भास्कर खास / पेंशनर्स की दवा में करोड़ों के कमीशन का खेल; जेनरिक की जगह 600% तक महंगी दवाएं दीं

Crores commissioning game in pensioners' medicine
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Crores commissioning game in pensioners' medicine

  • चिकित्सा विभाग की जांच रिपोर्ट में खुलासा, उपभोक्ता भंडार की दुकानों से गड़बड़ी
  • फार्मासिस्ट, उपभोक्ता संघ के कुछ पदाधिकारियों को भी फायदा पहुंचाने के लिए ऐसा किया

दैनिक भास्कर

Jul 21, 2019, 03:44 AM IST

जयपुर (संदीप शर्मा). एसएमएस अस्पताल की लाइफ लाइन की तरह ही उपभोक्ता भंडार की मेडिकल दुकानों पर कमीशन का जबरदस्त खेल चला है। मरीजों को जेनेरिक दवाओं की जगह लोकल कंपनियों की दवाएं एमआरपी पर दी गईं, जो 500% तक महंगी थीं। पेेंशनर्स को सभी जेनेरिक दवाइयां दी जानी थीं, पर सिर्फ 2% जेनरिक दवाएं ही दींं। कंपनियों, फार्मासिस्ट और उपभोक्ता संघ के कुछ पदाधिकारियों को फायदा पहुंचाने के लिए ऐसा किया गया। 


देखो सरकार! किस कंपनी की कौन-सी दवाएं बेची गईं... 

  • फेरेफॉल एम, (लिकॉन हेल्थकेयर लाइनोसिस, एल्बस)
  • गाबानिप (निपोन)
  • एंटोप डीएसआर (राफिक हेल्थ केयर)
  • बायोटोर (यूनाइटेड बायोेटेक)
  • वेनोसिस (ऑल्विन)
  • मेटोनेक्स (निक्सकार्ड) 

 

नुकसान ये कि...पेंशनर्स की लिमिट जल्दी खत्म हो रही 
कंपनियों की प्रोपेगेंडा दवाई लिखे जानेे की वजह से जहां सरकार को हर साल लाखों रुपए अधिक चुकाने पड़े वहीं पेंशनर्स की डायरी में हर साल की लिमिट भी जल्दी ही खत्म होे गई। इस वजह से वे पूरी दवाइयां भी नहीं ले सके। यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है चिकित्सा विभाग की जांच रिपोर्ट में। मामले की रिपोर्ट जिला प्रशासन को भी दी गई है लेकिन अभी दोषियोें पर कार्रवाई होना बाकी है। 

 

ये मनमानी...28 करोड़ में 1.5 करोड़ की ही जेनरिक दवा दी 
पेंशनर्स को 28 करोड़ से अधिक की दवाइयां दी गईं, जिनमें से डेढ़ करोड़ रु. सेे भी कम की जेनेरिक दी गईं। यानी करीब 26 करोड़ की प्रोपेेगेंडा दवाइयां पेंशनर्स को बेच दी गईं। तय है कि इतने में से यदि 40 प्रतिशत कमीशन भी बचाया गया तो यह रकम 6.5 करोड़ रु. होती है। यदि मरीजों को जेनरिक दी जाती तो वे इतनी रकम में और कई सालों तक दवा ले सकते थे। वहीं सरकार को भी कम पैसे अदा करने पड़ते। 


सवाल ये कि...कमेटी को पता था तो कुछ किया क्यों नहीं? 
इस मामले की जांच होने के बाद से ही उपभोक्ता भंडार में दवाइयां मिलनी बंद हो गई हैं। पेंशनर्स परेशान हो रहे हैं। सवाल यह कि जब दवाई लेने के लिए बनी कमेटी को सब कुछ पता था तो कड़े कदम क्यों नहीं उठाए गए। जबकि दवाओं की खरीद की अनुमति और कौन सी दवाएं आएंगी, यह कमेटी ही तय कर रही थी। ऐसे में जांच कमेटी की कार्यप्रणाली पर भी सवालिया निशान लग गया है।

 

अब जिम्मेदार बोले...अनियमितताएं हैं, जल्द कार्रवाई करेंगे 
चिकित्सा विभाग की रिपोर्ट के बारे में जानकारी हमें मिल गई है। काफी अनियमितताएं सामने आई हैं। हम जल्द कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू करेंगे। साथ ही मरीजों को पूरी दवाइयां मिलें, इसके लिए पूरी व्यवस्था करेंगे। - अजय फाटक, ड्रग कंट्रोलर, जयपुर

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