राजस्थान ले सबक / तमिलनाडु की लाल होती सड़कों पर विभागों ने एकसाथ किए सुधार, 2 साल में बचाई 5 हजार जिंदगियां

चेन्नई में पैदल चलने वालों से लेकर हर वाहन चालक अनुशासन की राह पर है। नियम व लेन में चलते हैं वाहन। चेन्नई में पैदल चलने वालों से लेकर हर वाहन चालक अनुशासन की राह पर है। नियम व लेन में चलते हैं वाहन।
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चेन्नई में पैदल चलने वालों से लेकर हर वाहन चालक अनुशासन की राह पर है। नियम व लेन में चलते हैं वाहन।चेन्नई में पैदल चलने वालों से लेकर हर वाहन चालक अनुशासन की राह पर है। नियम व लेन में चलते हैं वाहन।

  • सड़क हादसों में मौतों के मामले में तमिलनाडु नंबर वन, राजस्थान में भी बढ़ रहा आंकड़ा
  • भास्कर ने चेन्नई जाकर देखा- वहां ऐसा क्या किया जो राजस्थान को भी करना चाहिए

दैनिक भास्कर

Oct 05, 2019, 12:50 AM IST

कपिल भट्‌ट (चेन्नई). भारत में सड़क हादसों में मरने वालों की तादाद बढ़ रही है। 2018 में भारत में 1.49 लाख लोग मारे गए, जबकि 2017 में यह आंकड़ा 1.47 लाख था। राजस्थान के हालात भी बेहद चिंताजनक हैं। इस सबके बीच सुदूर दक्षिणी प्रांत तमिलनाडु से एक नई दिशा दिखाई देती है।

 

योजनाबद्ध तरीके से साझा कोशिश की जाए तो सड़क हादसों में होने वाली मौतों को काफी हद तक कम किया जा सकता है। हालांकि तमिलनाडु दुर्घटनाओं के लिहाज से देश के अग्रणी राज्यों में है, लेकिन वहां हादसों में मरने वालों की संख्या में तेजी से कमी आ रही है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक 2016 में तमिलनाडु में 17,218 लोग मारे गए। 2017 में यह आंकड़ा 16,157 रहा, जबकि 2018 में यह गिरकर 12,216 रह गया। इस साल के शुरू में सुप्रीम कोर्ट की ओर से सेवानिवृत्त न्यायाधीश के एस राधाकृष्णन की अध्यक्षता में सड़क सुरक्षा पर बनी कमेटी भी तमिलनाडु के प्रयासों की सराहना कर चुकी है।

 

तमिलनाडु की सफलता के सूत्र, जो राजस्थान के लिए जरूरी हैं

  • 1. तमिलनाडु के तत्कालीन डीजीपी टीके राजेंद्रन ने 2016 में सड़क सुरक्षा की कमान संभाली। रोज समीक्षा।
  • 2. जिलों के एसपी के सर्विस रिकॉर्ड में सड़क सुरक्षा के प्रयासों को दर्ज करना शुरू किया।
  • 3. किलर पॉइंट चिह्नित किए, जहां  हादसों की 40% मौतें होती हैं।
  • 4. चेन्नई से लेकर जिला व ग्रामीण इलाकों के अस्पतालों में पांच स्तरीय ट्रोमा सेंटर स्थापित किए।
  • 5.  किलर पॉइंटों के पास एम्बुलेस लगाई, पुलिस पेट्रोलिंग बढ़ाई। पुलिस-एम्बुलेंस के दुर्घटनास्थल पहुंचने के रेस्पॉन्स टाइम में शहरों में 13 मिनट व  ग्रामीण क्षेत्रों में औसतन 17 मिनट की कमी आई।
  • 6. आॅस्ट्रेलिया के मोनाश विश्वविद्यालय और दिल्ली एम्स के सहयोग से Tamilnadu Accident & Emergency Care Initiative (टाई)  कार्यक्रम चलाया। स्वास्थ्य सचिव गवर्निंग बॉडी के अध्यक्ष बने।
  • 7.108 कॉल सेंटर्स डीटीएमएफ तकनीक से जोड़े। एम्बुलेंस चालक को दुर्घटनास्थल की सटीक जानकारी मिल जाती है।
  • 8. एम्बुलेंस चालक टाई के एप से ट्रोमा सेंटर को घायल व्यक्ति की स्थिति के बारे में जानकारी दे देता है। घायल के पहुंचने से पहले ही सभी तैयारियां पूरी कर ली जाती हैं।
  • 9. जिला ट्रोमा केयर नोडल आफिसर बनाए। स्पेशलिस्ट-सुपर स्पेश्यलिस्ट डॉक्टर्स और स्टॉफ की नियुक्ति।

 

चेन्नई ने यह कर दिखाया

साल मौतें
2016 17,218
2017 16,157
2018 12,216
2019 7400

2016 से 45% तक कम
 

...राजस्थान की सड़कों पर

  • रोज 32 मौतें होती हैं
  • 11,675 मौतें हर साल राजस्थान की सड़कों पर, 5840 युवा और 2918 बच्चे
  • 11680 लोग इन हादसों में होते हैं गंभीर घायल, 60 फीसदी हो जाते हैं दिव्यांग
  • 61% हादसे ओवरस्पीड, 23% मोबाइल व 7.8% ओवर-टेकिंग के कारण
  • हादसों में जयपुर नंबर 3, दिल्ली नंबर 1

 

  • सड़क हादसों में जान बचाने में तमिलनाडु देश में अव्वल है। लेकिन अभी भी हमें बहुत काम करना है। मौतों में 2020 तक 50% तक कमी का लक्ष्य है।-जेके त्रिपाठी, डीजीपी, तमिलनाडु।
  • हादसों पर अंकुश प्राथमिकता है। जागरूकता अभियान चला रहे हैं। ट्रैफिक नियम माने जाएं तो हादसे कम होंगे। सख्ती की जरूरत है। - भूपेन्द्र सिंह यादव, डीजीपी, राजस्थान

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