जीवनी काे लेकर छिड़ा है। भाजपा सरकार सावरकर काे वीर पढ़ाती रही जबकि कांग्रेस की नजर में वे वीर न हाेकर कायर थे। इतिहास बदलने काे लेकर चल रहे विवाद के बीच भास्कर ने पड़ताल की ताे सामने अाया कि राज्य में कांग्रेस की सरकार बदलने के साथ ही स्कूली शिक्षा में पाठ्यक्रम बदलाव की सुगबुगाहट शुरू हाे गई थी। लेकिन इसकाे अंजाम दिया गया 12 फरवरी से 10 मार्च के बीच महज एक महीने में। लाेकसभा चुनाव की अाचार संहिता लगने से पहले ही कांग्रेस सरकार ने सावरकर की जीवनी को लेकर इतिहास बदल दिया।

 

सावरकर के नाम से वीर हटाकर अंग्रेजों से दया की याचना करने वाला बताया

शिक्षा राज्यमंत्री गोविंद सिंह डोटासरा ने 12 फरवरी को पहली से 8वीं तक और 9वीं से 12वीं तक की पुस्तकों की समीक्षा के लिए कमेटी बनाई थी। कमेटी को 20 फरवरी तक रिपोर्ट देने को कहा गया था। लेकिन बाद में कमेटी ने इस काम के लिए और समय मांग लिया। कमेटी ने सिलेबस की समीक्षा के दौरान कई तथ्य जोड़ने और कई तथ्य हटाने की एक रिपोर्ट बनाई। इसमें वीर सावरकर नाम से वीर शब्द हटाने और जेल की यातनाओं से परेशान होकर ब्रिटिश सरकार के पास 4 बार दया याचिका भेजने वाला बताया गया। यह तथ्य नया जोड़ दिया गया।

 

इसी प्रकार आठवीं की अंग्रेजी की किताब के कवर पेज से जौहर का फोटो हटा दिया गया। नवीं कक्षा में राष्ट्रीय सुरक्षा और शौर्य परंपरा और विधिक जागरुकता के दो नए चैप्टर जोड़ दिए गए। यही नहीं गणित की किताबों में भी बदलाव का खाका तैयार कर लिया गया। लोकसभा चुनाव की आचार संहिता सामने देख मार्च में सिलेबस में बदलाव की मंजूरी दे दी गई। प्रदेश में 10 मार्च को आचार संहिता लग गई थी। पाठ्यपुस्तक मंडल को बदली हुई किताबों की सीडी अप्रैल मध्य में प्राप्त हुई और इसको प्रिंटिंग के लिए भिजवा दी गई।

 

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