लापरवाही / होटलों की जांच के लिए बनी कमेटी को 10 दिन में रिपोर्ट देनी थी, 9 महीने में 1 मीटिंग तक नहीं



राजस्थान का एक होटल। राजस्थान का एक होटल।
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राजस्थान का एक होटल।राजस्थान का एक होटल।

  • बजट क्लास पर्यटकों को सस्ती दरों पर भरोसे की सेवा देने के लिए शुरू किए गए होटलों की हालत बेहद खराब

Dainik Bhaskar

Oct 11, 2019, 12:43 AM IST

जयपुर. जयपुर, सवाईमाधोपुर, उदयपुर, पुष्कर, अलवर-सिलिसेड़ आदि सभी जगह प्राइम लोकेशन पर बनी होटलों की हालत खराब होती जा रही है। जबकि पर्यटन विकास निगम ने इन्हें बजट क्लास पर्यटकों को सस्ती दरों पर भरोसे की सर्विस उपलब्ध कराने के लिए शुरू किया था। टूरिज्म मंत्री के पदभार संभालने के साथ ही जब उन तक ऐसी शिकायतें पहुंचीं तो हालात सुधारने के लिए आईएएस समेत 7 सदस्यीय ‘हायर लेवल कमेटी’ बनाई। जनवरी 2019 में बनी कमेटी को 10 दिन में रिपोर्ट सौंपनी थी, लेकिन 9 महीने बाद भी एक भी मीटिंग तक नहीं हुई है। मंत्री विश्वेंद्र सिंह की पहल पर कमेटी के आदेश आरटीडीसी अध्यक्ष श्रेया गुहा ने जारी किए थे। 

 

आईएएस एमडी सहित 7 लोग थे कमेटी में, पहले मुख्य सचिव भी निर्देश दे चुके

इस हाईलेवल कमेटी में आरटीडीसी के प्रबंध निदेशक (आईएएस), कार्यकारी निदेशक वित्त और कार्य के अलावा कर्मचारी यूनियन के अध्यक्ष, महामंत्री और उपाध्यक्ष को भी शामिल किया था। जिन्होंने अभी तक कुछ नहीं किया। हालात ऐसे हैं कि निगम की यूनिटों के खराब हालात पर इससे पहले मुख्य सचिव भी कर्मचारी यूनियन के सुझावों पर अमल करने को कह चुके, लेकिन सुनवाई नहीं हुई।

 

इसलिए जरूरी हैं हालात सुधारना, क्योंकि 29 होटल-मोटल खस्ताहाल, पर्यटक परेशान

राजस्थान में आने वाले पर्यटकों को बजट क्लास होटल मुहैया कराना आरटीडीसी का उद्देश्य है। ताकि आसपास का बाजार भी नियंत्रित रहे, अन्यथा निजी होटलों का बोलबाला होगा। मसलन बहरोड होटल के बंद होने से आसपास ढाबों की चाय की कीमत आरटीडीसी से ज्यादा हो गई। हालात यह है कि आरटीडीसी की 29 यूनिट बुरी तरह फेल पड़ी है। यहां सर्विस को लेकर लगातार शिकायतें हैं। ज्यादातर में बेड, टायलेट, एसी के हालात खराब हो रहे हैं, ठेके के कर्मचारी लो पगार पर रखे हैं, जिससे सर्विस खराब हो रही है।

 

पर्यटन मंत्री की भी नहीं सुन रहे अधिकारी
 नई सरकार और पर्यटन मंत्री के आने के बाद आरटीडीसी के हालात सुधारने की उम्मीद जगी थी। हकीकत बयां करने पर मंत्री ने जिस कमेटी का गठन कराया, उसने कुछ नहीं किया। हम दर्जनों पत्र विभाग को लिखे हैं, लेकिन कोई सुनवाई नहीं। अब पर्यटन मंत्री को मिलते हैं, तो वो कमेटी की बात कहते हैं। पर आरटीडीसी के अधिकारी और कमेटी सदस्य हैं कि पर्यटन मंत्री के निर्देश भी मानने को तैयार नहीं। 
तेजसिंह राठौड़, अध्यक्ष, आरटीडीसी कर्मचारी यूनि., कमेटी सदस्य


 

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