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रीट-2017 (लेवल-2) के पेपर लीक मामले में अपील पर बहस पूरी, फैसला सुरक्षित

जयपुर| हाईकोर्ट ने 11 फरवरी को हुई रीट (अध्यापक पात्रता परीक्षा)-2017 (लेवल-2) में पेपर लीक व अनियमितता मामले में एकलपीठ...

Dainik Bhaskar

Sep 12, 2018, 04:10 AM IST
Jaipur - रीट-2017 (लेवल-2) के पेपर लीक मामले में अपील पर बहस पूरी, फैसला सुरक्षित
जयपुर| हाईकोर्ट ने 11 फरवरी को हुई रीट (अध्यापक पात्रता परीक्षा)-2017 (लेवल-2) में पेपर लीक व अनियमितता मामले में एकलपीठ के 31 जुलाई के याचिका खारिज करने के आदेश को चुनौती देने वाली अपील पर मंगलवार को पक्षकारों की बहस पूरी होने के बाद फैसला बाद में देना तय किया। न्यायाधीश मोहम्मद रफीक व गोवर्धन बाढ़दार की खंडपीठ ने यह अंतरिम निर्देश कमलेश कुमार मीणा की अपील पर दिया। अपील में कहा कि परीक्षा का पेपर लीक हुआ है और माध्यमिक शिक्षा बोर्ड की गोपनीयता भंग हुई है। सुबह 8:49 से 9:05 बजे के बीच पेपर वायरल हुआ जबकि परीक्षा दस बजे होनी थी। इसलिए मामले की जांच होनी चाहिए और साइबर जांच क्यों नहीं की गई। परीक्षा के जी सीरिज के पेपर में वायरल हुए पेपर में से 90 प्रश्न आए थे। राज्य-केन्द्र सरकार तक इस मामले की शिकायत की गई लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। जवाब में राज्य सरकार की ओर से कहा गया कि शिकायतकर्ता यशवंत सैनी ने शिकायत करने से ही मना किया है। ऐसे में पेपर लीक होने का कोई प्रमाण नहीं है। रीट 2017 (लेवल-2) के मामले में दायर याचिका में कहा था कि माध्यमिक शिक्षा बोर्ड की 11 फरवरी को आयोजित रीट परीक्षा में करीब दस लाख परीक्षार्थियों ने भाग लिया था। लेकिन प्रार्थी के पास परीक्षा से पहले ही व्हाट्सअप पर 9:05 मिनट पर जी सीरिज का पेपर आ गया। उसने उच्च अधिकारियों को इसकी जानकारी दी और कहा कि रीट का पेपर आउट हो गया है।

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विद्या भवन-विद्याश्रम स्कूल की याचिका सुनवाई के लिए स्वीकार

जयपुर| हाइकोर्ट ने फीस एक्ट-2016 के प्रावधानों को चुनौती देने वाली भारतीय विद्या भवन विद्याश्रम स्कूल की याचिका को सुनवाई के लिए स्वीकार करते हुए मामले में 30 अक्टूबर को सुनवाई तय की है। न्यायाधीश मोहम्मद रफीक व गोवर्धन बाढ़दार की खंडपीठ ने यह अंतरिम निर्देश मंगलवार को दिया। इससे पहले अदालत ने एक मई 2018 को भारतीय विद्या भवन के दोनों स्कूलों में फीस बढ़ोतरी के मामले में सख्त कार्रवाई नहीं करने का निर्देश दिया था। याचिका में फीस एक्ट-2016 को चुनौती देते हुए कहा कि स्कूल प्रबंधन समिति राज्य सरकार से कोई अनुदान नहीं लेती है और उस पर फीस नियामक आयोग लागू नहीं होता। इसलिए उनकी फीस को नियंत्रित नहीं किया जा सकता। सुप्रीम कोर्ट ने भी कह रखा है कि जो सरकार से अनुदान नहीं लेते हैं वे संसाधन मुहैया कराते हैं तो फीस ले सकते हैं।

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