ग्राउंड रिपोर्ट / जयपुर ग्रामीण सीट पर बढ़ी हुई है दोनों ओलिम्पियन की हार्ट बीट



dainik bhaskar ground report from jaipur rural lok sabha seat
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dainik bhaskar ground report from jaipur rural lok sabha seat

  • मोदी का अंडर करंट तेज, मगर जाति गठबंधन के कारण राज्यवर्धन की सभाओं में जोश कम
  • गुर्जरों में नाराजगी ‘युवा सीएम नहीं तो युवा पीएम भी नहीं’ कांग्रेस को नुकसान संभव

Dainik Bhaskar

May 03, 2019, 03:35 AM IST

देश के दो ओलिम्पियन कर्नल राज्यवर्धन सिंह राठौड़ और डाॅ. कृष्णा पूनिया जयपुर ग्रामीण लोकसभा सीट पर राजनीतिक मुकाबला कर रहे है। भाजपा के राज्यवर्धन सिंह केंद्र में मंत्री है और कृष्णा पूनिया सार्दुलपुर से कांग्रेस की विधायक। दोनों ही ‘एमपी-मेडल’ जीतने की जोर आजमाइश कर रहे हैं। रोचक यह है कि इन खिलाड़ियों की मेहनत की बजाय यह मेडल जाट-गुर्जर-यादव की तिकड़ी के हाथ में है, जिसने दोनों की धड़कनें बढ़ा रखी है। हालांकि राज्यवर्धन सिंह अपने काम और मोदी के नाम पर वोट मांग रहे हैं।  


राजस्थान की हॉट सीट पर हमने एक दिन कृष्णा पूनिया के साथ झोंटवाड़ा विधानसभा में बिताया। वह सुबह जल्दी उठती हैं और चाय-नाश्ता तैयार करती हैं। डाइनिंग टेबल पर ही पति के साथ दौरों पर डिस्कस होता है। उनके दौरे की अगुवाई मंत्री लालचंद कटारिया के पास है। बसेड़ी गांव की सभा में जैसे ही  एक ग्रामीण ने पटवारी को हटाने का उलाहना दिया मंत्री भड़क गए ,तब कृष्णा ने बात संभाली कि मंत्रीजी चाहते हैं कि ग्रामीण कॉलेज, अस्पताल व हाई-वे जैसी मांग रखे।  बाहरी होने के मुद्दे को कृष्णा ने खत्म कर दिया, वह कहती है कि बेटियां कब घर में रहती है। 


भाजपा प्रत्याशी राज्यवर्धन सिंह राठौड़ सुबह जल्दी उठते हैं,  एक्सरसाइज और नाश्ता कर तय समय पर घर से निकल जाते हैं। सुबह आठ बजे वह ड्योढ़ी गांव की पहली सभा में पहुंच गए। भैंसलाना के कन्हैयालाल ब्राह्मण व मांगीलाल सैनी कहते हैं कि राज्यवर्धनसिंह ने जानवरों का अस्पताल बनाया, रेगर धर्मशाला व श्मशान भूमि का काम कराया। सड़कें भी बनवाई है, यहां राज्यवर्धन सिंह को काम के बूते वोट मिलेंगे। राज्यवर्धन  मोदी की मजबूत सरकार के नाम पर वोट मांग रहे हैं। सिनोदिया गांव में राज्यवर्धन सिंह उज्ज्वला योजना का गुणगान कर रहे थे तभी एक महिला बोली कि मुझे तो गैस टंकी नहीं मिली। 


राज्यवर्धन ने युवाओं के लिए सैन्य कैंप लगाए। खेलों को बढ़ावा देने के लिए पंचायत स्तर पर पैसा खर्च किया है, रेलों का ठहराव भी कराया है। वे गांव-गांव में किसान कर्जमाफी की भी पोल खोलते हैं कि शाहपुरा के 7 किसानों की जमीन नीलाम हो गई क्योंकि उन्होंने कर्ज नहीं चुकाया था। अपने काम और मोदी के नाम पर उन्हें जबर्दस्त समर्थन मिल रहा है इसलिए वे कृष्णा से ज्यादा मजबूत स्थिति में  हैं। 


खिलाड़ी होने के कारण दोनों प्रत्याशियों में थकान नजर नहीं आती है। कृष्णा रोज मिल्क पीकर तरोताजा होती है और राज्यवर्धन दोपहर में  कार्यकर्ताओं के साथ पूड़ी-सब्जी खाकर एनर्जी जुटाते हैं। दोनों दिन  में 12 से 15 घंटे तक प्रचार करते हैं। लंच टाइम में वे मीडिया से भी बात करने का समय निकालते हैं। लोग कृष्णा से उनका चिरपरिचत डाॅयलाग ‘या छोरी तो लक्की छै- या की जीत पक्की छै’ सुनाने की फरमाइश करते हैं। राज्यवर्धन सिंह को हर गांव में साफा बंधवाया जाता है, साफा बांधने की उनकी स्पीड देखने लायक होती है। 

 

हॉट सीट क्यों?


{दो अंतराष्ट्रीय खिलाड़ियों का पॉलिटिकल मैच हो रहा है, दोनों देश के गौरव। 
{चेहरा कृष्णा पूनिया है, मगर चुनाव कांग्रेस के मंत्री कटारिया और पांच विधायक लड़ रहे हैं।
{राज्यवर्धन सेना में कर्नल थे इसलिए मोदी का राष्ट्रवाद लोगों को सीधे कनेक्ट कर रहा है। 
{यहां जाट और गुर्जर बराबर हैं इसलिए सचिन पायलट फैक्टर निर्णायक साबित होने वाला है।

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