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जयपुर. दुर्गापुरा स्थित सांघी अपार्टमेंट निवासी डायमंड व्यवसायी प्रकाश चोपड़ा के अपहरण की साजिश बदमाश एक माह से कर रहे थे। बदमाश हाेली के दूसरे दिन अपहरण करना चाह रहे थे, मगर सफल नहीं हुए। अपहरण के लिए मुक्तानंद नगर स्थित चोपड़ा के मकान पर चाबी के बहाने बुलाया। वहां किरायेदार विक्रम सिंह ने चाय पीने का आग्रह किया। तभी एक युवक मकान में गया और बाेरा लाकर सिर पर डाल दिया। इसके बाद अपहर्ताओं में आधे घंटे तक बहस हाेती रही कि फिराैती कितनी मांगी जाए? आखिर में तय हुआ जितनी भी फिराैती मांगेंगे मिलेगी। इस पर बदमाशाें ने 5 कराेड़ फिराैती मांग ली। कमिश्नरेट पुलिस ने 12 घंटे में व्यवसायी काे सकुशल बरामद किया ताे एनआरआई बेटे रवि चोपड़ा ने कहा, जयपुर पुलिस ने फाेरेन पुलिस की तरह काम किया, मुझे कमिश्नरेट पुलिस पर गर्व है।
होली के दिन अपहरण करना चाहते थे पर सफल नहीं हुए थे बदमाश
प्रकाश के बेटे रवि ने बताया कि पिताजी के हाथ मुंह बांधने के बाद विक्रम और दाेनाें साथियाें ने कार में बिठाया और शिवदासपुरा ले गए। बदमाश पिताजी काे चित्ताैड़गढ़ ले जाना चाहते थे। विक्रम ने साथियाें से कहा पांच कराेड फिराैती मांग लेना। वह वापस जयपुर जा रहा है। क्याें कि ज्याें ही परिजनाें काे पता चलेगा ताे वे सीधे घर पर आएंगे। अगर मैं नहीं मिला ताे शक उसी पर जाएगा। एक बदमाश ने पिताजी के माेबाइल से फाेन किया और पिताजी से कहलवाया कि वे चित्ताैड़गढ़ जा रहे है...दाे तीन दिन में आएंगे। इसका पता जब परिजनाें काे चला ताे कुछ गड़बड़ हाेने का अंदेशा हाे गया। कुछ देर बाद ही फिर बदमाशाें ने फाेन करवाया। इस बार फाेन बेटी ने उठाया। बदमाशाें ने पिताजी से उनका अपहरण हाेने की बात कहलवाई।
डीसीपी रात भर संभाली कमान ताे खुला मामला
डायमंड व्यवसायी के अपहरण और फिराेती की जानकारी मिलते ही डीसीपी ईस्ट राहुल जैन ने कमान संभाली। परिजनाें से कहा कि बदमाशाें काे बाताें में उलझाए रखाे। तब तक डीसीपी की स्पेशल टीम ने बदमाशाें के बारे में पूरी लाेकेशन और जानकारी कर ली। यहां तक कि सीकर से उनके रिश्तेदाराें तक भी पुलिस कुछ ही घंटाें पहुंच गई। बदमाशाें का पता चलते ही पांच टीमें रवाना कर दी। नेछवा पुलिस काे सूचना देकर नाकाबंदी करवा दी।
बेटी ने उलझाया तो एक कराेड़ तक आ गए
व्यवसायी के अपहरण की सूचना के बाद जब पुलिस काे पता चला कि अपहर्ता संपर्क में है और फिराैती मांग रहे हैं ताे पुलिस अधिकारियाें ने बदमाशाें काे बाताें में उलझाए रखने की बात कही। जिसके चलते व्यवसायी की बेटी अपहरण की राशि ज्यादा हाेने की बात कहकर कम करने की बात कही। जिस पर बदमाशाें ने पहले चार कराेड फिर तीन कराेड़ और आखिर में एक कराेड रूपए फिराैती के रूप में देना तय हुआ। इस दाैरान पुलिस अपना काम करती रही और लाेकेशन की पूरी जानकारी ले ली।
विक्रम ने कबूला-हां, मैंने ही करवाया था व्यापारी का फिराैती के लिए अपहरण
इधर बदमाशाें के माेबाइल नंबर भी पुलिस काे मिल गए। जांच में पता चला कि बदमाश और किराएदार विक्रम सिंह में माेबाइल पर बातें हुई है। इसके बाद पुलिस ने विक्रम सिंह काे हिरासत में लेकर सख्ती से पूछताछ की ताे विक्रम ने कबूल लिया कि उसने ही दाे अन्य परिचिताें काे बुलाकर फिराैती के लिए अपहरण करवाया था। व्यवसायी और अपहर्ताओं की लाेकेशन सीकर की ओर जाने की सामने आई ताे पुलिस ने नेछवा के पास नाकाबंदी करवा दी। इसी दाैरान बदमाशाें ने विक्रम काे फाेन किया ताे उन्हें अहसास हाे गया कि विक्रम काे पुलिस ने पकड़ लिया है। नेछवा के पास नाकाबंदी देखकर बदमाशाें ने बाेरे में बंधे व्यवसायी काे नेछवा के जंगल में फेंक गए। पीछा करती हुई पुलिस ने माेबाइल के आधार पर बदमाशाें काे दबाेच लिया। इसके बाद नेछवा के जंगल में सर्च अभियान चलाया ताे व्यवसायी बाेरे में बंधे हुए मिल गए।
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