जयपुर / सरकार के अध्यादेश के खिलाफ सदन में संकल्प लाई भाजपा, गफलत में कांग्रेस ने समर्थन दिया



Congress MLA opposed of his government's bill in rajasthan
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Congress MLA opposed of his government's bill in rajasthan

  • मामला समझ में आते ही कांग्रेस लॉबी में हड़कंप मचा, आनन फानन में सभापति ने फिर से प्रस्ताव पढ़कर भाजपा के संकल्प को करवाया खारिज
  • मामला अपनी ही सरकार के विधेयक के विरोध में विपक्ष के समर्थन का बन गया था

 

Dainik Bhaskar

Feb 14, 2019, 12:30 AM IST

जयपुर. विधानसभा में बुधवार को कांग्रेस के लिए उस समय अजीब स्थिति बन गई जब सरकार के एक संशोधन बिल पर वोट करवाने के लिए भाजपा की ओर से पेश किए गए संकल्प को कांग्रेस सदस्यों ने समर्थन दे दिया। सदन में सहकारिता संशोधन विधेयक पर बहस चल रही थी। यह संशोधन विधेयक इसलिए लाया गया ताकि सहकारी सोसायटीज में पदाधिकारी विधायकों को अपनी सदस्यता नहीं गंवानी पड़े।

 

दरअसल भाजपा ने 2016 में सहकारी सोसायटी विधेयक में यह प्रावधान किया था कि यदि किसी सहकारी सोसायटी का कोई सदस्य , सांसद, मंत्री या विधायक निर्वाचित होता है तो उसे या तो सोसायटी का पद छोड़ना होगा या फिर मंत्री, सांसदी और विधायकी छोड़नी होगी। कांग्रेस ने 26 दिसंबर 2018 को अध्यादेश के जरिए भाजपा के इस विधेयक में यह संशोधन कर दिया कि विधायक रहते हुए भी कोई सदस्य सहकारी सोसायटी का सदस्य रह सकता है।  

 

सदन में इस अध्यादेश के लिए संशोधन विधेयक लाया गया था। भाजपा की तरफ से उपनेता राजेंद्र राठौड़ ने सदन में इस अध्यादेश को अस्वीकार करने का संकल्प रखा और विधेयक पर वोट डिविजन करवाने की मांग की। बिल पर बहस पूरी होने के बाद सभापति राजेंद्र पारीक ने सदन पूछा कि जो इस अध्यादेश को अस्वीकार करने के पक्ष में हों वे हां कहें।

 

कांग्रेस के विधायकों को इस पर तेज आवाज में ना कहना था लेकिन इसकी जगह वे जोर-जोर से हां कहने लगे। भाजपा की तरफ से नेता प्रतिपक्ष गुलाबचंद कटारिया व उप नेता राजेंद्र राठौड़ ने तुरंत मामले को पकड़ा और सभापति राजेंद्र पारीक से बिल पर वोट डिविजन करवाने की मांग कर डाली।

 

माजरा समझ में आते ही कांग्रेस के खेमे में हड़कंप मच गया। दरअसल यह मामला अपनी ही सरकार के विधेयक के विरोध में विपक्ष के समर्थन का बन गया था। इधर अपने चैंबर में बैठे विधानसभा अध्यक्ष को जब इस माजरे का पता चला तो वे सदन की तरफ दौड़े। लेकिन तब तक भाजपा विधायक वेल में उतर कर वोट डिविजन के लिए नारेबाजी करने लगे। सभापति राजेंद्र पारीक ने स्थिति को संभालने की काेशिश में भाजपा विधायकों से कहा कि उन्होंने कांग्रेस के सदस्यों की हां नहीं बल्कि ना ही सुनी है।

 

इस पर नेता प्रतिपक्ष गुलाबचंद कटारिया और उप नेता राजेंद्र  राठौड़ विधानसभा के रिकॉर्ड से कार्यवाही की रिकॉर्डिंग मंगवाने पर अड़ गए। आखिर में समझौता हो गया और भाजपा विधायक अपनी सीटों पर चले गए। इसके बाद संशोधन विधेयक पर भाजपा के संकल्प को ध्वनिमत से खारिज कर विधेयक पारित करवा लिया  गया।  
 

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