इंटरव्यू / मैंने एक रुपया नहीं लिया, ये काम भाजपा सरकार में होता था, घूस लेने के आरोप पर प्रमोद जैन भाया



Dainik Bhaskar's interview with Mines Minister Pramod Jain Bhaya
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Dainik Bhaskar's interview with Mines Minister Pramod Jain Bhaya

  • मंत्री पर तबादलों में रुपए लेने का आरोप है, मंत्री प्रमोद जैन भाया से भास्कर ने पूछा घोटाले का सच क्या है
  • बोले- खान विभाग में पॉलिटिकल प्रेशर तो रहता ही है, मैं मेरिट के आधार पर ही फाइल क्लीयर करता हूं

Dainik Bhaskar

Sep 12, 2019, 01:10 AM IST

जयपुर (बाबूलाल शर्मा/ प्रेम प्रताप सिंह). भाजपा सरकार में घाेटालाें का गढ़ रहा खान विभाग कांग्रेस सरकार के आठ माह के कार्यकाल में ही घूसखाेरी काे लेकर फिर चर्चाओं में है। खान विभाग के ज्वाइंट सेक्रेटरी बीडी कुमावत के एसीबी में ट्रैप होने के बाद विभाग में भ्रष्टाचार और तबादलाें में लेन-देन के विवाद गहराए हुए हैं। खान मंत्री प्रमाेद जैन भाया के खिलाफ विभाग के ही अफसरों ने मोर्चा खोल रखा है।

 

दैनिक भास्कर ने बुधवार को उनके गांधी नगर स्थित सरकारी आवास पर विस्तार से बातचीत की। उन्हाेंने स्वीकार किया कि खान विभाग में पाॅलिटिकल प्रेशर ताे रहता ही है। भास्कर ने तबादलाें में 20 से 25 लाख रुपए लेने के आराेपाें से लेकर उन सभी मुद्दाें और विवादित मामलों पर उनसे सवाल किए, जिनका हर काेई जवाब जानना चाहता है...

 

भास्कर: अतिरिक्त निदेशक दीपक तंवर ने कांग्रेस नेता की माइंस पर 8.57 करोड़ का जुर्माना किया। क्या इसलिए एपीओ किया? 
भाया:
 मेरे आदेश के बावजूद अवैध बजरी खनन के मामले में कार्रवाई नहीं की। मौके पर नहीं गए। इसलिए उन्हें एपीओ किया गया था। जिस माइंस के खिलाफ जुर्माना दीपक तंवर ने किया, उन्होंने मेरे निर्देश के बाद ही मौके पर जाकर जांच की थी। मेरे पास कांग्रेस के ही एक जनप्रतिनिधि का फोन आया था। जहां तक झालावाड़ की 10 माइंस की एसीबी से जांच कराने का मामला है तो आज तक यह मेरे संज्ञान में नहीं लाया गया। तंवर ने ढाई महीने में ही कोटा में आतंक फैला रखा था। अफसरों को रात में क्लब में बुलाकर फाइलें साइन करते थे।

 

भास्कर: यदि ऐसा नहीं है तो छह माह के भीतर आपने दो बार 65-65 तबादले क्यों किए? जिनका स्थानांतरण मार्च में किया, उन्हें अगस्त में वापस पुराने शहर क्याें भेजा?
भाया: देखिए हमारे ऊपर भी कुछ राजनीतिक और प्रशासनिक दबाव होता है। उस दबाव के चलते कुछ तबादले पुराने स्थान पर किए गए हैं, लेकिन इसका अर्थ कतई यह नहीं निकाला जाना चाहिए कि कोई व्यक्ति पैसा देकर ही पुराने स्थान पर गया है। राजनीतिक रूप से कई सारी डिजायर आती है। मैं किस-किस का नाम लूं।

 

भास्कर: आराेप है कि आपने तबादलाें को उद्योग का रूप दे दिया है। इंजीनियरों से तबादले के लिए 20 से 25 लाख रुपये वसूले गए। मंथली अलग से तय की है? 
भाया:
 ईश्वर को साक्षी मानकर मैं कह सकता हूं कि खान विभाग में तबादले के नाम पर मैंने एक रुपया नहीं लिया। यह काम भाजपा सरकार में होता था, जिसे रोकने का मैंने काम किया। यदि कोई प्रमाणित कर दे कि मैंने तबादले के नाम पर एक पाई किसी से ली तो मैं कुछ भी करने के लिए तैयार हूं।

 

भास्कर: तबादले में तो आपने कैबिनेट मंत्री हरीश चौधरी के रिश्तेदार राजीव चौधरी को भी नहीं छोड़ा? उन्होंने एक मामले में कार्रवाई की तो उन्हें भरतपुर भेज दिया?
भाया:
 राजीव चौधरी लंबे समय से बीकानेर में तैनात थे। इसलिए उनका तबादला किया गया था, लेकिन उन्हें नहीं हटाने के लिए भी मेरे पास कोई सिफारिश नहीं आई थी। उनका तबादला मेरिट पर हुआ है।

 

भास्कर: क्या पॉलिटिकल प्रेशर ज्यादा रहता है? नेता-अफसरों की खानें सबसे ज्यादा क्याें है?

भाया: पॉलिटिकल प्रेशर रहता ही है। नेता अपने लोगों को काम कराने के लिए सिफारिश लाते ही हैं, लेकिन मैं मेरिट के आधार पर हर फाइल फाइनल करता हूं। जहां तक नेताओं-अफसरों की खानें ज्यादा हाेने का सवाल है तो इसकी मुझे कोई जानकारी नहीं है।

 

भास्कर: बजरी माफिया पनप गया है। अवैध बजरी को लेकर हत्याएं तक हो रही हैं। सरकार सस्ती और सुलभ बजरी के लिए क्या कर रही है?

भाया: भाजपा कार्यकाल में बजरी माफिया के तौर पर एक फोड़ा पनपा था, जिसने कैंसर का रूप ले लिया। कांग्रेस सरकार सत्ता में आने के बाद इसका इलाज करने में जुटी हुई है। लोगों को सस्ती बजरी मिल सके। इसके लिए खातेदारी की जमीन पर लीज देने की प्रक्रिया शुरू की है।

 

भास्कर: पिछली अशोक गहलोत सरकार में विवादों के कारण आपको मंत्री पद गंवाना पड़ा था। इस बार अाप फिर विवादों में फंस गए हैं? क्या कहेंगे?
भाया:
 कैबिनेट में कौन मंत्री रहेगा या नहीं, यह तय करना कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व और सीएम के अधिकार क्षेत्र में है। पिछली बार संगठन को लगा होगा कि कैबिनेट में मेरी जरूरत नहीं है, इसलिए बदलाव हुअा। न तो पिछली बार विवाद था और न ही इस बार विवाद है।


भास्कर: खान विभाग घोटालों को लेकर एपिक सेंटर रहा है। पिछली सरकार में घोटालों को लेकर कांग्रेस ने खूब मुद्दा उठाया। अब आप मंत्री बनकर आए तो लगा कि सुधार होगा। घूसकांड फिर हो गया?
भाया:
 भाजपा सरकार में खान विभाग का बुरा हाल था। जब से मैंने विभाग की कमान संभाली है तब से ही विभाग को पटरी पर लाने की कोशिश कर रहा हूं। जहां तक घूसकांड का सवाल है तो जो अफसर जैसा करेगा, वैसा उसे भरना पड़ेगा। ज्वाइंट सेक्रेटरी बीडी कुमावत को एसीबी ने अपनी सूचनाओं के आधार पर ट्रैप किया। मेरे हिसाब से सही कार्रवाई हुई है।

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