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मलेरिया से मौत पर विवाद... चिकित्सा विभाग का दावा एक भी मौत नहीं, एसएमएस बता रहा-युवक की मौत

राष्ट्रीय मलेरिया उन्मूलन कार्यक्रम की खामियों के खुलने का खौफ तो देखिए...राज्य में मलेरिया से इस साल एक मौत हो...

Dainik Bhaskar

Sep 12, 2018, 04:11 AM IST
Jaipur - मलेरिया से मौत पर विवाद... चिकित्सा विभाग का दावा एक भी मौत नहीं, एसएमएस बता रहा-युवक की मौत
राष्ट्रीय मलेरिया उन्मूलन कार्यक्रम की खामियों के खुलने का खौफ तो देखिए...राज्य में मलेरिया से इस साल एक मौत हो चुकी है, लेकिन चिकित्सा विभाग ढाई महीने बाद भी अपने आंकड़ों में इस मौत को शामिल ही नहीं कर रहा। एसएमएस अस्पताल की मेडिसन यूनिट में भर्ती सवाईमाधोपुर निवासी 17 वर्षीय युवक की मौत का कारण अस्पताल के रिकॉर्ड में बाकायदा मलेरिया पॉजीटिव होना बताया गया है। अस्पताल प्रशासन भी इस बात की पुष्टि कर रहा है कि इस युवक की मौत मलेरिया से ही हुई है, इसके बावजूद चिकित्सा विभाग के अधिकारी दावा कर रहे हैं कि राज्य में इस साल मलेरिया से एक भी मौत नहीं हुई है और विभाग के आधिकारिक आंकड़े भी 5 सितंबर तक कोई मौत नहीं होना दर्शा रहे हैं। दरअसल, राष्ट्रीय मलेरिया उन्मूलन कार्यक्रम फरवरी 2016 से शुरू हुआ था। उस वर्ष में मलेरिया से पांच मौत हुई थीं, लेकिन अगले साल 2017 में राज्य में मलेरिया से एक भी मौत नहीं हुई और मलेरिया पॉजिटिव केसों में भी काफी कमी आ गई थी। इस सुधरी स्थिति को राष्ट्रीय मलेरिया उन्मूलन कार्यक्रम के तहत अपने कार्यों की सफलता बताते हुए चिकित्सा विभाग अपनी पीठ थपथपाता रहा है। जानकारों का मानना है कि इस कामयाबी पर सवाल उठने के डर से ही इस साल मलेरिया से मौत का पहला मामला सामने आने के बाद भी चिकित्सा विभाग उसे दबाने में जुटा है। हकीकत यह है कि एसएमएस अस्पताल के रिकॉर्ड के अनुसार सवाईमाधोपुर निवासी दिलखुश पुत्र श्यौदान सिंह को 21 जून 2018 को मेडिसन यूनिट 9 में भर्ती कराया गया था और दो दिन बाद 23 जून को सुबह उसकी मलेरिया (प्लाजमोडियम वाइवेक्स) से मौत गई। इसके साथ ही मरीज के मल्टीपल इंफेक्शन भी था।

बिग कंट्रोवर्सी

राष्ट्रीय मलेरिया उन्मूलन कार्यक्रम शुरू होने बाद पिछले साल राज्य में मलेरिया पॉजिटिव केस घटे और एक भी मौत नहीं थी...इस कामयाबी को कायम रखने को अब आंकड़ों का खेल

ये हैं मलेरिया के विभागीय आंकड़े

वर्ष ब्लड स्लाइड केसेज मौत

2013 8909848 33139 15

2014 8810139 15118 04

2015 9062099 11796 03

2016 9756048 12741 05

2017 6603580 7838 0

2018 4841179 2340 0

क्या है राष्ट्रीय मलेरिया उन्मूलन कार्यक्रम

केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री जे.पी. नड्‌डा ने फरवरी 2016 में राजस्थान समेत देशभर में मादा एनोफिलिज मच्छर के काटने पर फैलने से रोकने, मॉनिटरिंग व पॉजिटिव मामले की पहचान कर आसपास के घरों में सर्वे कर स्प्रे जैसी गतिविधियां करने के लिए राष्ट्रीय उन्मूलन कार्यक्रम चलाया है। लक्ष्य देश को वर्ष 2030 तक मलेरिया से मुक्त करना है।

मलेरिया केसों की भी नहीं हो रही पूरी रिपोर्टिंग

अतिरिक्त मुख्य सचिव (चिकित्सा एवं स्वास्थ्य) वीनू गुप्ता की ओर पिछले दिनों मौसमी बीमारियों पर रोकथाम के लिए आयोजित बैठक में एसएमएस समेत अन्य अस्पतालों में रिपोर्टिंग ठीक तरह से नहीं होने का मामला उठा था। अकेले एसएमएस अस्पताल में 40 फीसदी आंकड़ों में ही नाम, पता व मोबाइल नंबर सही नहीं होना पाया गया।

मलेरिया से इस साल एक भी मौत नहीं : चिकित्सा विभाग

मलेरिया से एक भी मौत होने का मामला सामने नहीं आया है। उन्मूलन कार्यक्रम वर्ष -2016 से चल रहा है। हमारी एनुअल पैरासाइट इंसीडेंस (एपीआई) एक से भी कम है। मलेरिया व डेंगू पॉजिटिव के मामले कम है, लेकिन स्क्रब टाइफस के ज्यादा केसेज आ रहे हैं। -डॉ. रवि प्रकाश माथुर, अतिरिक्त निदेशक (ग्रामीण स्वास्थ्य)

इस साल 35 पॉजिटिव और एक मौत : एसएमएस प्रशासन

इस साल अब तक मलेरिया के 35 पॉजिटिव में से एक की मौत हुई है। स्क्रब टाइफस के 295 में से 6 तथा डेंगू से 456 में से 2 की मौत हुई है। -डॉ. डी.एस. मीणा, अधीक्षक, एसएमएस अस्पताल जयपुर

ये सही है कि मलेरिया, डेंगू व स्वाइन फ्लू पॉजिटिव मरीजों के नाम, पता व मोबाइल नंबर ठीक तरह से नहीं लिखने से दिक्कत होती है। अधिकारियों को प्रोपर रिपोर्टिंग के लिए कहा है। बाहर के मरीज ठीक से नाम, पता नहीं लिखवाते हैं। -डॉ. यू.एस.अग्रवाल, प्राचार्य, एसएएमएस मेडिकल कॉलेज जयपुर

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