पहली बार / रेलवे ने दो साल जूनियर को सीनियर बनाया, सीनियर ने कैट में चुनौती दी

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  • उत्तर पश्चिम रेलवे में प्रिंसिपल सीएसटीई के पद का मामला
  • डीपीसी बनाने में की गई नियमों की अवहेलना

Dainik Bhaskar

Jan 15, 2020, 12:18 AM IST

जयपुर (शिवांग चतुर्वेदी). रेलवे में पिछले दिनों एक ऐसा मामला सामने आया जब उत्तर पश्चिम रेलवे, जयपुर में सिग्नल एंड टेलीकॉम विभाग के प्रमुख के पद पर उस अधिकारी को अपॉइन्ट किया गया है, जो वहां पहले से ही मौजूद एक अधिकारी से दो साल जूनियर है। जबकि सीनियर ऑफिसर ने इस पद का अतिरिक्त चार्ज लिया हुआ था। इस पद पर जूनियर को पोस्टिंग देने के बाद सीनियर ने नियमों की अवहेलना का आरोप लगाते हुए केंद्रीय प्राशासनिक प्राधिकरण (कैट) में इसे चुनौती दी है।


ये है पूरा मामला

उत्तर पश्चिम रेलवे मुख्यालय में प्रिंसिपल चीफ सिग्नल एंड टेलीकॉम इंजीनियर (पीसीएसटीई) का पद अगस्त 2019 में खाली हुआ। इस पद का अतिरिक्त चार्ज चीफ सिग्नल इंजीनियर ओम मेहरा को दिया गया। क्योंकि मेहरा विभाग में सबसे सीनियर थे। रेलवे बोर्ड ने नवंबर में इस पद पर मोहन डूडेजा को नियुक्ति दे दी। जो कि मेहरा से दो साल जूनियर हैं। आदेश को मेहरा ने अब कैट में चुनौती दी है।

ऐसे तोड़े गए नियम
जब किसी विभाग में पदोन्नति देने के लिए डिपार्टमेंटल प्रमोशन कमेटी (डीपीसी) बनाई जाती है, तो उससे पहले 5 साल की वार्षिक गोपनीय प्रतिवेदन (एसीआर/एपीएआर) को आधार माना जाता है। इस मामले में रेलवे ने इस नियम की अवहेलना की। ऐसा इसलिए क्योंकि जो डीपीसी मार्च 2019 में बनी थी, उसमें 2013-14 से 2017-18 तक की ही एसीआर को आधार मानना था। रेलवे ने नियम की अवहेलना करते हुए 2012-13 से 2016-17 तक की एसीआर को आधार मानते हुए प्रमोशन किया।

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